नई दिल्ली: धूम्रपान करने वालों और तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वालों के लिए बुरी खबर है। 1 फरवरी से सिगरेट का कश लगाना आपकी जेब पर भारी पड़ने वाला है। सरकार ने बुधवार देर रात तंबाकू उत्पादों (जिसमें सिगरेट भी शामिल है) के लिए नई शुल्क दरों और पान मसाला के लिए सेस (उपकर) की नई दरों की अधिसूचना जारी कर दी है। विशेष रूप से फिल्टर और लंबी सिगरेट की कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिल सकता है।
कीमतों में कितनी होगी बढ़ोतरी?
सिगरेट निर्माता कंपनियों का अनुमान है कि अतिरिक्त लेवी (कर) में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि होगी। हालांकि, कंपनियां अभी इस पशोपेश में हैं कि बढ़ा हुआ यह भार तुरंत ग्राहकों पर डाला जाए या इसे किस्तों में लागू किया जाए। दूसरी ओर, निवेश विश्लेषकों (Investment Analysts) का मानना है कि शुल्क में हुई इस बढ़ोतरी के जवाब में सिगरेट की कीमतें 15 से 40 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।
शेयर बाजार में मचा हड़कंप
टैक्स बढ़ने की खबर का असर शेयर बाजार पर तुरंत दिखाई दिया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर प्रमुख सिगरेट निर्माता कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। आईटीसी (ITC) के शेयर लगभग 10 प्रतिशत और गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया (Godfrey Phillips India) के शेयर लगभग 17 प्रतिशत तक टूट गए।
क्या है सिगरेट पर टैक्स का नया गणित?
सिगरेट पर टैक्स का ढांचा काफी जटिल है। अभी तक जीएसटी (GST) के तहत 40 प्रतिशत स्लैब के ऊपर अतिरिक्त शुल्क लगाना, पुरानी व्यवस्था के ‘कम्पन्सेशन सेस’ (क्षतिपूर्ति उपकर) से एक बदलाव का संकेत है।
वर्तमान स्थिति: अभी तक कुल शुल्क को चार हिस्सों में बांटा जाता था:
- बेसिक एक्साइज ड्यूटी (5-10 रुपये प्रति 1,000 स्टिक)।
- राष्ट्रीय आपदा आकस्मिकता शुल्क यानी NCCD (230-850 रुपये प्रति 1,000 स्टिक)।
- 28 प्रतिशत जीएसटी।
- कम्पन्सेशन सेस (इसमें 5-36% तक एड वेलोरम लेवी और 2,076-4,170 रुपये प्रति 1,000 स्टिक का फ्लैट लेवी शामिल था)।
1 फरवरी से बदलाव: अब ‘कम्पन्सेशन सेस’ वाला हिस्सा हटा दिया जाएगा। इसकी भरपाई के लिए जीएसटी की दर को बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है और एक्साइज ड्यूटी को 2,050 से 8,500 रुपये प्रति 1,000 स्टिक कर दिया गया है। हालांकि, एनसीसीडी (NCCD) की दरें पहले जैसी ही रहेंगी।
सरकार का तर्क: वैश्विक मानकों से पीछे है भारत
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, पिछले एक दशक में सिगरेट की ‘अफोर्डेबिलिटी’ (खरीदने की क्षमता) या तो स्थिर रही है या बढ़ी है। इसका मतलब है कि लोगों की क्रय शक्ति के मुकाबले सिगरेट महंगी नहीं हुई है, जो वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशानिर्देशों के विपरीत है। दुनिया भर में 80 से अधिक देश हर साल तंबाकू करों में संशोधन करते हैं।
जुलाई 2025 के विश्व बैंक के एक लेख का हवाला देते हुए अधिकारियों ने कहा कि भारत में सिगरेट पर कुल टैक्स का बोझ खुदरा मूल्य का लगभग 53 प्रतिशत है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अनुशंसित 75 प्रतिशत की दर से काफी कम है।
इंडस्ट्री ने जताई हैरानी: तस्करी बढ़ने का डर
आईटीसी, गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया और वीएसटी इंडस्ट्रीज द्वारा 1992 में स्थापित ‘द टोबैको इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संस्था ने एक बयान में कहा कि वे शुल्क में हुई इस “अभूतपूर्व वृद्धि” से हैरान हैं, खासकर तब जब सरकार ने कुल प्रभाव को ‘रेवेन्यू न्यूट्रल’ रखने की बात कही थी।
संस्था ने चेतावनी दी है कि देश में बिकने वाली हर तीन कानूनी सिगरेट के मुकाबले एक तस्कर या अवैध सिगरेट बेची जाती है। टैक्स में इतनी भारी वृद्धि से अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा, “सिगरेट देश में पहले से ही सबसे ज्यादा टैक्स वाले उत्पादों में से एक है। कानूनी सिगरेट कुल तंबाकू खपत का केवल 10 प्रतिशत हैं, लेकिन तंबाकू टैक्स राजस्व में इनका योगदान 80 प्रतिशत है।”
पान मसाला और अन्य उत्पादों पर भी मार
सिर्फ सिगरेट ही नहीं, पान मसाला पर भी अब 40 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा, साथ ही ‘हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस’ भी जोड़ा जाएगा। जीएसटी काउंसिल ने पान मसाला पर जीएसटी दर 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत (वैधानिक अधिकतम सीमा) करने का फैसला किया है।
एक अधिकारी ने बताया कि मौजूदा टैक्स बोझ के बाकी हिस्से को ‘हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025’ के तहत मशीन-आधारित सेस में शिफ्ट किया जा रहा है।
- पहले: 28% जीएसटी + 60% सेस = कुल 88% लेवी।
- अब: 40% जीएसटी + 48% नया सेस = कुल 88% लेवी।
इसके अलावा, पैकिंग मशीन की मदद से बनाए गए और पाउच में पैक किए गए चबाने वाले तंबाकू, जर्दा सुगंधित तंबाकू और गुटखा पर 1 फरवरी से केंद्रीय उत्पाद शुल्क ‘उत्पादन क्षमता’ के आधार पर लगाया जाएगा। वित्त मंत्रालय का मानना है कि ये क्षेत्र कर चोरी के लिए कुख्यात हैं, इसलिए क्षमता-आधारित लेवी (Capacity-linked levy) ज्यादा बेहतर है।
हुक्का और अन्य उत्पादों के लिए नई दरें
अन्य तंबाकू उत्पादों के लिए भी नई दरें अधिसूचित की गई हैं:
- हुक्का: 33 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी।
- होमोजेनाइज्ड तंबाकू और सूंघने वाली तंबाकू (Snuff): 60.5 प्रतिशत।
- चबाने वाला तंबाकू और जर्दा: 82 प्रतिशत।
- पाइप और सिगरेट के लिए स्मोकिंग मिक्सचर: 279 प्रतिशत।
गौरतलब है कि ये नए शुल्क इसलिए लाए गए हैं क्योंकि मार्च 2026 के बाद जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर (GST compensation cess) समाप्त होने वाला है। जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से राज्यों को पांच साल तक होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए यह उपकर लगाया गया था, जिसे लोन चुकाने के लिए मार्च 2026 तक बढ़ाया गया था।
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