नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद भारतीय राजनीति में उबाल आ गया है। देश के प्रमुख विपक्षी दलों ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक संप्रभु राष्ट्र का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया है। साथ ही, विपक्ष ने अमेरिका और इजरायल के कदम पर मोदी सरकार की ‘चुप्पी’ की भी तीखी आलोचना की है।
कांग्रेस ने सरकार की चुप्पी को बताया ‘विश्वासघात’
रविवार, 1 मार्च को कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस घटना को ‘घिनौना’ (despicable) करार दिया। उन्होंने इसे “तथाकथित लोकतांत्रिक दुनिया के नेताओं द्वारा एक संप्रभु राष्ट्र के नेतृत्व की लक्षित हत्या” बताया। इस हमले में मारे गए निर्दोष लोगों पर गहरा दुख जताते हुए प्रियंका ने कहा कि कई देशों को इस संघर्ष में घसीट लिया गया है।
महात्मा गांधी के प्रसिद्ध विचार ‘आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देगी’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “दुनिया को शांति की जरूरत है, न कि और अधिक अनावश्यक युद्धों की।”
हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का नाम नहीं लिया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मध्य पूर्व में प्रभावित देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
इससे पहले शनिवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी अमेरिका-इजरायल गठबंधन और ईरान के बीच तेजी से बढ़ती शत्रुता पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मध्य पूर्व में हर भारतीय नागरिक की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और सरकार को इसके लिए तत्काल एवं सक्रिय कदम उठाने चाहिए।
पार्टी के अन्य नेताओं ने भी इसी सुर में सुर मिलाया। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस ‘लक्षित हत्या’ पर मोदी सरकार की खामोशी की आलोचना करते हुए इसे नैतिक नेतृत्व से पीछे हटना और भारत के पारंपरिक सिद्धांतों के साथ विश्वासघात बताया। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने रविवार को कहा कि मोदी सरकार की प्रतिक्रिया “भारत के मूल्यों, सिद्धांतों, चिंताओं और हितों के साथ धोखा” है।
अन्य विपक्षी दलों ने की कूटनीतिक पहल की मांग
विपक्ष के अन्य प्रमुख नेताओं ने भी इस घटनाक्रम पर चिंता जाहिर की है. आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने पीएम मोदी से अमेरिका और इजरायल के ‘अत्याचार’ के खिलाफ खुलकर बोलने का आग्रह किया।
सीपीआई (एम) महासचिव एमए बेबी ने इस हत्या को “बेहद निंदनीय” बताया और भारत से आग्रह किया कि वह हिंसा को समाप्त करने के लिए लोकतांत्रिक आवाजों को एकजुट करे।
समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव ने मांग की कि सरकार अपना रुख स्पष्ट करे और क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए एक तटस्थ पक्ष के रूप में कूटनीतिक प्रयास तेज करे।
मुख्यमंत्रियों ने उठाई नागरिकों की सुरक्षा की मांग
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पीएम मोदी को एक पत्र लिखा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर बताया: “ईरान पर हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता जताते हुए माननीय पीएम श्री @narendramodi को पत्र लिखा है। हमारे प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आवश्यक होने पर उनकी सुरक्षित वापसी के लिए तत्काल तैयारियां करने का अनुरोध किया है। केरल सरकार हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है, जिसमें रिश्तेदारों के लिए हेल्पलाइन स्थापित करना भी शामिल है।”
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और समुदायों से शांत रहने तथा ऐसे किसी भी कदम से बचने की अपील की जिससे तनाव बढ़ सकता हो। उन्होंने ईरान में रहने वाले जम्मू-कश्मीर के निवासियों और छात्रों की सुरक्षा के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) के साथ समन्वय किए जाने की जानकारी भी दी।
वामपंथी दलों का कड़ा रुख, अमेरिका को बताया ‘तानाशाह’
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पोलित ब्यूरो ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का “खुला उल्लंघन” बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। पार्टी ने ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा, “अमेरिका और इजरायल ने ईरान के साथ चल रही बातचीत को दरकिनार करते हुए यह हमला किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और इन हमलों से साफ है कि उन्हें कभी इन वार्ताओं पर भरोसा नहीं था।”
वामपंथी दल ने अमेरिका को एक ‘लड़ाकू तानाशाह’ करार दिया, जो वेनेजुएला पर हालिया हमले और क्यूबा को दी गई धमकियों की तरह ही मनमर्जी से संप्रभु देशों पर हमला कर रहा है। बयान में यह भी रेखांकित किया गया कि यह हमला भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के ठीक बाद हुआ है, इसलिए भारत सरकार को अपने मित्र देश ईरान पर हुए इस हमले की स्पष्ट निंदा करनी चाहिए।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के नेता डी. राजा ने भी एक विस्तृत बयान जारी कर अमेरिका और इजरायल के एकतरफा सैन्य हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों का घोर उल्लंघन और एक ‘लापरवाह सैन्य दुस्साहस’ बताया।
राजा ने कहा कि यह हमला पश्चिम एशिया को अस्थिर करने और सैन्य बल के माध्यम से ईरान में ‘सत्ता परिवर्तन’ (regime change) थोपने की एक खतरनाक रणनीति का हिस्सा है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए भारत सरकार से आग्रह किया कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी कृत्य में भागीदार न बने।
भारत सरकार का आधिकारिक रुख
रविवार दोपहर तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सीधे तौर पर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर कोई टिप्पणी नहीं की गई थी। हालांकि, विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शनिवार को ही एक बयान जारी कर ईरान और खाड़ी क्षेत्र के घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की थी।
विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव को और अधिक न बढ़ाने, नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और सभी राज्यों की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए बातचीत व कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील की है।
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