अहमदाबाद: गुजरात के रियल एस्टेट इतिहास में पहली बार राज्य सरकार ने एक बड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति ने फैसला लिया है कि गिफ्ट सिटी (GIFT City) में अटके हुए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को अब उसे खरीदने वाले लोगों (आवंटितियों) के संघ यानी ‘एसोसिएशन ऑफ एलोटीज’ को सौंप दिया जाएगा। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह निर्णय गिफ्ट सिटी स्थित ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ (WTC) प्रोजेक्ट से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा धोखाधड़ी के एक मामले में प्रोजेक्ट के मूल प्रमोटर की गिरफ्तारी के बाद से ही यहां टावर B और C का निर्माण कार्य ठप पड़ा था।
खरीदारों के हाथों में होगी कमान
ताजा अपडेट के अनुसार, टावर C के खरीदारों ने पहले ही अपना एक संघ बना लिया है और वे एक सोसायटी पंजीकृत (रजिस्टर) कराने की प्रक्रिया में हैं। वहीं, टावर B के आवंटी भी अपना ग्रुप बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
इस पूरी प्रक्रिया का दारोमदार इस बात पर होगा कि क्या खरीदार फंड जुटाने और निर्माण पूरा करने के लिए ठेकेदारों (Contractors) को नियुक्त करने पर सहमत होते हैं या नहीं। यदि वे इसके लिए तैयार हो जाते हैं, तो गिफ्ट सिटी प्रशासन प्रोजेक्ट की लीज को बहाल (Revive) कर देगा, जिसे वर्तमान में रद्द कर दिया गया है।
सूत्रों का कहना है कि इसके बाद गुजरात रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (GujRERA) के पास प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में नए प्रमोटर का नाम भी जोड़ा जाएगा।
रेरा कानून के तहत लिया गया निर्णय
यह महत्वपूर्ण कदम तब उठाया गया जब गुजरेरा (GujRERA) ने रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 8 के तहत राज्य सरकार से संदर्भ मांगा था। इसमें यह निर्देश मांगा गया था कि समय सीमा समाप्त होने के बाद दोनों टावरों के लंबित कार्य को किस तरह पूरा किया जाए।
इस मुद्दे को लेकर पिछले साल सितंबर में एक अहम बैठक हुई थी। इस बैठक में तत्कालीन मुख्य सचिव पंकज जोशी, गुजरेरा की चेयरपर्सन अनीता करवल, शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव एम थेन्नारसन, गिफ्ट सिटी के एमडी और सीईओ संजय कौल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। लंबी चर्चा के बाद, कुछ ही दिन पहले इस पर अंतिम निर्णय लिया गया है।
क्या है प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति?
इस प्रोजेक्ट को ‘WTC नोएडा डेवलपमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा लॉन्च किया गया था, जिसमें टावर A, B, C और D शामिल हैं। रिकॉर्ड्स के मुताबिक:
- टावर A और D का निर्माण पूरा हो चुका है और गिफ्ट सिटी के अधिकारियों ने इन्हें ‘पार्ट ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट’ भी जारी कर दिए हैं।
- टावर A, B और D, टावर C के साथ गुजरेरा में ‘चल रहे प्रोजेक्ट्स’ (Ongoing projects) के रूप में पंजीकृत हैं।
- मार्च 2024 में दाखिल की गई आखिरी RERA फाइलिंग के अनुसार, टावर B (G+28) का 79% काम पूरा हो चुका है।
- टावर C का काम केवल 29% पूरा दिखाया गया है। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि टावर C के लिए G+10 RCC का काम पूरा हो गया है, लेकिन डेवलपर ने इसे RERA पोर्टल पर अपलोड नहीं किया था।
परेशान खरीदारों ने अपने फ्लैट्स का कब्जा पाने के लिए गुजरेरा में लगभग 90 शिकायतें भेजी थीं, जिनमें से 42 शिकायतें केवल टावर C से संबंधित थीं।
सरकारी अधिकारी का बयान
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “हमने रेरा अधिनियम की धारा 8 पर चर्चा की, जो रजिस्ट्रेशन रद्द होने या समय सीमा समाप्त होने पर प्राधिकरण की जिम्मेदारी तय करती है। प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के मुताबिक, दोनों प्रोजेक्ट्स की अंतिम तारीखें निकल चुकी हैं, जिससे उनका रजिस्ट्रेशन रद्द हो गया है। ऐसे हालात में, काम को फिर से शुरू करने और आवंटियों को उनके यूनिट्स का कब्जा दिलाने के लिए सक्षम प्राधिकारी के निर्णय की जरूरत थी।”
अधिकारी ने आगे बताया कि समिति ने धारा 8 के तहत आगे बढ़ने का फैसला किया है। अब यह काम ‘एसोसिएशन ऑफ एलोटीज’ द्वारा पूरा किया जाएगा। राज्य सरकार दूसरे समूह को भी एसोसिएशन बनाने में मदद करेगी।
इसके अलावा, गुजरेरा, गिफ्ट सिटी और शहरी विकास एवं शहरी आवास विभाग मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रोजेक्ट पूरा हो। अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आवंटियों का संघ यह जिम्मेदारी लेने से इनकार करता है, तो अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
अधिकारियों का मानना है कि यह फैसला न केवल खरीदारों को उनका घर दिलाने का एक रास्ता है, बल्कि इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि नियामक एजेंसियां और गिफ्ट सिटी प्राधिकरण निगरानी और समन्वय में शामिल रहें।
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