शांतिग्राम: अडानी यूनिवर्सिटी में पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) ‘शिक्षाविद’ (ShikshaVid) का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षण प्रभावशीलता को बढ़ाना, अकादमिक नेतृत्व को विकसित करना और क्लासरूम में छात्रों की भागीदारी को बेहतर बनाना था।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 द्वारा तैयार किए गए नए अकादमिक ढांचे के तहत भारत भर के विश्वविद्यालय संकाय (Faculty) की क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। इसी संदर्भ में अडानी यूनिवर्सिटी ने इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया।

22 से 27 दिसंबर तक चला कार्यक्रम
यह कार्यक्रम 22 से 27 दिसंबर तक यूनिवर्सिटी के शांतिग्राम परिसर में आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न विषयों के फैकल्टी सदस्यों ने हिस्सा लिया और समकालीन शिक्षण विधियों पर चर्चा की। इस पहल को विशेष रूप से शिक्षकों को छात्रों की बदलती जरूरतों, उभरती तकनीकों और उच्च शिक्षण संस्थानों की बढ़ती अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करने के लिए डिज़ाइन किया गया था।
राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अहम
कार्यक्रम की शुरुआत अडानी समूह की सामाजिक विकास शाखा, अडानी फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक वसंत गढवी के संबोधन से हुई। अपने संबोधन में गढवी ने राष्ट्र निर्माण और सतत विकास में सशक्त शिक्षकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने तेजी से बदलते अकादमिक माहौल में शिक्षकों के लिए निरंतर सीखने, अनुकूलन क्षमता और नेतृत्व को आवश्यक गुण बताया।
‘गुरु’ की बदलती भूमिका
यूनिवर्सिटी के प्रोवोस्ट डॉ. धवल पुजारा ने आज के शिक्षा इकोसिस्टम में ‘गुरु’ की बदलती भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक वह है जो छात्रों का मार्गदर्शन करता है, उनकी चुनौतियों को समझता है, अपने ज्ञान को लगातार अपडेट करता है और शिक्षार्थियों को केवल किताबी ज्ञान से ऊपर उठाता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि फैकल्टी सदस्यों से अब केवल कंटेंट डिलीवरी तक सीमित रहने के बजाय मेंटर और समग्र विकास के सूत्रधार (Facilitator) बनने की अपेक्षा की जा रही है।
इन विषयों पर हुआ मंथन
पांच दिनों तक चले ‘शिक्षाविद’ कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण विषयों को कवर किया गया:
- पेडागोगिकल इनोवेशन (शिक्षण नवाचार)
- प्रोजेक्ट-आधारित लर्निंग
- नेतृत्व और मेंटरिंग
- अकादमिक कार्यस्थलों में भावनात्मक भलाई (Emotional well-being)
- NEP 2020 का प्रभावी कार्यान्वयन
- शिक्षण में जेनरेटिव एआई (GenAI) और आईसीटी (ICT) का उपयोग
- इंडस्ट्री-अकादमिक सहयोग को मजबूत करना
कार्यक्रम में पीयर लर्निंग और रिफ्लेक्टिव प्रैक्टिस को बढ़ावा देने के लिए इंटरैक्टिव कार्यशालाएं, हैंड्स-ऑन गतिविधियां और प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुतियां भी शामिल थीं।
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