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गुजरात बना देश का सबसे बड़ा ‘भिंडी’ उत्पादक: वाइब्रेंट गुजरात समिट 2026 से पहले सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र बना हॉर्टिकल्चर का नया पावरहाउस

| Updated: December 30, 2025 13:08

VGRC 2026 से पहले सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र ने हॉर्टिकल्चर में लगाई लंबी छलांग; 2023-24 में 11.68 लाख टन उत्पादन के साथ गुजरात ने देशभर में किया टॉप।

गांधीनगर/राजकोट: गुजरात ने कृषि क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश के सबसे बड़े भिंडी (Okra) उत्पादक राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाई है। विशेष रूप से, राज्य का सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र बागवानी (हॉर्टिकल्चर) के लिए विकास का एक प्रमुख इंजन बनकर उभरा है। अधिकारियों ने सोमवार (29 दिसंबर, 2025) को जानकारी दी कि राजकोट में आयोजित होने वाले ‘वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (VGRC) 2026’ से पहले यह उपलब्धि राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

आंकड़े बयां कर रहे सफलता की कहानी

गुजरात के हॉर्टिकल्चर डायरेक्टर (बागवानी निदेशक) के अनुसार, वर्ष 2023-24 के दौरान गुजरात ने भिंडी की खेती के रकबे (क्षेत्रफल) और कुल उत्पादन, दोनों ही मामलों में भारत में पहला स्थान हासिल किया है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो:

  • गुजरात में कुल 93,955 हेक्टेयर में भिंडी की खेती की गई।
  • राज्य का कुल उत्पादन 11.68 लाख टन रहा।
  • इसमें सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र की हिस्सेदारी खेती के क्षेत्रफल में लगभग 15% और कुल उत्पादन में लगभग 13% रही।

सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र की अहमियत इस बात से भी समझी जा सकती है कि वर्ष 2024-25 में, यहाँ के 12 जिलों में भिंडी की खेती का विस्तार हुआ, जो लगभग 14,000 हेक्टेयर तक पहुँच गया। इस दौरान क्षेत्र से करीब 1.5 लाख टन उत्पादन प्राप्त हुआ, जो राज्य के बागवानी परिदृश्य में इस क्षेत्र की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

सब्जी उत्पादन में गुजरात का दबदबा

वर्ष 2024-25 के दौरान भारत के कुल सब्जी उत्पादन में गुजरात का योगदान 7.66% रहा। इसी वर्ष, सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र में 2.32 लाख हेक्टेयर में बागवानी फसलों की खेती दर्ज की गई, जिससे 47.91 लाख मीट्रिक टन हॉर्टिकल्चर आउटपुट प्राप्त हुआ।

विशेषज्ञों के लिए सबसे उत्साहजनक बात यहाँ की उत्पादकता दर (Productivity) रही, जो 20.60 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि राज्य के किसान अब बेहतर कृषि पद्धतियों, उन्नत एग्री-इंफ्रास्ट्रक्चर और उच्च दक्षता के साथ खेती कर रहे हैं।

पारंपरिक फसलों से बागवानी की ओर बढ़ता रुझान

गुजरात के कृषि विकास में अब बागवानी का योगदान महत्वपूर्ण हो गया है। प्रति हेक्टेयर बेहतर रिटर्न और उच्च उत्पादकता के कारण बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक फसलों को छोड़कर बागवानी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। सरकार की सक्रिय नीतियों के समर्थन से, अब राज्य के कुल कृषि क्षेत्र के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से पर बागवानी फसलें उगाई जा रही हैं।

सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का मिल रहा लाभ

बागवानी विभाग द्वारा राज्य प्रोत्साहन योजनाओं के साथ-साथ केंद्र प्रायोजित योजनाओं जैसे ‘एकीकृत बागवानी विकास मिशन’ (MIDH) और ‘राष्ट्रीय बागवानी मिशन’ (NHM) को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।

इन पहलों का मुख्य फोकस निम्न बिंदुओं पर है:

  • क्षेत्र-आधारित क्लस्टर विकास।
  • संरक्षित खेती (Protected Cultivation)।
  • पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट और कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर।
  • स्वच्छ रोपण सामग्री और क्षमता निर्माण कार्यक्रम।

MIDH के तहत, किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को हाई-टेक हॉर्टिकल्चर, पॉलीहाउस, पैकहाउस, ग्रेडिंग और पैकिंग यूनिट्स, प्रशिक्षण, प्रदर्शन और मार्केट लिंकेज के लिए सब्सिडी प्रदान की जाती है।

VGRC 2026: भविष्य की रूपरेखा

यह मजबूत प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब गुजरात जनवरी 2026 में राजकोट में कच्छ और सौराष्ट्र के लिए VGRC (वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस) की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। सम्मेलन के साथ-साथ ‘वाइब्रेंट गुजरात रीजनल एग्जीबिशन’ (VGRE) का भी आयोजन किया जाएगा।

इस आयोजन का उद्देश्य क्षेत्रीय उपलब्धियों को उजागर करना, संतुलित विकास को बढ़ावा देना और सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश के नए द्वार खोलना है।

अधिकारियों ने बताया, “VGRC 2026 में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, वैश्विक विशेषज्ञों और इनोवेटर्स के एक साथ आने की उम्मीद है। विभिन्न सत्रों और प्रदर्शनियों के माध्यम से, यह सम्मेलन दिखाएगा कि कैसे सौराष्ट्र और कच्छ कृषि नवाचार और सतत विकास के अगले चरण का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

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