पटना: बिहार की राजनीति में मंगलवार को उस वक्त एक नया भूचाल आ गया जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आर. के. सिंह ने अपनी ही पार्टी के दो बड़े नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
उन्होंने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से मांग की है कि वे जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर या तो सार्वजनिक रूप से सफाई दें या फिर अपने पदों से इस्तीफा दे दें।
72 वर्षीय पूर्व नौकरशाह और राजनेता आर. के. सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इन दोनों नेताओं की चुप्पी से पार्टी की विश्वसनीयता और छवि को भारी नुकसान पहुँच रहा है। सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वे 2024 के लोकसभा चुनाव में आरा सीट हारने के बाद से पार्टी नेतृत्व से कुछ नाराज चल रहे हैं और राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए NDA के घटक दलों के बीच सीटों के बँटवारे पर बातचीत चल रही है।
‘7वीं फेल और हत्या के आरोप, जवाब क्यों नहीं देते?’
आर. के. सिंह ने प्रशांत किशोर की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए कहा, “उनके (चौधरी और जायसवाल) खिलाफ कुछ बहुत गंभीर आरोप लगाए गए हैं… किशोर लगातार कह रहे हैं कि सम्राट चौधरी 7वीं फेल हैं, तो उन्हें जनता को अपनी डिग्री दिखानी चाहिए… अगर ऐसा नहीं होता है, तो इससे पार्टी की साख पर बुरा असर पड़ रहा है।”
उन्होंने आगे कहा, “यह भी कहा जा रहा है कि सम्राट चौधरी ने तीन या चार बार अपना नाम बदला है… इसी तरह, दिलीप जायसवाल पर हत्या का आरोप लगाया जा रहा है।” सिंह ने जोर देकर कहा कि इन दोनों नेताओं को या तो प्रशांत किशोर के आरोपों का कानूनी रूप से जवाब देना चाहिए या फिर नैतिकता के आधार पर अपने पद छोड़ देने चाहिए।
कौन हैं आर. के. सिंह?
आर. के. सिंह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1975 बैच के बिहार कैडर के अधिकारी रहे हैं और केंद्रीय गृह सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने 2013 में भाजपा की सदस्यता ली और 2014 एवं 2019 में आरा लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में ऊर्जा और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में भी कार्य किया।
2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें CPI(ML) के नेता सुदामा प्रसाद के हाथों 59,808 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। अपनी हार के बाद से ही वे बिहार में NDA के नेताओं से, जिनमें उनकी अपनी पार्टी के नेता भी शामिल हैं, नाराज चल रहे हैं। उन्होंने तो यहाँ तक चेतावनी दी थी कि वे उन लोगों के खिलाफ प्रचार करेंगे जिन्होंने चुनाव में उनके विरुद्ध काम किया था।
अपनी ही पार्टी के विधायकों के खिलाफ खोला मोर्चा
आर. के. सिंह ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष जे. पी. नड्डा को स्पष्ट रूप से बता दिया है कि यदि दो मौजूदा भाजपा विधायकों – अमरेंद्र प्रताप सिंह (आरा) और राघवेंद्र प्रताप सिंह (बड़हरा) – को फिर से टिकट दिया गया तो वे उनका विरोध करेंगे।
इतना ही नहीं, उन्होंने JDU नेतृत्व को भी दो MLC को लेकर आगाह किया है। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी पार्टी के अध्यक्ष और JDU प्रमुख को भी यह साफ कर दिया है कि अगर इन लोगों को टिकट दिया गया तो मैं इनका विरोध करूँगा… भगवान सिंह कुशवाहा, जिनका एक कुख्यात आपराधिक इतिहास रहा है… उन्होंने राजद से मेरे खिलाफ चुनाव लड़ा था और अब JDU के साथ हैं। मैंने सुना है कि JDU उन्हें टिकट देने पर विचार कर रही है… अगर ऐसा हुआ तो मैं उनके खिलाफ प्रचार करूँगा। दूसरा नाम राधा चरण शाह का है, जो JDU से ही हैं और उनका अतीत भी विवादास्पद रहा है… उन्हें ED ने गिरफ्तार किया था और फिर भी उन्हें MLC बनाया गया… मैं उनके खिलाफ भी सक्रिय रूप से प्रचार करूँगा।”
जब उनसे खुद चुनाव लड़ने की योजना के बारे में पूछा गया, तो सिंह ने कहा कि वह तभी चुनाव लड़ेंगे जब “पार्टी उन्हें ऐसा करने के लिए कहेगी”।
उधर, किशोर को ₹100 करोड़ का मानहानि नोटिस
इस बीच, JDU नेता अशोक चौधरी ने मंगलवार को प्रशांत किशोर को ₹100 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है। किशोर ने उन पर ₹200 करोड़ की संदिग्ध जमीन खरीद से जुड़े होने का आरोप लगाया था।
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