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गुजरात: NHRC के आंकड़ों ने चौंकाया, राज्य में माफियाओं से 4 गुना ज्यादा पुलिस के खिलाफ शिकायतें

| Updated: December 3, 2025 16:10

हिरासत में टॉर्चर और झूठे केस: 7 साल में पुलिस के खिलाफ आईं 4,535 शिकायतें, जबकि माफियाओं पर सिर्फ 1,024; जिग्नेश मेवानी और AAP ने उठाए सवाल

गांधीनगर/अहमदाबाद: गुजरात में जहां एक तरफ सियासी पारा चढ़ा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ एक बेहद चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर जारी आंकड़ों ने एक परेशान करने वाला ट्रेंड दिखाया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के पास पहुंची शिकायतों से पता चलता है कि गुजरात की जनता राज्य के संगठित आपराधिक गिरोहों (Organised Criminal Networks) से ज्यादा अपनी ही पुलिस से त्रस्त है।

सियासी वार-पलटवार के बीच कड़वा सच

अभी हाल ही में वडगाम से कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी ने राज्य की बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लिया था। उन्होंने राज्य में शराब और ड्रग्स के कथित खुलेआम कारोबार को लेकर गृह विभाग संभाल रहे डिप्टी सीएम हर्ष संघवी पर तीखे हमले किए थे। लेकिन अब NHRC में दर्ज शिकायतों के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे मेवानी के आरोपों से भी ज्यादा गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।

आंकड़े बताते हैं कि 2017 से 2024 के बीच, गुजरात पुलिस के खिलाफ शिकायतों की संख्या अपराधियों के खिलाफ मिली शिकायतों से कहीं ज्यादा रही।

क्या कहते हैं आंकड़े?

Media रिपोर्टों और आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति स्पष्ट हो जाती है:

  • इस अवधि के दौरान पुलिस के खिलाफ कुल 4,535 शिकायतें दर्ज की गईं।
  • जबकि इसी समय सीमा में क्राइम सिंडिकेट्स (अपराध गिरोहों) के खिलाफ केवल 1,024 शिकायतें ही प्राप्त हुईं।

साल-दर-साल का लेखा-जोखा

आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण करने पर एक पैटर्न दिखाई देता है:

  • अपराधियों के खिलाफ: 2017 से 2021 के बीच कानून तोड़ने वालों के खिलाफ 912 शिकायतें थीं। 2021-22 में यह संख्या 86 रही, 2022-23 में गिरकर 16 हुई और 2023-24 में यह महज 10 रह गई।
  • पुलिस के खिलाफ: पुलिस के खिलाफ शिकायतों का ग्राफ भी नीचे आया है, लेकिन संख्या अभी भी चिंताजनक है। 2017 से 2021 के बीच 3,307 शिकायतें थीं। 2021-22 में 477, 2022-23 में 363 और 2023-24 में यह आंकड़ा 288 दर्ज किया गया।

पुलिस पर गंभीर आरोप

NHRC में पुलिस के खिलाफ जो शिकायतें पहुंची हैं, वे मामूली नहीं हैं। इनमें हिरासत में प्रताड़ना (Custodial Torture), गलत तरीके से हिरासत में रखना (Wrongful Detention) और झूठे आपराधिक मामलों (Fabrication of Cases) में फंसाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

नेताओं की प्रतिक्रिया: ‘सिस्टम पर सवाल’

इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक जिग्नेश मेवानी ने ‘वाइब्स ऑफ इंडिया’ से कहा कि ये आंकड़े खुद गवाही दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह दर्शाता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है।”

वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) की गुजरात इकाई के अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने भी इस मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने वाइब्स ऑफ इंडिया को बताया, “सभी पुलिसकर्मी बुरे नहीं हैं, लेकिन कुछ गुंडे अपना काम निकलवाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “पुलिस नेताओं और स्थानीय गुंडों के इशारों पर काम करती है।”

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