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अहमदाबाद का ऐतिहासिक शाहीबाग सर्किट हाउस: बापू के ‘द ग्रेट ट्रायल’ का गवाह, अब अस्तित्व और विनाश के बीच फंसा

| Updated: January 3, 2026 14:32

R&B विभाग ने इमारत को 'खतरनाक' बताकर गिराने का प्रस्ताव दिया, लेकिन हेरिटेज ट्रस्ट ने बापू के ऐतिहासिक 'द ग्रेट ट्रायल' स्थल को बचाने के लिए ठोंकी ताल; जानिए क्या है पूरा विवाद।

अहमदाबाद: अहमदाबाद का 107 साल पुराना शाहीबाग सर्किट हाउस आम लोगों के लिए महज एक पुरानी इमारत हो सकती है, जिसकी दीवारों में दरारें हैं और छतों से पानी टपकता है। लेकिन भारत के इतिहास में इस इमारत का कद बहुत बड़ा है। यह वही ऐतिहासिक स्थल है जहां 1922 में महात्मा गांधी ने ब्रिटिश हुकूमत की आंखों में आंखें डालकर कहा था कि उनका शासन “नैतिक रूप से दिवालिया” हो चुका है।

आज, यह ऐतिहासिक धरोहर एक गंभीर बहस के केंद्र में है। एक तरफ राज्य का सड़क और भवन विभाग (R&B) है जो इसकी जर्जर हालत को देखते हुए इसे गिराना चाहता है, तो दूसरी तरफ अहमदाबाद नगर निगम (AMC) के हेरिटेज अधिकारी हैं, जो इसे संरक्षित करने पर अड़े हैं।

इतिहास के पन्नों में: द ग्रेट ट्रायल

18 मार्च, 1922 को इसी शाहीबाग सर्किट हाउस में बापू के खिलाफ वह प्रसिद्ध मुकदमा (The Great Trial) चला था। ‘यंग इंडिया’ में छपे तीन लेखों के कारण उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A के तहत राजद्रोह का आरोप लगाया गया था। उस समय बापू 53 वर्ष के थे और शारीरिक रूप से कमजोर थे, लेकिन उन्होंने पूरी मजबूती से ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी।

दिलचस्प बात यह है कि ब्रिटिश खुफिया एजेंसियां उस समय बापू को कोड नेम “AAA” से ट्रैक करती थीं और उनके लेखन को शाही सत्ता के लिए बड़ा खतरा मानती थीं।

इंजीनियरों की चेतावनी: ‘G-4’ श्रेणी का खतरा

सर्किट हाउस का वर्तमान अस्तित्व संकट में है। R&B विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने 12 दिसंबर, 2025 को लिखे एक पत्र में इसकी स्थिति को बेहद खतरनाक बताया है। पत्र के अनुसार, इमारत की नींव बैठ रही है (structural settlement), जिसके कारण ग्राउंड फ्लोर की ईंट और चूने की दीवारों में बड़ी-बड़ी तिरछी दरारें आ गई हैं।

हालात इतने खराब हैं कि पहली मंजिल की गैलरी में लगातार दरारें बढ़ रही हैं। कमरा नंबर 6 और 13 में पानी के रिसाव के कारण पिछले सात वर्षों से इनका उपयोग बंद है। इन खामियों के आधार पर इमारत को “G-4” श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि इसका ढांचा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त है और यह किसी भी वक्त गिर सकता है। विभाग ने चेतावनी दी है कि इसका उपयोग जारी रखने से कोई भी अप्रिय घटना घट सकती है।

मरम्मत या विध्वंस?

R&B विभाग का तर्क पूरी तरह से आर्थिक और सुरक्षा के गणित पर आधारित है। उनका कहना है कि इस इमारत की मरम्मत (रेट्रोफिटिंग) में जो खर्च आएगा, वह एक नई इमारत बनाने के खर्च का 84.5% होगा। सरकारी नियमों के मुताबिक, मरम्मत की सिफारिश तभी की जाती है जब उसका खर्च नई निर्माण लागत के 30% से कम हो। चूंकि यहां खर्च लगभग तीन गुना ज्यादा है, इसलिए विभाग ने इसे गिराने की सलाह दी है।

हेरिटेज ट्रस्ट का कड़ा विरोध

दूसरी ओर, AMC के तहत आने वाले ‘अहमदाबाद वर्ल्ड हेरिटेज सिटी ट्रस्ट’ ने 22 दिसंबर, 2025 को एक औपचारिक पत्र के जरिए इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि शाहीबाग सर्किट हाउस ‘ग्रेड-1 हेरिटेज’ का दर्जा रखता है और यह अपनी वास्तुकला व ऐतिहासिक महत्व के कारण अनमोल है।

ट्रस्ट ने अपने जवाब में लिखा, “इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अहमियत को देखते हुए इसे गिराने की सलाह उचित नहीं है।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ‘कंप्रिहेंसिव जनरल डेवलपमेंट कंट्रोल रेगुलेशंस’ के शेड्यूल 19 के तहत इसे गिराना कानूनी रूप से प्रतिबंधित है।

विशेषज्ञों की राय

राज्य स्तरीय विरासत संरक्षण समिति (HCC) के सदस्य रिजवान कादरी ने इस मामले पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है, “मुझे R&B विभाग के प्रस्ताव की जानकारी मिली है, लेकिन मेरा मानना है कि इस फैसले पर पुनर्विचार होना चाहिए। शाहीबाग सर्किट हाउस वह स्थान है जहां ब्रिटिश साम्राज्य की नैतिक सत्ता का पतन हुआ था।”

कादरी ने भावुक होते हुए कहा, “यहीं पर बापू ने खुद को एक ‘किसान और जुलाहे’ के रूप में पेश किया था और साबित किया था कि सत्य और अहिंसा का विचार दुनिया की सबसे ताकतवर सेना से भी ज्यादा शक्तिशाली है।”

फिलहाल, हेरिटेज ट्रस्ट ने निर्देश दिया है कि इमारत की मरम्मत और बहाली का काम विरासत संरक्षण दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए किया जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन सुरक्षा के तर्कों को चुनता है या इतिहास की धरोहर को।

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