गुजरात के पाटीदार समुदाय के सबसे प्रभावशाली सामाजिक-धार्मिक संगठनों में से एक, ‘श्री खोडलधाम ट्रस्ट’ (SKT) को अपना नया संगठनात्मक अध्यक्ष (Organizational President) मिल गया है। यह नियुक्ति राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि यह जिम्मेदारी किसी और को नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान राज्यपाल और गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल की बेटी, अनार पटेल को सौंपी गई है।
नरेश पटेल ने की घोषणा
उद्योगपति और एसकेटी (SKT) के चेयरमैन नरेश पटेल, जिनके पिछले गुजरात विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें थीं, ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर खोडलधाम संगठन के अध्यक्ष के रूप में अनार पटेल की नियुक्ति की घोषणा की।
अनार पटेल का इस संगठन से जुड़ाव नया नहीं है। वह सबसे पहले साल 2023 में एक ट्रस्टी के रूप में संस्था में शामिल हुई थीं और उस समय वह यह पद संभालने वाली एकमात्र महिला थीं। पचास साल की उम्र पार कर चुकीं अनार अब अध्यक्ष के रूप में एक बड़ी भूमिका निभाएंगी। वह राज्य के 11 जोनों में अध्यक्षों, जिला संयोजकों (District Conveners) और सह-संयोजकों के कामकाज की निगरानी करेंगी।
खोडलधाम की व्यापक पहुंच
खोडलधाम ट्रस्ट की पकड़ गुजरात में बेहद मजबूत है। वर्तमान में यह राज्य के 34 में से 31 जिलों में सक्रिय है। संगठन के एक अधिकारी के अनुसार, केवल छोटा उदयपुर, डांग और वाव-थराद में ट्रस्ट की उपस्थिति नहीं है, क्योंकि वहां लेउवा पाटीदार आबादी न के बराबर है। ऐसे प्रभावशाली संगठन की कमान संभालना अनार पटेल के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक सुगबुगाहट और बीजेपी का रुख
इस नियुक्ति के बाद बीजेपी के नेताओं ने अनार के सक्रिय राजनीति में आने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया है। उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि ट्रस्ट के मौजूदा ट्रस्टियों में से एक रमेश तिलाला हैं, जो राजकोट दक्षिण से बीजेपी विधायक हैं।
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “मेरा मानना है कि खोडलधाम ट्रस्ट में इस नियुक्ति के जरिए राजनीति में उनकी ‘बैकडोर एंट्री’ की अटकलों में दम हो सकता है। राजनीति में भाई-भतीजावाद (Nepotism) तो है ही। उनकी जातिगत पृष्ठभूमि और खोडलधाम के साथ जुड़ाव उनके प्रोफाइल को बेहद मजबूत बनाता है।”
एक अन्य बीजेपी नेता का कहना है कि विपक्ष के कमजोर होने के कारण नरेश पटेल पिछले कुछ समय से बीजेपी की ओर झुकाव रख रहे हैं। उन्होंने कहा, “अनार की खोडलधाम (संगठन) के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति से दोनों पक्षों को फायदा हो सकता है।”
गौरतलब है कि 2014 में अनार औपचारिक रूप से बीजेपी की अहमदाबाद जिला इकाई में शामिल हुई थीं। उस समय चले सदस्यता अभियान के दौरान बीजेपी सदस्य बनने वाली हस्तियों की सूची में उनका नाम भी शामिल था।
हालांकि, अनार पटेल से संपर्क करने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। वहीं, उनके एक करीबी पारिवारिक सदस्य ने बताया कि उनका झुकाव सामाजिक कार्यों की तरफ ज्यादा है और उन्हें “राजनीति पसंद नहीं है।”
एक सामाजिक उद्यमी के रूप में पहचान
1971 में अहमदाबाद में आनंदीबेन और मफतभाई पटेल के घर जन्मीं अनार की रुचि बचपन से ही कला के क्षेत्र में रही है। परिवार के एक करीबी ने बताया कि उन्हें हेरिटेज थीम पर घरों को डिजाइन और डेकोरेट करने का भी शौक है। उन्होंने अहमदाबाद के सेंट जेवियर्स कॉलेज से गणित में बीएससी (BSc) की डिग्री हासिल की है और उनके पास निरमा यूनिवर्सिटी से एमबीए (MBA) की डिग्री भी है।
अनार के पति जयेश, जिनसे उनकी एक बेटी है, स्वर्गीय ईश्वरभाई पटेल के परिवार से ताल्लुक रखते हैं। ईश्वरभाई पटेल को कम लागत वाली ग्रामीण स्वच्छता और शौचालय डिजाइन (Low-cost village sanitation) के विकास में अग्रणी माना जाता है, जिसे बाद में कई विकासशील देशों ने अपनाया था। इस कार्य के लिए उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था।
यहाँ एक दिलचस्प तथ्य यह है कि जहां खोडलधाम ट्रस्ट मुख्य रूप से ‘लेउवा पाटीदार’ समुदाय को संगठित करने के लिए बनाया गया था, वहीं अनार की ससुराल ‘कड़वा पाटीदार’ उप-जाति समूह से है।
पिछले लगभग तीन दशकों से अनार पटेल एक सामाजिक उद्यमी (Social Entrepreneur) के रूप में सक्रिय हैं। वह ‘मानव साधना’, ‘ग्रामश्री’ और ‘क्राफ्टरूट्स’ जैसी संस्थाओं की संस्थापक या सह-संस्थापक रही हैं और इनसे जुड़ी रही हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से वह विशेष रूप से स्लम के बच्चों और ग्रामीण कारीगरों (खासकर महिलाओं) के उत्थान के लिए काम कर रही हैं।
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