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संदिग्ध मतदाता से ‘पद्म श्री’ सम्मान तक: गुजरात के कलाकार मीर हाजी कासिम की संघर्षपूर्ण और प्रेरक कहानी

| Updated: January 29, 2026 14:03

जिस कलाकार को पार्षद ने बताया था 'लापता वोटर', उसी ढोलक वादक को सरकार ने नवाजा पद्म श्री से; जूनागढ़ का दिलचस्प मामला।

जूनागढ़: राजनीति और कला के गलियारों से अक्सर ऐसी खबरें आती हैं जो सबको हैरान कर देती हैं। गुजरात के जूनागढ़ में प्रसिद्ध ढोलक वादक मीर हाजी कासिम (जिन्हें हाजी रामकडू या हाजी राठौड़ के नाम से भी जाना जाता है) के साथ बीते 15 दिनों में जो कुछ भी घटा, वह किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। महज दो हफ्तों के भीतर वह एक ‘संदिग्ध मतदाता’ की सूची से उठकर देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ तक जा पहुंचे।

क्या है पूरा मामला?

घटनाक्रम की शुरुआत 13 जनवरी को हुई, जब राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम चल रहा था। इसी दौरान जूनागढ़ नगर निगम के वार्ड नंबर 7 के भाजपा पार्षद संजय मनवर ने एक आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने दावा किया कि हाजी राठौड़ और उनका परिवार इस वार्ड से स्थायी रूप से जा चुका है, इसलिए उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाए।

लेकिन समय का चक्र देखिए, 25 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने मीर हाजी कासिम को कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए ‘पद्म श्री’ देने की घोषणा कर दी। इसके ठीक तीन दिन बाद, 28 जनवरी को जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने स्वयं कासिम को सम्मानित किया।

दिलचस्प बात यह थी कि जिस पार्षद ने उनके नाम पर आपत्ति जताई थी, वे भी उसी कार्यक्रम में मौजूद थे।

पहचान के फेर में फंसा मामला

70 वर्षीय मीर हाजी कासिम की लोकप्रियता उनके उपनाम ‘रामकडू’ से है। पार्षद संजय मनवर का कहना है कि मतदाता सूची में उनका नाम ‘हाजी राठौड़’ दर्ज था, जबकि लोग उन्हें मीर हाजी कासिम के नाम से जानते हैं। मनवर के अनुसार, उन्होंने भ्रम के कारण और नाम के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए आपत्ति जताई थी।

हालांकि, अब पार्षद के सुर बदले हुए हैं और वह इस पूरी घटना को ‘पहचान का अंतर’ बताकर अपना बचाव कर रहे हैं।

प्रशासन का रुख और कासिम का भरोसा

जूनागढ़ के जिला निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) चरणसिंह गोहिल ने स्पष्ट किया है कि भले ही आपत्ति दर्ज की गई है, लेकिन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी। उन्होंने कहा:

“हमने हाजी भाई को भरोसा दिलाया है कि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। हमारे बीएलओ उनके घर जाकर दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। एक बार सत्यापन पूरा होने के बाद, पार्षद द्वारा दी गई आपत्ति (फॉर्म नंबर 7) को खारिज कर दिया जाएगा।”

दूसरी ओर, पद्म श्री विजेता मीर हाजी कासिम अपनी इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार पर पूरा भरोसा है और मतदाता सूची से नाम कटने का उन्हें कोई डर नहीं है।

एक सुखद अंत की ओर

जूनागढ़ में इस समय मतदाता सूची को लेकर लगभग 80,000 आपत्तियां प्राप्त हुई हैं, जिनकी जांच चल रही है। लेकिन हाजी कासिम का मामला इसलिए खास बन गया क्योंकि जिस व्यक्ति को स्थानीय स्तर पर ‘लापता’ बताकर वोट देने के अधिकार से वंचित करने की कोशिश की गई, उसी शख्सियत ने राष्ट्रीय स्तर पर जिले का मान बढ़ाया।

अंततः बुधवार को भाजपा कार्यालय में पार्षद और कलाकार की मुलाकात भी हुई, जिसकी तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। यह कहानी सिखाती है कि सच्ची कला और सम्मान किसी भी प्रशासनिक बाधा से कहीं ऊपर होते हैं।

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