अमेरिका के टेक्सास राज्य में डैलस का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो को लेकर इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई है, जिसमें कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि डैलस अब ‘डैलसपुरम’ में बदल रहा है। यह विवाद मुख्य रूप से H1B वीज़ा और अप्रवासन (Immigration) नीतियों को लेकर खड़ा हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर @CyberGreen09 नाम के एक यूजर ने एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में डैलस के एक उपनगर (suburb) में लोग पारंपरिक भारतीय कपड़ों में ढोल और ताशा बजाते हुए गणेश चतुर्थी का जुलूस निकाल रहे हैं। यह दृश्य किसी शॉपिंग सेंटर की पार्किंग का लग रहा है।
पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया: “डैलस हमारी आंखों के सामने ‘डैलसपुरम’ में बदल रहा है।”
इतना ही नहीं, पोस्ट में H1B वीज़ा सिस्टम पर तीखा हमला करते हुए कहा गया, “H1B वीज़ा का इस्तेमाल भारतीयों को उन सामान्य नौकरियों के लिए लाने में किया जा रहा है, जिन्हें टेक्सास के स्थानीय लोग आसानी से कर सकते हैं। ये लोग कोई ‘ग्लोबल टैलेंट’ नहीं हैं, बल्कि यह एक तरह का औद्योगिक धोखा है जो हमारे महान राज्य को बर्बाद कर रहा है। अब समय आ गया है कि हम टेक्सास के लोगों को प्राथमिकता दें और H1B प्रोग्राम को खत्म करें!”
तथ्य: वीडियो की सच्चाई
हालांकि यह वीडियो अभी चर्चा में है, लेकिन हकीकत यह है कि यह ताज़ा नहीं है। यह फुटेज अगस्त 2025 का है। इसे डैलस के उत्तरी उपनगर लुइसविले (Lewisville) में ‘इंडिया बाज़ार’ के बाहर गणेश चतुर्थी उत्सव के दौरान रिकॉर्ड किया गया था। लुइसविले में भारतीय समुदाय की अच्छी खासी आबादी है। यह वीडियो पिछले साल भी वायरल हुआ था।
दो खेमों में बंटी राय
इस वीडियो ने लोगों को दो अलग-अलग विचारों में बांट दिया है:
- हिंदू अमेरिकियों का पक्ष: उनका कहना है कि यह एक खुशमिजाज़ और वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव था, जिसे समुदाय ने मिलजुल कर मनाया।
- MAGA समर्थकों का पक्ष: ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) विचारधारा से जुड़े लोगों ने शिकायत की है कि इस आयोजन ने एक कमर्शियल पार्किंग क्षेत्र में अव्यवस्था और शोरगुल पैदा किया।
H1B वीज़ा पर फिर उठे सवाल
यह पुराना वीडियो अब एक बार फिर अप्रवासन और H1B वीज़ा प्रोग्राम पर बहस का हथियार बन गया है, जो पहले से ही जांच के दायरे में है। दक्षिणपंथी टिप्पणीकार और H1B विरोधी वक्ता एंड्रयू ब्रांका (Andrew Branca) ने भी इस वीडियो को रीपोस्ट करते हुए लिखा: “अमेरिका, यह क्या है? क्या हमारे संस्थापकों ने इसी की कल्पना की थी?”
आंकड़े क्या कहते हैं?
डैलस-फोर्ट वर्थ मेट्रो क्षेत्र में 2,50,000 से अधिक भारतीय अमेरिकी निवास करते हैं। इनमें से कई लोग फ्रिस्को (Frisco), प्लानो (Plano) और लुइसविले जैसे उपनगरों में रहते हैं, जो अब बड़े टेक्नोलॉजी और बिज़नेस हब बन चुके हैं।
संघीय आंकड़ों (Federal Data) के अनुसार, 2024 में मंजूर किए गए कुल H1B वीज़ा में से लगभग 71 प्रतिशत भारतीय नागरिकों को मिले थे।
आर्थिक लाभ बनाम ‘अमेरिका फर्स्ट’
इस मुद्दे पर भी दो स्पष्ट राय देखने को मिलती हैं. नियोक्ता, व्यवसायियों व अमेरिकी एम्प्लॉयर्स का मानना है कि कुशल प्रवासियों (skilled migration) ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया है और टेक व डिफेंस जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर्स को मजबूत किया है।
जबकि, ‘अमेरिका फर्स्ट’ समर्थकों का आरोप है कि वीज़ा सिस्टम में खामियां हैं। उनका मानना है कि यह सिस्टम अमेरिकी वर्कर्स की नौकरियां छीनकर उन्हें कम वेतन पर काम करने वाले भारतीय और चीनी कर्मचारियों को दे रहा है।
तनाव की यह स्थिति केवल ऑनलाइन ही नहीं है। कुछ दिन पहले फ्रिस्को सिटी काउंसिल की मीटिंग में भी ऐसा ही माहौल देखने को मिला था, जहां कुछ स्थानीय निवासियों ने क्षेत्र में तथाकथित “इंडियन टेकओवर” (भारतीयों के बढ़ते वर्चस्व) को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं।
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