वॉशिंगटन – कई देशों पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौता “करीब” है।
वॉशिंगटन और नई दिल्ली के वार्ताकार एक सीमित ‘मिनी डील’ को अंतिम रूप देने की कोशिश में जुटे हैं, जिसका मकसद कुछ वस्तुओं पर टैरिफ घटाना है। हालांकि, कृषि और डेयरी सेक्टर को लेकर मतभेद अब भी इस प्रक्रिया में बाधा बने हुए हैं।
ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में कहा, “हमने यूनाइटेड किंगडम से समझौता किया है, चीन से किया है, और हम भारत के साथ भी समझौते के करीब हैं… कुछ देशों से मुलाकात के बाद लगा कि उनसे समझौता नहीं हो पाएगा। तो उन्हें बस एक चिट्ठी भेज देते हैं।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने कई अहम व्यापार साझेदार देशों—जैसे बांग्लादेश, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया और जापान—को पहली औपचारिक चेतावनी भेजी है, जिसमें 1 अगस्त से टैरिफ बढ़ाने की बात कही गई है।
राष्ट्रपति ने कहा, “हम अलग-अलग देशों को चिट्ठी भेज रहे हैं कि उन्हें कितना टैरिफ देना होगा। कुछ देशों के लिए थोड़ा एडजस्टमेंट हो सकता है अगर उनके पास कोई ठोस कारण हो—हम नाइंसाफी नहीं करेंगे।”
‘मिनी डील’ में फंसा पेंच: कृषि और डेयरी पर विवाद
अमेरिका और भारत कई महीनों से एक सीमित व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। उद्देश्य है चुनिंदा उत्पादों पर शुल्क कम करना। लेकिन अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने की मांग को लेकर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पा रही है। खास तौर पर जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों को लेकर भारत की पुरानी आपत्ति बनी हुई है, जिसे किसानों के हित और खाद्य सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा माना जाता है।
अमेरिका भारत के डेयरी सेक्टर में भी ज्यादा बाजार पहुंच चाहता है। लेकिन दोनों सेक्टरों को संभावित समझौते से बाहर रखने की संभावना है, क्योंकि इससे ग्रामीण आजीविका और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
हालांकि कृषि भारत की $3.9 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था में केवल 16% का योगदान देती है, लेकिन यह देश की 1.4 अरब आबादी के लगभग आधे हिस्से को जीविका देती है। अमेरिकी उत्पादों के सस्ते आयात से स्थानीय कीमतों में गिरावट का खतरा है, जिससे विपक्ष को सरकार पर हमला करने का नया मुद्दा मिल सकता है।
भारत ने परंपरागत रूप से कृषि को मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से बाहर रखा है ताकि किसानों की सुरक्षा की जा सके। अगर अमेरिका को यह छूट मिलती है तो भारत को अन्य साझेदार देशों को भी ऐसी ही रियायतें देनी पड़ सकती हैं।
भारत की मांग: श्रम-प्रधान निर्यातों पर शुल्क में कटौती
इस बीच, भारत अपने श्रम-प्रधान निर्यात जैसे जूते, वस्त्र और चमड़े के उत्पादों पर अमेरिका से वास्तविक टैरिफ कटौती चाहता है। ये क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करते हैं।
भारतीय वार्ताकारों का कहना है कि समझौता परस्पर लाभकारी होना चाहिए, जिसमें दोनों पक्षों को सेक्टरल एक्सेस और निर्यात पर शुल्क कटौती मिले। नई दिल्ली का तर्क है कि व्यापक रियायतों के बिना—खासकर उन उत्पादों पर जो बड़ी संख्या में रोजगार देते हैं—2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $500 अरब तक पहुंचाने का लक्ष्य अव्यावहारिक है।
NDTV प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, वार्ता का फोकस अब परस्पर शुल्क कटौती या हटाने पर केंद्रित हो गया है। दोनों देशों के अधिकारी समग्र टैरिफ बाधाओं को कम करने की प्राथमिकता देने की अपील कर रहे हैं।











