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वाघ बकरी, रत्नमणि ट्यूब ने जीवदया ट्रस्ट को दान में दिए तीन नए एनिमल एम्बुलेंस

जीवदया चैरिटेबल ट्रस्ट (जेसीटी) ने मंदी वाले वित्तीय वर्ष को अच्छे दिनों के साथ समाप्त किया है। अहमदाबाद के दो प्रमुख कॉर्पोरेट घरानों ने पशुओं की देखभाल के लिए तीन बिल्कुल नई एम्बुलेंस दान की हैं। आपातकालीन देखभाल के लिए पूरी तरह से सुसज्जित, तीन मारुति ईको एम्बुलेंस की कीमत 7 लाख रुपये से थोड़ी ही अधिक है। यह दान वाघ बकरी समूह और रत्नमणि ट्यूब ने किए हैं। दरअसल दोनों लंबे समय से जेसीटी के प्रायोजक हैं।

जेसीटी बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के सदस्य कार्तिक शास्त्री

जेसीटी जैसे चैरिटेबल ट्रस्टों के लिए महामारी वाले वर्ष काफी कठिन रहे हैं।  दान की गति धीमी हो गई थी। जेसीटी गुजरात के सबसे बड़े पशु अस्पताल का संचालन करता है और इसका बजट 25 लाख रुपये प्रति माह है, जिसमें से 20 लाख रुपये 12 पूर्णकालिक पशु चिकित्सकों और सहायक कर्मचारियों के वेतन के लिए जाते हैं। अपनी प्रतिष्ठा की खातिर ट्रस्ट ने खराब वित्तीय स्थिति के बावजूद अपने संचालन में कटौती नहीं की है। जेसीटी बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के सदस्य कार्तिक शास्त्री कहते हैं, “हमें महामारी वाले पिछले दो वर्षों में अपनी बचत से रोजाना के खर्चों को पूरा करना पड़ा है, लेकिन हम अब चीजों में सुधार की उम्मीद करते हैं।”

संजय पटेल, जेसीटी महाप्रबंधक

जेसीटी का सबसे व्यस्त समय जनवरी में होता है, उत्तरायण उत्सव के दौरान, जब पतंगबाजी बड़ी संख्या में पक्षियों को घायल करती है। इस साल भी 5,000 से अधिक घायल पक्षियों को इलाज के लिए लाया गया था, और उन पर कुल खर्च 18 लाख रुपये से अधिक का था। यही कारण है कि जेसीटी के अत्यधिक अनुभवी पक्षियों (एवियन) के डॉक्टर अपनी विशेषज्ञता के लिए पूरे देश में मांग में हैं। खासकर जब खतरे वाली प्रजातियों के इलाज की बात आती है। जेसीटी के एवियन काम की देखरेख करने वाले कार्तिक शास्त्री कहते हैं, “हमें हाल ही में जैसलमेर से एक तत्काल अनुरोध प्राप्त हुआ, जहां एक भारतीय सारंग पक्षी घायल पाया गया और उसे सर्जरी की जरूरत थी। हमारे डॉक्टर इस क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं।”

जेसीटी पशु अस्पताल अहमदाबाद शहर के पॉश इलाके अंबावाड़ी में पंजरापोल परिसर में स्थित है। यहां तमाम सुविधाएं मौजूद हैं। बड़ी संख्या में कबूतरों के अलावा एवियन सेक्शन ने स्टॉर्क, डेमोइसेल क्रेन, खलिहान उल्लू, इबिस और ग्रेलाग गीज का इलाज किया है। इन सभी को शहर के बाहरी इलाके से बचाया गया और वे पुनर्वास के दौर से गुजर रहे हैं। फिर खरगोश और कछुए, बिल्ली के बच्चे और कुत्ते भी हैं, जिन सभी को वार्डों में रखा गया है। जेसीटी की अब बड़े जानवरों के लिए एक परिसर शुरू करने की योजना है। इसके लिए वह जमीन की तलाश कर रही है। जेसीटी महाप्रबंधक संजय पटेल कहते हैं, “नया परिसर शहर के बाहर होगा और ऊंट, घोड़ों और गायों के इलाज के लिए सुसज्जित होगा।”

आर्थिक विकास के साथ अहमदाबादियों ने पिछले दो दशकों में बड़े पैमाने पर पालतू जानवरों को अपनाया है। फिर भी जहां पालतू जानवरों के भोजन और सामान बेचने वाली दुकानें अब बहुत अधिक हैं, वहीं पशु चिकित्सा सेवाएं पिछड़ गई हैं। नतीजतन अधिक से अधिक लोग अपने पालतू जानवरों को जेसीटी में ला रहे हैं। हालांकि यह वह मकसद नहीं है, जिसे पूरा करने के लिए ट्रस्ट बनाया गया है। लेकिन संस्था लोगों को निराश करने के लिए भी नहीं है। इसके दरवाजे खटखटाने वालों की समस्याओं को दूर करने की पूरी कोशिश की जाती है। जब संजय पटेल दो साल पहले जेसीटी में आए थे, तब यहां केवल आठ डॉक्टर और 55 कर्मचारी थे। आज इसमें 12 डॉक्टर और 70 कर्मचारी हैं। पटेल कहते हैं, ‘हमारा परिचालन सालाना 20 फीसदी की दर से बढ़ रहा है और हमारे खर्च भी इसी तरह बढ़ रहे हैं।”  

2007 में गिरबेन शाह द्वारा शुरू किया गया जेसीटी घायल जानवरों के इलाज में माहिर है। बता दें कि शाह परिवार के पास Accumax Lab Devices Pvt Ltd का स्वामित्व है। जेसीटी का उद्देश्य है “शहरवासियों के बीच अवाक प्राणियों के लिए करुणा की भावना पैदा करना, ताकि पशु क्रूरता में कमी लाई जा सके।” जेसीटी पशु चिकित्सा सेवाएं निःशुल्क प्रदान करता है, हालांकि मालिक अक्सर दान करते हैं (जिस पर वे धारा-80 जी के तहत टैक्स लाभ का दावा कर सकते हैं)। अहमदाबाद की कई कंपनियां अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) वाली योजनाओं के तहत जेसीटी को दान देती हैं। सरकार ने अनिवार्य किया है कि सभी कंपनियां अपने वार्षिक मुनाफे का एक हिस्सा सीएसआर के लिए अलग से रखें।