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सावधान: “आपके रिश्तेदार का एक्सीडेंट हो गया है” – एक कॉल और फोटो पर क्लिक करते ही खाता खाली!

| Updated: January 31, 2026 14:33

बिना OTP और पिन बताए खाते से उड़े 50 हजार, व्हाट्सएप पर फोटो डाउनलोड करते ही मोबाइल हैक; पुलिस ने जारी की गंभीर चेतावनी

अहमदाबाद: साइबर अपराधी अब ठगी के लिए तकनीक के साथ-साथ लोगों की भावनाओं और डर का भी फायदा उठा रहे हैं। अहमदाबाद और इसके आसपास के ग्रामीण व अर्ध-शहरी इलाकों में एक नया और बेहद खतरनाक ट्रेंड सामने आया है। इसमें ठग लोगों को उनके किसी करीबी रिश्तेदार के “गंभीर एक्सीडेंट” की झूठी खबर देकर डराते हैं और फिर बिना किसी ओटीपी (OTP) या बैंकिंग विवरण मांगे ही उनके बैंक खाते साफ कर रहे हैं।

पुलिस और साइबर क्राइम अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह स्कैम तेजी से फैल रहा है और लोग घबराहट में इसका शिकार बन रहे हैं।

क्या है यह नया तरीका? खेड़ा जिले का चौंकाने वाला मामला

इस ठगी की गंभीरता को समझने के लिए खेड़ा जिले में हुई एक हालिया घटना पर नजर डालते हैं। यहां एक किसान को एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने घबराहट भरे स्वर में बताया कि उनके एक रिश्तेदार का एक्सीडेंट हो गया है। ठग ने कहा कि वह घायल व्यक्ति की तस्वीरें व्हाट्सएप पर भेज रहा है और इतना कहकर फोन काट दिया।

जैसे ही किसान के व्हाट्सएप पर एक फाइल आई, जो दिखने में एक सामान्य इमेज लग रही थी, उन्होंने चिंता में उसे खोल दिया। क्लिक करते ही उन्हें स्क्रीन पर फोटो के बजाय एक स्कैनर जैसा इंटरफेस दिखाई दिया। किसान को तुरंत कुछ गड़बड़ लगा, उन्होंने समझदारी दिखाते हुए फाइल डिलीट की और अपना फोन स्विच ऑफ कर दिया।

सावधानी के बाद भी उड़े 50,000 रुपये

हैरानी की बात यह है कि किसान की सतर्कता भी काम नहीं आई। कुछ घंटों बाद जब वह नकदी निकालने के लिए एटीएम पहुंचे, तो उनके होश उड़ गए। उनके खाते से करीब 50,000 रुपये गायब थे। बैंक जाकर जांच करने पर पता चला कि यह राशि यूपीआई (UPI) आधारित ट्रांसफर के जरिए ऑनलाइन निकाली गई थी। पीड़ित ने तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन और स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

बिना OTP कैसे हो रही है चोरी?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस नए तरीके का खुलासा करते हुए बताया कि इसमें ‘रिमोट एक्सेस ट्रोजन’ (RATs) का इस्तेमाल किया जा रहा है। ठग इस खतरनाक मैलवेयर को इमेज फाइलों (अक्सर JPEG फॉर्मेट के रूप में) में छिपाकर भेजते हैं।

एक अधिकारी ने समझाया, “जैसे ही पीड़ित उस फाइल को खोलता है, मैलवेयर फोन में इंस्टॉल हो जाता है। यह सॉफ्टवेयर हैकर्स को फोन का रिमोट एक्सेस दे देता है। इसके बाद ठग बैकग्राउंड में आपकी बैंकिंग ऐप्स तक पहुंच बना लेते हैं और पीड़ित को भनक लगे बिना पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं।”

पारंपरिक स्कैम के विपरीत, इस तरीके में आपको अपना पिन, ओटीपी या पासवर्ड किसी को बताने की जरूरत नहीं पड़ती, इसी वजह से इसे पकड़ना बेहद मुश्किल होता है। यह मैलवेयर फोन की ‘एक्सेसिबिलिटी परमिशन’ का फायदा उठाता है।

पुलिस की सलाह: भावनाओं में बहकर न करें क्लिक

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ठग जानबूझकर एक्सीडेंट, अस्पताल या पुलिस केस जैसी डराने वाली कहानियां सुनाते हैं ताकि सामने वाला व्यक्ति घबराहट में बिना सोचे-समझे प्रतिक्रिया दे।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर अनजान नंबरों से आई किसी भी फाइल या लिंक को न खोलें, चाहे मामला कितना भी जरूरी क्यों न लगे। अगर एक्सीडेंट की सूचना मिले, तो पहले उस रिश्तेदार या उनके परिवार को सीधे कॉल करके पुष्टि करें। यह थोड़ी सी देरी आपकी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख सकती है।

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