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भारत-EU व्यापार समझौते से गुजरात की चांदी: टेक्सटाइल, केमिकल और फार्मा सेक्टर में बंपर उछाल की उम्मीद

| Updated: January 28, 2026 14:03

यूरोप के बाजार में अब दिखेगा 'मेड इन गुजरात' का दम, टेक्सटाइल और केमिकल निर्यात में चीन का दबदबा खत्म करने की तैयारी

अहमदाबाद: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने गुजरात के औद्योगिक गलियारों में नई ऊर्जा का संचार कर दिया है। यह समझौता न केवल 2024-25 में दर्ज किए गए 136 बिलियन डॉलर के व्यापारिक आंकड़े को पीछे छोड़ने की क्षमता रखता है, बल्कि गुजरात को देश के निर्यात का सबसे बड़ा लाभार्थी बनाने की दिशा में भी अग्रसर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पैक्ट के लागू होने से टैरिफ (शुल्क) की बाधाएं हटेंगी, जिससे अगले तीन वर्षों के भीतर टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल और इंजीनियरिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारतीय निर्यात दोगुना हो सकता है। मजबूत मैन्युफैक्चरिंग बेस और बेहतरीन पोर्ट कनेक्टिविटी के कारण गुजरात इस समझौते का सबसे ज्यादा फायदा उठाने के लिए तैयार है।

वैश्विक बाजार में खुलेंगे नए दरवाजे

आईसीसी (ICC) गुजरात स्टेट काउंसिल के चेयरमैन, पथिक पटवारी ने इस समझौते को भारतीय उद्योग के लिए एक अत्यंत सकारात्मक कदम बताया है। उनका कहना है कि बदलती हुई वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियों ने भारत के लिए ऐसे अवसर पैदा किए हैं, जिनका पहले पूरी तरह दोहन नहीं हो पाया था।

पटवारी ने कहा, “यह समझौता भारतीय निर्यातकों को किसी एक क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय दुनिया भर के बाजारों में ग्राहकों तक पहुंचने की आजादी देता है। यूरोप में फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और नेचुरल व लैब-ग्रोन डायमंड्स (हीरे) की भारी मांग है, जिसे अब भारतीय व्यापारी आसानी से पूरा कर सकेंगे।”

टेक्सटाइल सेक्टर के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा समझौता

यूरोपीय संघ के साथ हुआ यह समझौता भारत के कपड़ा उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। ऐसे समय में जब ग्लोबल सोर्सिंग (वैश्विक खरीद) के समीकरण बदल रहे हैं, यह पैक्ट भारतीय उत्पादों की कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाएगा और बाजार तक पहुंच आसान करेगा।

चिड़ीपाल ग्रुप के प्रमोटर, रोनक चिड़ीपाल का मानना है कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों की उन पुरानी समस्याओं को दूर करेगा, जिसके कारण वे यूरोप में पिछड़ रहे थे।

उन्होंने कहा, “यह एफटीए (FTA) करीब 2 बिलियन उपभोक्ताओं का एक एकीकृत बाजार खोलता है और भारतीय टेक्सटाइल के लिए ‘प्लेइंग फील्ड’ को बराबर करता है। यूरोप के स्थिरता (sustainability) मानकों के साथ तालमेल और बाजार में सुनिश्चित पहुंच मिलने से वैल्यू-एडेड मैन्युफैक्चरिंग, मैन-मेड फाइबर्स और प्रोसेसिंग में निवेश बढ़ेगा, जहां भारत अब तक पीछे था।”

इस विकास को बल देते हुए, पावरलूम डेवलपमेंट एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (PDExcil) के पूर्व चेयरमैन, भरत छाजेड़ ने बताया कि 2020-21 के बाद से यूरोपीय संघ में भारत का टेक्सटाइल और परिधान निर्यात 6.6% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा है, जो 2024-25 में 7.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

उन्होंने कहा, “हमारे निर्यात में रेडीमेड कपड़ों की हिस्सेदारी करीब 60% है। यह समझौता उद्योग के विकास की गति को और तेज करेगा।”

केमिकल सेक्टर: चीन के दबदबे को चुनौती देने की तैयारी

गुजरात स्थित केमिकल निर्माता इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि भारत-EU एफटीए यूरोप में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा, जहां भारतीय उत्पादों को लंबे समय से भारी शुल्क का सामना करना पड़ रहा था।

केमेक्सिल (Chemexcil) के वाइस-चेयरमैन, अंकित पटेल ने बताया कि भारतीय केमिकल उत्पादों पर लगने वाली 18% तक की इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) अब काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

पटेल ने कहा, “यूरोप को होने वाला हमारा अधिकांश केमिकल निर्यात अब ड्यूटी-फ्री व्यवस्था में चला जाएगा। इससे गुजरात की केमिकल इंडस्ट्री को बहुत बड़ा फायदा होगा और भारतीय कंपनियों को चीन द्वारा अब तक कब्जाए गए बाजार में सेंध लगाने का असली मौका मिलेगा।”

गौरतलब है कि भू-राजनीतिक व्यवधानों के कारण यूरोपीय संघ को भारत का केमिकल निर्यात 2022-23 के 5.34 बिलियन डॉलर से गिरकर 2024-25 में 4.43 बिलियन डॉलर रह गया था, लेकिन अब इसमें सुधार की प्रबल संभावना है।

फार्मा इंटरमीडिएट्स को मिलेगा सीधा लाभ

फार्मास्युटिकल उद्योग के लिए यह समझौता मिश्रित परिणाम लेकर आया है। इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष, विरांची शाह के अनुसार, तैयार दवाओं (फिनिश्ड फॉर्मूलेशन) को इस समझौते से सीमित प्रत्यक्ष लाभ ही मिलेगा, क्योंकि दवाएं पहले से ही यूरोपीय बाजार में काफी हद तक शुल्क मुक्त प्रवेश करती हैं।

हालांकि, शाह ने इंटरमीडिएट्स और कच्चे माल के निर्यात में स्पष्ट उछाल की भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा, “भले ही फॉर्मूलेशन को सीधा लाभ न मिले, लेकिन इंटरमीडिएट्स और चुनिंदा ‘की स्टार्टिंग मटीरियल्स’ (KSMs) पर से शुल्क हटने से निर्यात में वृद्धि होगी।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस व्यापार समझौते से बाजार तक पहुंच अधिक सुगम और अनुमानित (predictable) हो जाएगी।

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