वाशिंगटन: अमेरिका के न्याय विभाग (Department of Justice) द्वारा जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) से जुड़े दस्तावेजों की नई खेप जारी होने के बाद से दुनिया भर में हड़कंप मचा हुआ है। शुक्रवार को सार्वजनिक किए गए इन लाखों दस्तावेजों में माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स (Bill Gates) को लेकर बेहद चौंकाने वाले दावे किए गए हैं।
फाइलों में आरोप लगाया गया है कि बिल गेट्स ने रशियन महिलाओं के साथ संबंध बनाए थे, जिसके बाद उन्हें एक यौन संचारित रोग (STD) हो गया था।
इतना ही नहीं, दस्तावेजों में यह भी दावा किया गया है कि गेट्स ने अपनी तत्कालीन पत्नी मेलिंडा गेट्स को देने के लिए गुप्त रूप से एंटीबायोटिक्स की मांग की थी।

गेट्स ने दावों को बताया ‘बकवास’
इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद बिल गेट्स की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। गेट्स के प्रवक्ता ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “ये दावे पूरी तरह से बेतुके और बिल्कुल झूठे हैं।”
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ये दस्तावेज केवल एपस्टीन की हताशा को दर्शाते हैं। एपस्टीन इस बात से निराश था कि उसका गेट्स के साथ कोई भी व्यावसायिक संबंध नहीं बन पाया था, इसलिए उसने गेट्स को फंसाने और बदनाम करने के लिए ये मनगढ़ंत कहानियां रचीं।
क्या है 18 जुलाई, 2013 के ईमेल का सच?
विवाद के केंद्र में 18 जुलाई, 2013 की तारीख वाले कुछ ईमेल हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि ये एपस्टीन द्वारा लिखे गए ड्राफ्ट संदेश थे, जिनमें से कुछ गेट्स के तत्कालीन सलाहकार बोरिस निकोलिक की आवाज में लिखे गए थे। इन ड्राफ्ट्स में एपस्टीन ने आरोप लगाया कि गेट्स “रशियन लड़कियों” के साथ सोए थे, जिससे उन्हें संक्रमण हो गया था और उन्होंने एंटीबायोटिक्स मांगी थीं ताकि मेलिंडा गेट्स को “चुपके से” दवा दी जा सके।
उसी ड्राफ्ट में, एपस्टीन ने गेट्स द्वारा रिश्ता खत्म किए जाने पर अपना गुस्सा जाहिर किया था और लिखा था कि वह छह साल के जुड़ाव के बाद लिए गए इस फैसले से समझ से परे हैरान है। हालांकि, इन आरोपों में से किसी की भी पुष्टि नहीं हुई है।
30 लाख पेज और 1.8 लाख तस्वीरें
न्याय विभाग ने बताया कि उन्होंने व्यापक समीक्षा प्रक्रिया के बाद एपस्टीन से संबंधित 30 लाख से अधिक पेजों की जांच सामग्री, 2,000 से अधिक वीडियो और 1,80,000 तस्वीरें जारी की हैं। इन दस्तावेजों में एपस्टीन के जेल में बिताए गए समय, एक मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट और उसकी सहयोगी घिस्लेन मैक्सवेल (Ghislaine Maxwell) से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं।
प्रिंस एंड्रयू और ‘द ड्यूक’ का जिक्र
दस्तावेजों में ब्रिटेन के शाही परिवार से जुड़े ‘द ड्यूक’—जिन्हें एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर माना जा रहा है—और एपस्टीन के बीच ईमेल का भी जिक्र है। इसमें बकिंघम पैलेस में डिनर करने की चर्चा है, जहां “काफी गोपनीयता” (Privacy) थी।
एक अन्य संदेश में एपस्टीन ने ‘द ड्यूक’ को 26 वर्षीय रशियन महिला से मिलवाने की पेशकश की थी। हालांकि, इन ईमेल्स में किसी भी तरह के गलत काम का सबूत नहीं मिला है और प्रिंस एंड्रयू ने हमेशा किसी भी गलत काम से इनकार किया है।
एलन मस्क ने पूछी थी ‘वाइल्डेस्ट पार्टी’ की तारीख
दस्तावेजों में टेक अरबपति एलन मस्क और एपस्टीन के बीच ईमेल पत्राचार भी सामने आया है। नवंबर 2012 के एक ईमेल में मस्क ने एपस्टीन से पूछा था: “आपके द्वीप पर सबसे जंगली पार्टी (wildest party) किस दिन/रात को होगी?” मस्क ने लिखा था कि वह काम के दबाव से थक चुके हैं और “खुलकर जीना” (let loose) चाहते हैं।
हालांकि, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मस्क कभी एपस्टीन के द्वीप पर गए थे। मस्क ने पहले भी कहा है कि उन्हें आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था।
डोनाल्ड ट्रम्प का सैकड़ों बार जिक्र
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का नाम भी नई फाइलों में सैकड़ों बार आया है। इसमें एफबीआई द्वारा तैयार की गई एक सूची शामिल है जिसमें ट्रम्प के खिलाफ कॉलर्स द्वारा लगाए गए आरोपों का जिक्र है।
हालांकि, न्याय विभाग ने स्पष्ट किया है कि इनमें से कई दावे असत्यापित थे और 2020 के चुनाव से ठीक पहले एफबीआई को भेजे गए थे। विभाग ने कहा कि अगर इन दावों में जरा भी सच्चाई होती, तो उनका इस्तेमाल अब तक किया जा चुका होता।
पीड़ितों की पहचान उजागर होने पर आलोचना
दस्तावेजों के जारी होने के तरीके पर सवाल भी उठ रहे हैं। पीड़ितों की वकील ग्लोरिया ऑल्रेड ने कहा कि कई दस्तावेजों में नाम ठीक से छिपाए (redact) नहीं गए हैं, जिससे कई पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक हो गई है। उन्होंने इसे “पूर्ण रूप से अव्यवस्थित” बताया और कहा कि न्याय विभाग को इस लापरवाही के लिए शर्मिंदा होना चाहिए।
क्या अब सारे राज बाहर आ गए हैं?
डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कहा कि यह रिलीज दस्तावेजों की पहचान और समीक्षा प्रक्रिया का अंत है। हालांकि, कुछ डेमोक्रेटिक नेताओं का तर्क है कि न्याय विभाग ने अभी भी बिना उचित स्पष्टीकरण के लाखों दस्तावेज रोके रखे हैं। यह देखना बाकी है कि क्या भविष्य में इस मामले में और भी खुलासे होंगे या यह एपस्टीन गाथा का अंत है।
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