नई दिल्ली: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को पाकिस्तान को लेकर एक बड़ा और कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने मई 2025 में चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) से जुड़ी नई जानकारियां साझा करते हुए बताया कि भारत न केवल हवाई कार्रवाई कर रहा था, बल्कि स्थिति बिगड़ने पर एक बड़े ‘जमीनी हमले’ (Ground Offensive) के लिए भी पूरी तरह तैयार था।
यह ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस भयावह आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी।
तनाव के बीच सेना की ‘बड़ी लामबंदी’
एक कार्यक्रम के दौरान सेना प्रमुख ने खुलासा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के उस दौर में भारतीय सेना ने “बड़ी लामबंदी” (Major Mobilisation) की थी। उन्होंने साफ किया कि अगर दोनों देशों के बीच संघर्ष थोड़ा भी और बढ़ता, तो भारतीय सेना सीमा पार जाकर जमीनी कार्रवाई करने में संकोच नहीं करती।
जनरल द्विवेदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल के दिनों में कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास कई संदिग्ध ड्रोन देखे गए हैं। हालांकि, उन्होंने इस पर बहुत अधिक विवरण साझा नहीं किया, लेकिन इतना जरूर कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में हालात “संवेदनशील हैं, लेकिन पूरी तरह से नियंत्रण में हैं।”
‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी खत्म नहीं हुआ है
वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने यह स्पष्ट कर दिया कि मई 2025 में शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में चल रहे आतंकी शिविरों के सवाल पर उन्होंने कहा, “चूंकि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी चल रहा है, इसलिए हमारी खुफिया एजेंसियां और निगरानी तंत्र (Eyes and Ears) पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। हमने अपनी तरफ से सभी जरूरी कदम उठा रखे हैं।”
दुश्मन की हरकतों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया, “हमारी जानकारी के मुताबिक, अभी भी करीब आठ आतंकी शिविर सक्रिय हैं। इनमें से दो अंतरराष्ट्रीय सीमा (International Border) के सामने और छह नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार स्थित हैं। वहां अभी भी कुछ उपस्थिति और प्रशिक्षण गतिविधियां देखी जा रही हैं।”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर दोबारा कोई ऐसी हरकत होती है, तो हम अपनी योजना के अनुसार सख्त कार्रवाई करेंगे।”
क्या था पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर?
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत मई 2025 में हुई थी, जो भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के प्रतिशोध में उठाया गया कदम था। 22 अप्रैल 2025 को हुए इस हमले में आतंकियों ने कम से कम 26 पर्यटकों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 2019 के पुलवामा हमले के बाद यह कश्मीर घाटी में सबसे भीषण आतंकी हमला था।
भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी गुट ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) को जिम्मेदार माना था। हालांकि, टीआरएफ और पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया था, लेकिन इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पीओके के अंदर सैन्य हमले किए थे।
इस ‘ट्राई-सर्विसेज ऑपरेशन’ (तीनों सेनाओं का संयुक्त अभियान) के दौरान भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना ने मिलकर क्षेत्र में नौ आतंकी शिविरों पर हमले किए थे। इस सैन्य कार्रवाई के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक भारी गतिरोध बना रहा, जिसके चलते सीमा पार कई इलाकों में ब्लैकआउट हो गया था और हवाई हमले के सायरन गूंजने लगे थे।
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