वड़ोदरा/गांधीनगर: गुजरात के वड़ोदरा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पांच विधायकों ने अपनी ही सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इन विधायकों ने राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को एक तीखा पत्र लिखकर जिले के शीर्ष अधिकारियों के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई है। विधायकों का आरोप है कि अधिकारी न तो जनता की सुन रहे हैं और न ही चुने हुए जनप्रतिनिधियों की।
कौन हैं पत्र लिखने वाले 5 विधायक?
मुख्यमंत्री को शिकायत भेजने वाले विधायकों में वड़ोदरा जिले के कई दिग्गज नाम शामिल हैं:
- डभोई विधायक शैलेश मेहता (सोट्टा)
- वाघोडिया विधायक धर्मेंद्रसिंह वाघेला
- सावली विधायक केतन इनामदार
- करजन विधायक अक्षय पटेल
- पादरा विधायक चैतन्यसिंह झाला
इन विधायकों ने पत्र में स्पष्ट किया है कि उन्होंने पहले भी मौखिक रूप से यह मुद्दा उठाया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब उन्होंने लिखित मांग की है कि अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों द्वारा सुझाए गए जनहित के कार्यों को प्राथमिकता देने और जनता के हित में निर्णय लेने के सख्त निर्देश दिए जाएं।
‘सरकारी दफ्तर में काम कराना जंग लड़ने जैसा’
पत्र में बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि आज के समय में सरकारी दफ्तरों में काम करवाना आम आदमी के लिए किसी “युद्ध लड़ने” से कम नहीं रह गया है। विधायकों ने लिखा है कि वरिष्ठ और कनिष्ठ (जूनियर) दोनों स्तर के अधिकारी तानाशाही रवैया अपना रहे हैं।
पत्र में तंज कसते हुए कहा गया है कि बड़े अधिकारियों ने अपनी पसंद के मुताबिक शानदार कार्यालय बनवा लिए हैं। वे इन्हीं ऑफिसों में बैठकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में व्यस्त रहते हैं और सरकार को ‘गुलाबी तस्वीरें’ (सब कुछ ठीक होने का दावा) दिखाते हैं, जबकि उन्हें जमीनी हकीकत, भूगोल और जनता की असली समस्याओं का कोई ज्ञान नहीं है।
‘विधायक का नाम लेने पर जनता से सवाल करते हैं अफसर’
नाराजगी का आलम यह है कि पत्र में यहाँ तक लिखा गया है कि अधिकारी यह मानते हैं कि वे सरकार और जनप्रतिनिधियों से ऊपर हैं, और वे खुद ही ‘सरकार’ हैं। शिकायत के अनुसार, अगर कोई आम नागरिक अपनी समस्या के लिए विधायक की मदद मांगता है, तो अधिकारी उस नागरिक से ही सवाल-जवाब करने लगते हैं।
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले एक वरिष्ठ विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वड़ोदरा शायद अपवाद नहीं है, जहाँ सिस्टम का पूरा कंट्रोल उन अधिकारियों के हाथ में है जो जनप्रतिनिधियों की सुनते ही नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हमने पत्र में शहर के अधिकारियों का भी जिक्र किया है, क्योंकि शहर के कुछ हिस्से ग्रामीण वड़ोदरा की विधानसभा सीटों में भी आते हैं।”
‘बार-बार कहने पर भी नहीं सुधरे हालात’
सीएमओ (CMO) में पत्र सौंपने के बाद गांधीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए विधायक केतन इनामदार ने कहा कि स्थानीय स्तर पर समन्वय बैठकों (Coordination Meetings) में बार-बार मुद्दा उठाने के बावजूद कोई बदलाव नहीं आया, इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करनी पड़ी।
इनामदार ने कहा, “अधिकारी विधायकों की भी नहीं सुनते और मनमाने फैसले लेते हैं। आम जनता अपना काम करवाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है। लोगों की समस्याओं को सुलझाने के बजाय अधिकारी ज्यादातर समय बैठकों में व्यस्त रहते हैं। हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं।”
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