गिर के जंगल में वन्यजीवों, विशेषकर एशियाई शेरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने अहम कदम उठाए हैं। वर्तमान में शेरों की आवाजाही के लिए दो अंडरपास कार्यरत हैं, और अब सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए 5 और अंडरपास का निर्माण कार्य किया जा रहा है।
इसके अलावा, गिर राष्ट्रीय उद्यान और शेर वन्यजीव अभयारण्य के भीतर पश्चिम रेलवे के भावनगर डिवीजन के तहत आने वाले दामनगर-पीपावाव सेक्शन के 115 किलोमीटर के क्षेत्र में शेरों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ‘इन्ट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम’ (IDS) को मंजूरी दे दी गई है।
यह सिस्टम लोको पायलटों, स्टेशन मास्टरों और कंट्रोल रूम को रेलवे ट्रैक के करीब शेरों की आवाजाही के बारे में अलर्ट भेजेगा, जिससे दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
यह जानकारी रेलवे, सूचना और प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 06 फरवरी, 2026 को राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
मंत्री के बयान के अनुसार, गिर वन क्षेत्र से गुजरने वाला मौजूदा रेलवे नेटवर्क मीटर गेज (MG) सेक्शन है। चिन्हित किए गए शेर कॉरिडोर में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ट्रेनों की गति धीमी रखी जाती है।
रेलवे और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय के लिए समीक्षा समितियां गठित की गई हैं, जिनमें सर्कल लेवल कमेटी, डिवीजनल लेवल कमेटी और रेंज लेवल कमेटी शामिल हैं।
इन कमेटियों की बैठकें क्रमशः त्रैमासिक, द्विमासिक और मासिक आधार पर आयोजित की जाती हैं। बैठकों में चर्चा किए गए मुद्दों का रेलवे द्वारा सक्रियता से समाधान किया जा रहा है।
सांसद नथवाणी ने यह जानकारी मांगी थी कि क्या सरकार की गिर जंगल में एशियाई शेरों की सुरक्षा के लिए एलीवेटेड रेल कॉरिडोर बनाने की कोई योजना है; और यदि है, तो इसकी व्यवहार्यता अध्ययन, फंडिंग और पूरा होने की समयसीमा सहित प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति क्या है। साथ ही, उन्होंने रेल कॉरिडोर के पास गिर के शेरों की सुरक्षा के लिए अन्य संबंधित प्रश्न भी पूछे थे।
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