मुंद्रा: अरुणाचल प्रदेश से गुजरात के मुंद्रा तक 4,600 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने वाले ‘पेडल टू प्लांट’ (Pedal to Plant) अभियान का आज अडानी हाउस, मुंद्रा में भव्य स्वागत के साथ समापन हुआ। पर्यावरण संरक्षण और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ को बढ़ावा देने वाली इस मुहिम का नेतृत्व प्रसिद्ध पर्वतारोही निशा कुमारी ने किया, जिसमें उनके साथ 8 वर्षीय निक्षा बारोट भी शामिल थीं।
‘क्लाइमेट चेंज से पहले बदलाव’ का संदेश
इस साइकिल अभियान का मुख्य उद्देश्य भारत को हरा-भरा बनाना और 1,00,000 से अधिक पेड़ लगाना है। टीम ने “क्लाइमेट चेंज से पहले बदलाव” (Change Before Climate Change) के नारे के साथ देश भर में पर्यावरण जागरूकता और सक्रिय जीवनशैली का संदेश दिया।
इस साहसिक यात्रा को पूरा करने वाली टीम में एवरेस्ट विजेता निशा कुमारी, साइकिलिंग कोच और पर्यावरण कार्यकर्ता निलेश बारोट और 8 वर्षीय निक्षा बारोट शामिल थीं। निक्षा की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि फिटनेस और पर्यावरण के प्रति जागरूकता किसी भी उम्र में शुरू की जा सकती है।

अडानी हाउस में हुआ जोरदार स्वागत
मुंद्रा पहुंचने पर अडानी पब्लिक स्कूल के बैगपाइपर बैंड और 75 छात्रों के एक समूह ने टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मुंद्रा के कस्टम कमिश्नर श्री नितिन सैनी उपस्थित थे। उनके साथ एपीएसईजेड (APSEZ) के कार्यकारी निदेशक रक्षित शाह, अडानी पोर्ट्स मुंद्रा के सीईओ सुजल शाह, अडानी पब्लिक स्कूल की निदेशक श्रीमती अमी शाह और प्रिंसिपल हेमंत कुमार भी मौजूद रहे।
मुंद्रा पोर्ट: सस्टेनेबिलिटी की मिसाल
अभियान के समापन के लिए मुंद्रा पोर्ट का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यह सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) में एक लीडर के रूप में जाना जाता है। अडानी पोर्ट्स वैश्विक स्तर पर सबसे हरे-भरे पोर्ट ऑपरेटरों में से एक है, जो मैंग्रोव वनीकरण, उपकरणों के विद्युतीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से नेट-जीरो उत्सर्जन की ओर बढ़ रहा है।
टीम के कोच निलेश बारोट ने कहा, “हमारा मुख्य फोकस पूरी यात्रा के दौरान जलवायु परिवर्तन और फिटनेस के बारे में जागरूकता फैलाना था। तमाम मुश्किलों के बावजूद, हमें विश्वास था कि समर्पण आपको हमेशा आपके लक्ष्यों तक ले जाता है”।
वहीं, एपीएसईजेड के कार्यकारी निदेशक रक्षित शाह ने कहा कि अडानी समूह पर्यावरण और सस्टेनेबल पहलों के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम के अंत में, निशा कुमारी, निलेश बारोट और निक्षा बारोट ने उपस्थित अतिथियों के साथ मिलकर प्रतीकात्मक पौधारोपण किया, जो इस ऐतिहासिक यात्रा का एक उपयुक्त समापन था।
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