अहमदाबाद: अक्सर कंपनियां अपने ग्राहकों को लुभाने के लिए लॉयल्टी प्वॉइंट्स देती हैं, लेकिन बिना बताए उन्हें रद्द कर देना अब एक कंपनी के लिए मुसीबत बन गया है। अहमदाबाद के उपभोक्ता आयोग (Consumer Commission) ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ‘इंटरमाइल्स जेटप्रिविलेज प्राइवेट लिमिटेड’ (InterMiles JetPrivilege Pvt Ltd) को आदेश दिया है कि वह एक ‘फ्रीक्वेंट फ्लायर’ (नियमित हवाई यात्री) को उसके कैंसिल किए गए प्वॉइंट्स के बदले पैसे और मुआवजा दे।
आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 1.75 लाख रुपये की राशि का भुगतान करे, जो उसके लॉयल्टी प्वॉइंट्स की कीमत थी। इसके अलावा, ग्राहक को मानसिक परेशानी और सेवा में कमी के लिए 10,000 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा भी देना होगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला अहमदाबाद के नारनपुरा निवासी जयदीप पांड्या से जुड़ा है। पांड्या ने अलग-अलग एयरलाइंस में यात्रा करके 3.50 लाख से अधिक लॉयल्टी प्वॉइंट्स जमा किए थे, जिन्हें ‘इंटरमाइल्स’ कहा जाता है। इन प्वॉइंट्स की कुल वैल्यू 1.75 लाख रुपये से अधिक थी। इंटरमाइल्स (जिसे पहले जेटप्रिविलेज के नाम से जाना जाता था) एतिहाद एविएशन ग्रुप का हिस्सा है और एक ट्रैवल व लाइफस्टाइल रिवॉर्ड प्रोग्राम है।
इसके जरिए मेंबर्स फ्लाइट टिकट, होटल बुकिंग, गिफ्ट वाउचर या ईंधन के लिए प्वॉइंट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।
साल 2024 में जब जयदीप पांड्या ने अपने अकाउंट में लॉग-इन किया, तो वे यह देखकर हैरान रह गए कि उनका इंटरमाइल्स बैलेंस शून्य हो चुका था यानी उनके सारे प्वॉइंट्स कैंसिल कर दिए गए थे।
कोर्ट में कंपनी की दलीलें हुईं खारिज
पांड्या ने इसके खिलाफ ‘जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, अहमदाबाद (अतिरिक्त)’ में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके प्वॉइंट्स एक्सपायर या कैंसिल होने से पहले उन्हें कोई सूचना या चेतावनी नहीं दी गई। जब उन्होंने कंपनी से संपर्क किया, तो कंपनी ने दावा किया कि अक्टूबर 2023 में उन्हें एक ईमेल नोटिस भेजा गया था।
हालांकि, कंपनी सुनवाई के दौरान उस ईमेल की कॉपी या कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। कंपनी ने दलील दी कि कैंसिलेशन नियमों और शर्तों के तहत किया गया था और एक्सपायरी की जानकारी लॉग-इन के बाद उपलब्ध थी। अपने बचाव में कंपनी ने कुछ स्क्रीनशॉट्स और पॉलिसी के दस्तावेज दिखाए।
आयोग ने क्या कहा?
दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने कंपनी की दलीलों को नाकाफी माना। आयोग ने कहा कि कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि उसने वास्तव में एक्सपायरी से पहले ग्राहक को कोई विशिष्ट नोटिस भेजा था। इसके अलावा, पुरानी और नई एक्सपायरी पॉलिसियों के दस्तावेजों में भी अंतर पाया गया। कोर्ट ने कंपनी द्वारा पेश किए गए स्क्रीनशॉट्स को मानने से इनकार कर दिया क्योंकि उनमें महत्वपूर्ण विवरणों की कमी थी।
फैसला: ब्याज सहित लौटानी होगी रकम
अपने आदेश में कमीशन ने स्पष्ट कहा, “शिकायतकर्ता (पांड्या) विरोधी कंपनी से कैंसिल किए गए इंटरमाइल्स की राशि यानी 1,75,383 रुपये पाने के हकदार हैं।”
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि शिकायत दर्ज करने की तारीख से लेकर भुगतान होने तक इस राशि पर 7% प्रति वर्ष की दर से ब्याज भी दिया जाए। इसके साथ ही 10,000 रुपये का मुआवजा भी चुकाना होगा।
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