मुंबई की विशेष एनआईए अदालत ने गुरुवार को 17 साल पुराने मालेगांव ब्लास्ट केस में फैसला सुनाते हुए सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। इनमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय रहीरकर, सुधाकर धर द्विवेदी उर्फ शंकराचार्य और समीर कुलकर्णी शामिल हैं।
विशेष न्यायाधीश ए.के. लाहोटी ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को “संदेह से परे” साबित करने में असफल रहा है।
न्यायाधीश ए.के. लाहोटी ने कहा, “समाज के खिलाफ एक गंभीर घटना हुई थी, लेकिन नैतिक आधार पर दोष सिद्ध कर सजा नहीं दी जा सकती। आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता।”
प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित पर क्या थे आरोप?
- एटीएस (ATS) ने दावा किया था कि मोटरसाइकिल प्रज्ञा ठाकुर की थी और उसी में विस्फोटक लगाया गया था।
- आरोप था कि कर्नल पुरोहित ने आरडीएक्स की व्यवस्था की और ‘अभिनव भारत’ नामक संगठन के माध्यम से साजिश रची।
- 2011 में मामला एनआईए (NIA) को सौंपा गया था।
कोर्ट ने क्या कहा?
- प्रज्ञा ठाकुर की मोटरसाइकिल होने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले।
- फोरेंसिक जांच में चेसिस नंबर पूरा नहीं मिल सका, जिससे बाइक का स्वामित्व सिद्ध नहीं हुआ।
- कर्नल पुरोहित द्वारा आरडीएक्स लाने या बम असेंबल करने के भी कोई प्रमाण नहीं पाए गए।
- कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘अभिनव भारत’ संगठन की आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला।
मुआवजे की घोषणा
कोर्ट ने मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 मुआवजा देने का आदेश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने यह माना कि 6 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन 101 लोगों के घायल होने के दावे को प्रमाणित नहीं माना।
फैसले के बाद क्या बोले आरोपी?
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए भावुक होकर कहा, “17 सालों से मेरा जीवन बर्बाद कर दिया गया। ईश्वर उन लोगों को सजा देगा जिन्होंने भगवा को अपमानित करने की कोशिश की। आज भगवा की जीत हुई है, हिंदुत्व की जीत हुई है।”
लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित ने कहा, “मैं एक देशभक्त सैनिक हूं। मानसिक रूप से बीमार लोगों का शिकार बना हूं। कुछ लोगों ने हमारे अधिकारों का दुरुपयोग किया और हमें भुगतना पड़ा।”
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