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गुजरात: 90 वर्षीय सेवादार की मौत के बाद खुला कमरे का राज, संदूक से निकलीं 37 बाघ की खालें

| Updated: January 9, 2026 12:31

बंद कमरे का राज: वर्षों से नहीं खुला था दरवाजा, अब संदूक से निकला ऐसा सच कि वन विभाग भी रह गया दंग

अहमदाबाद/वडोदरा: गुजरात के राजपीपला स्थित एक मंदिर में जो हुआ, उसने न केवल मंदिर ट्रस्ट बल्कि वन विभाग के भी होश उड़ा दिए हैं। मंदिर की देखभाल करने वाले एक 90 वर्षीय बुजुर्ग की मृत्यु के बाद जब उनके बंद कमरे का दरवाजा खोला गया, तो वहां एक लोहे के संदूक (पेटी) में जो मिला, उस पर यकीन करना मुश्किल था। वन विभाग और मंदिर प्रबंधन को वहां से 37 बाघ की खालें और 133 नाखून बरामद हुए हैं।

बरसों से बंद था कमरा

मृतक सेवादार का नाम माधवानंद बताया गया है, जो पिछले कई वर्षों से इसी मंदिर में रह रहे थे। मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि माधवानंद अपने कमरे में किसी को भी आने की अनुमति नहीं देते थे। उनकी मृत्यु के बाद, प्रबंधन ने उस स्थान पर एक नई इमारत बनाने का निर्णय लिया।

इसी प्रक्रिया के दौरान जब उनका कमरा खोला गया और सामान की जांच की गई, तो लोहे के बॉक्स में छिपाकर रखी गई बाघ की खालें, नाखून और दांत (Canines) मिले।

क्या यह असली हैं या नकली?

इतनी बड़ी संख्या में वन्यजीवों के अंगों का मिलना अपने आप में एक बड़ा मामला है। हालांकि, वन विभाग की प्रारंभिक जांच कुछ और ही इशारा कर रही है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) जयपाल सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए कहा, “पहली नजर में ऐसा प्रतीत होता है कि ये खालें नकली हैं और इन्हें असली जैसा दिखाने के लिए पेंट (रंग) का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन, हम किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते, इसलिए इनकी गहन जांच करवाई जा रही है।”

नर्मदा के उप वन संरक्षक (DCF) अभय सिंह ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, “हमारे परीक्षणों से पता चला है कि खालें असली नहीं हैं, लेकिन पुष्टि के लिए हमने नमूने हैदराबाद स्थित ‘कोशिका एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र’ (Centre for Cellular and Molecular Biology – CCMB) भेजे हैं।”

अवैध शिकार का शक क्यों?

भले ही वन विभाग को सामान के नकली होने का संदेह है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की जांच की जा रही है। वन अधिकारियों ने बताया कि सेवादार माधवानंद मूल रूप से मध्य प्रदेश के रहने वाले थे। चूंकि मध्य प्रदेश में टाइगर रिजर्व्स की संख्या अधिक है, इसलिए यह संदेह भी जताया जा रहा है कि कहीं वे अवैध शिकार (Poaching) की गतिविधियों में शामिल तो नहीं थे।

फिलहाल, हैदराबाद से फोरेंसिक रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।

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