अहमदाबाद/नई दिल्ली: गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की जेल से बाहर आने की संभावनाओं पर गृह मंत्रालय (MHA) ने एक बार फिर विराम लगा दिया है। मंत्रालय ने इस साल अगस्त में एक आदेश का नवीनीकरण (renewal) करते हुए लॉरेंस बिश्नोई की आवाजाही पर लगी रोक को एक और वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। बिश्नोई वर्तमान में अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है।
जेल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बुधवार को पुष्टि की कि गृह मंत्रालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 303 के तहत लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ प्रतिबंध के आदेश को रिन्यू किया है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस आदेश के प्रभावी रहने तक लॉरेंस को किसी भी कारण से जेल परिसर से बाहर नहीं ले जाया जाएगा। यदि किसी मामले में उसकी कोर्ट में पेशी जरूरी हुई, तो वह केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही होगी।
तीसरी बार जारी हुआ प्रतिबंध आदेश
यह लगातार तीसरा वर्ष है जब लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ ऐसा प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है। इससे पहले एक बार दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत और दो बार बीएनएसएस (BNSS) के तहत यह आदेश दिया जा चुका है। इसका सीधा अर्थ है कि जब तक यह आदेश लागू है, लॉरेंस को गुजरात की जेल से बाहर किसी दूसरे राज्य या अदालत में शारीरिक रूप से ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
भाई अनमोल की गिरफ्तारी के बीच लॉरेंस पर शिकंजा
यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब लॉरेंस के भाई, अनमोल बिश्नोई को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर बुधवार को भारत लाया गया है। भारत आते ही नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने अनमोल को गिरफ्तार कर लिया। अनमोल बिश्नोई, जो 2022 में भारत से फरार हो गया था और जिसे अमेरिका में शरण देने से मना कर दिया गया था, लॉरेंस के नेतृत्व वाले आतंकी सिंडिकेट में शामिल होने के आरोप में NIA द्वारा गिरफ्तार किया गया 19वां आरोपी है।
इसके अलावा, अनमोल 12 अक्टूबर, 2024 को एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या की साजिश में भी महाराष्ट्र पुलिस द्वारा वांछित है। जहां एक तरफ उसका भाई अब जांच एजेंसियों की गिरफ्त में है, वहीं गैंग का कथित सरगना लॉरेंस पिछले ढाई साल से अधिक समय से गुजरात की जेल में बंद है।
जांच एजेंसियों को भी जेल में जाकर करनी होगी पूछताछ
लॉरेंस बिश्नोई पर दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं और उस पर कई देशों में फैले एक विशाल आपराधिक नेटवर्क को चलाने का आरोप है। गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार, अगस्त 2023 से ही उसकी गतिविधियों को अहमदाबाद जेल के परिसर तक सीमित कर दिया गया है। इस प्रतिबंध का मतलब है कि अगर किसी राज्य की पुलिस या जांच एजेंसी उससे पूछताछ करना चाहती है, तो उन्हें उसे कस्टडी में लेने के बजाय साबरमती सेंट्रल जेल में जाकर ही पूछताछ करनी होगी।
कैसे पहुंचा साबरमती जेल?
लॉरेंस बिश्नोई 10 मई, 2023 से साबरमती जेल में बंद है। 10 नवंबर, 2025 तक उसे यहाँ रहते हुए दो साल और सात महीने का समय बीत चुका है।
इससे पहले वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था, जहाँ NIA एक मामले की जांच कर रही थी। अप्रैल 2023 में गुजरात एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने उसे एक ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला 14 सितंबर, 2022 को कच्छ के जखाऊ तट से 194.97 करोड़ रुपये की कीमत वाली 38.994 किलोग्राम हेरोइन की जब्ती से जुड़ा था। कच्छ कोर्ट द्वारा दी गई 14 दिनों की पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद, उसे 10 मई, 2023 को साबरमती सेंट्रल जेल भेज दिया गया था।
कानूनी प्रावधान और आदेश का इतिहास
- अगस्त 2023: गृह मंत्रालय ने सबसे पहले CrPC की धारा 268 के तहत आदेश जारी किया था। इस धारा के मुताबिक, राज्य सरकार किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को जेल से हटाने पर रोक लगा सकती है, जिससे धारा 267 के तहत जारी अन्य कोई भी पेशी वारंट प्रभावी नहीं रहता।
- अगस्त 2024: पिछले आदेश के समाप्त होने पर, और जुलाई 2024 में तीन नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद, MHA ने BNSS की धारा 303 के तहत नया आदेश जारी किया। यह आदेश अगस्त 2025 तक वैध था।
- ताजा स्थिति: अब इसी धारा 303 के तहत प्रतिबंध को फिर से रिन्यू किया गया है।
BNSS की धारा 303 केंद्र या राज्य सरकार को यह शक्ति प्रदान करती है कि वह कानून-व्यवस्था और जनहित को ध्यान में रखते हुए किसी कैदी को जेल से बाहर ले जाने (Transfer or Removal) पर रोक लगा सकती है।
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