अहमदाबाद: शहर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में एक 19 वर्षीय युवती के साथ बीच सड़क पर हुई घटना ने यह साबित कर दिया है कि मनचलों के हौसले किस कदर बुलंद हैं। दरअसल, एक बाइक सवार युवक ने युवती को रोककर बात करने की जिद की।
जब युवती ने इनकार करते हुए उसे जाने को कहा, तो वह युवक पहले वहां से चला गया, लेकिन कुछ ही देर में वापस लौटा और युवती के साथ छेड़छाड़ की। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन यह घटना एक सार्वजनिक जगह पर घटी, जो कानून व्यवस्था पर चिंता जताती है।
शिक्षण संस्थान भी अब सुरक्षित नहीं?
चिंता की बात यह है कि उत्पीड़न अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन जगहों पर भी पहुंच गया है जिन्हें ‘सुरक्षित’ माना जाता था। अभयम 181 हेल्पलाइन के अधिकारियों के मुताबिक, प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों (Premier educational institutions) से भी ऐसी शिकायतें मिल रही हैं।
हाल ही में एक 18 वर्षीय छात्रा ने शिकायत दर्ज कराई कि उसके संस्थान की कैंटीन में काम करने वाले एक कर्मचारी ने उस वक्त उसके साथ बदसलूकी की, जब वह खाना खाने के बाद हाथ धो रही थी। आरोपी ने न केवल उसकी ‘पर्सनल स्पेस’ में घुसने की कोशिश की, बल्कि उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया।
आंकड़े बता रहे डरानी वाली हकीकत
हेल्पलाइन का डेटा इस बात की तस्दीक करता है कि ये घटनाएं किसी एक दिन की कहानी नहीं, बल्कि एक बढ़ते हुए पैटर्न का हिस्सा हैं। अभयम के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025 में उनके पास छेड़छाड़ (Eve-teasing) से जुड़ी 2,398 और पीछा करने (Stalking) से जुड़ी 2,307 कॉल्स आईं।
पिछले दो वर्षों की तुलना करें तो छेड़छाड़ से जुड़ी डिस्ट्रेस कॉल्स में कुल 15% की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें बड़े शहरों की स्थिति सबसे खराब है:
- अहमदाबाद: 2023 की तुलना में 40% की भारी बढ़ोतरी।
- राजकोट: मामलों में 38% का इजाफा।
- सूरत: यहाँ 30% की वृद्धि दर्ज की गई।
- वडोदरा: एकमात्र शहर जहाँ 5% की गिरावट देखी गई।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
अभयम हेल्पलाइन के समन्वयक सतीश कडिया का कहना है कि 2025 में अहमदाबाद से अलग-अलग तरह की शिकायतें सामने आई हैं।
उन्होंने बताया, “एक तरफ हमारे पास 12 साल की बच्ची के साथ हुई छेड़छाड़ का मामला आया, जिसे परिवार की सतर्कता से तुरंत पकड़ लिया गया। वहीं, दूसरी तरफ 40 वर्षीय एक महिला ने शिकायत की कि एक युवक बार-बार मना करने और डांटने के बावजूद लगातार उसका पीछा कर रहा था।”
कडिया ने जोर देकर कहा कि हेल्पलाइन का मुख्य काम पीड़ितों के लिए ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ (First Responder) के रूप में काम करना और उनका आत्मविश्वास बढ़ाना है। गंभीर मामलों को तुरंत शहर की पुलिस को सौंप दिया जाता है ताकि कानूनी कार्रवाई की जा सके।
क्यों बढ़ रहे हैं मामले?
अधिकारियों ने इन बढ़ते आंकड़ों के पीछे जनसंख्या वृद्धि, रिस्पांस गाड़ियों की बढ़ती संख्या और लोगों में रिपोर्टिंग के प्रति बढ़ी जागरूकता को प्रमुख कारण माना है। इसके अलावा, सितंबर में शुरू हुए एकीकृत इमरजेंसी नंबर ‘112’ का भी इसमें बड़ा रोल है।
एक अधिकारी ने स्पष्ट किया, “112 हेल्पलाइन नंबर के आने के बाद, जिसमें छह मौजूदा नंबरों को एकीकृत किया गया है, रेस्क्यू या तत्काल पुलिस कार्रवाई वाले मामले सीधे उन टीमों को ट्रांसफर हो रहे हैं। इस वजह से कुछ श्रेणियों के आंकड़ों में कमी भी दिख सकती है।”
उधर, शहर पुलिस का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर ‘डिस्ट्रेस बटन’ लगाने, स्कूलों-कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने और शैक्षणिक क्षेत्रों के आसपास गश्त (Patrols) बढ़ाने जैसे कई कदम उठाए हैं।
घरेलू हिंसा की शिकायतें सबसे ज्यादा
अगर 2025 में अभयम को मिली कॉल्स का व्यापक विश्लेषण करें, तो स्थिति कुछ इस प्रकार रही:
- घरेलू हिंसा: कुल कॉल्स का 46%
- दुर्व्यवहार या उत्पीड़न: 15%
- जानकारी मांगना: 12%
- विवाहेतर संबंध: 5%
कुल मिलाकर, 2025 में कॉल्स की संख्या में सालाना आधार पर 9% की गिरावट आई और यह 1.97 लाख रही, जिसका मुख्य कारण 112 हेल्पलाइन की शुरुआत माना जा रहा है।
यह भी पढ़ें-










