नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) की सैकड़ों उड़ानें रद्द होने से विमानन क्षेत्र में मचे हाहाकार के बीच राजनीति भी गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस अव्यवस्था के लिए केंद्र सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। शुक्रवार को सरकार पर हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा संकट सरकार के “एकाधिकार मॉडल” (Monopoly Model) का परिणाम है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
आम आदमी चुका रहा है कीमत: राहुल गांधी
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विमानन क्षेत्र में “निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा” (Fair Competition) की वकालत की। उन्होंने लिखा, “इंडिगो की यह विफलता इस सरकार के एकाधिकार मॉडल की कीमत है। एक बार फिर, यह देश के आम नागरिक हैं जो देरी, उड़ानों के रद्द होने और लाचारी के रूप में इसकी कीमत चुका रहे हैं।”
राहुल गांधी के इस बयान का समर्थन करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश संसाधन कुछ ही लोगों के हाथों में सिमट गए हैं। प्रियंका गांधी ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि देश भर में ज्यादातर चीजें कुछ चुनिंदा लोगों के पास हैं और यह इस सरकार का किया धरा है। यह न तो अर्थव्यवस्था के लिए स्वस्थ है, न ही लोकतंत्र के लिए और न ही देश के लिए।”
सैकड़ों उड़ानें रद्द, यात्री परेशान
इंडिगो एयरलाइंस के संचालन में आई बाधा के कारण यात्रियों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चिंताजनक है:
- गुरुवार: अकेले एक दिन में 550 से अधिक उड़ानें रद्द की गईं।
- शुक्रवार: अब तक 450 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल हो चुकी हैं।
सबसे ज्यादा असर देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर देखने को मिला है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लगभग 225 उड़ानें रद्द हुईं, जबकि बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 100 से अधिक और हैदराबाद के राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 90 उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ।
क्या है संकट की वजह?
एयरलाइन ने इस भारी व्यवधान के लिए ‘केबिन क्रू’ (चालक दल) की कमी और अन्य परिचालन चुनौतियों को जिम्मेदार ठहराया है। इंडिगो ने ‘X’ के माध्यम से यात्रियों से माफी भी मांगी है। इस बीच, इंडिगो ने ए320 (A320) बेड़े के लिए कुछ ‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन्स’ (FDTL) नियमों से 10 फरवरी, 2026 तक अस्थायी छूट की मांग की है और आश्वासन दिया है कि तब तक स्थिति स्थिर हो जाएगी।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने गुरुवार को एक समीक्षा बैठक की, जिसमें यह नोट किया गया कि ये दिक्कतें संशोधित FDTL नियमों के ‘फेज 2’ को लागू करने में आ रही चुनौतियों, क्रू-प्लानिंग में कमी और सर्दियों के मौसम के दबाव के कारण पैदा हुई हैं। गौरतलब है कि थकान-प्रबंधन (Fatigue-management) से जुड़े ये नए नियम अदालती निर्देशों के बाद 1 जुलाई और 1 नवंबर, 2025 को दो चरणों में लागू किए गए थे।
संसद में गूंजा मुद्दा
हवाई यात्रियों की परेशानियों का मुद्दा संसद तक भी पहुंच गया है। शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने आज राज्यसभा में नियम 180 के तहत नोटिस दिया। उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू से इस मुद्दे पर बयान देने की मांग की है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे ‘अत्यंत लोक महत्व’ का विषय बताते हुए कहा कि इंडिगो के संचालन में व्यापक व्यवधान के कारण यात्रियों को 7-7 घंटे तक की देरी का सामना करना पड़ा है। मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे प्रमुख हवाई अड्डों के साथ-साथ मुंबई-मालदीव जैसी अंतरराष्ट्रीय सेवाओं पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। उन्होंने सरकार से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जवाबदेही तय करने और तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।
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