गुजरात सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र में निजी कोचिंग सेंटरों को विनियमित करने वाले ‘गुजरात कोचिंग इंस्टीट्यूट (मैनेजमेंट) बिल’ को पेश करने का अपना फैसला टाल दिया है। अब इस प्रस्तावित विधेयक की जगह एक नई नीति तैयार की जा रही है, जिसे जल्द ही पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। राज्य में छात्रों की आत्महत्या, आग लगने की घटनाओं और कोचिंग संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी गंभीर चिंताओं के बीच यह कदम उठाया जा रहा है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा, उनके मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मुकेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि विधानसभा में विधेयक लाने की पूर्व योजना को फिलहाल रद्द कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि अब एक विशेष समिति नई नीति के लिए नियम और कानून बनाने पर तेजी से काम कर रही है।
इससे पहले राज्य के अधिकारी ‘राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक, 2025’ जैसे अन्य राज्यों द्वारा पारित कानूनों का विश्लेषण कर रहे थे। हालांकि, अब सरकार ने सख्त कानून की जगह एक व्यापक और प्रभावी नीति के साथ आगे बढ़ने का मन बना लिया है।
सुप्रीम कोर्ट और शिक्षा मंत्रालय के 2024 के दिशा-निर्देशों में भी पूरे देश के कोचिंग सेंटरों के लिए समान मानक तय करने पर जोर दिया गया है। राज्यों को इन नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में विशेषज्ञों की एक टीम भारत सरकार के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी ‘कोचिंग सेंटर पंजीकरण और विनियमन दिशा-निर्देश 2024’ का बारीकी से अध्ययन कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, यही दिशा-निर्देश गुजरात की आगामी नीति का मुख्य आधार बनेंगे।
इस नई नीति के तहत कोचिंग क्षेत्र की कई खामियों को दूर करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। कोचिंग संस्थानों द्वारा दिए जाने वाले भ्रामक विज्ञापनों और झूठे दावों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाएगा। यदि कोई छात्र बीच में ही कोचिंग छोड़ना चाहता है, तो उसकी बची हुई फीस वापस करने का अनिवार्य प्रावधान भी इस नीति का एक अहम हिस्सा होगा।
इसके अलावा, किसी भी सरकारी संस्थान में काम करने वाले शिक्षकों को निजी कोचिंग सेंटरों में पढ़ाने की सख्त मनाही होगी।
छात्रों की नियमित स्कूली शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए कोचिंग सेंटरों को स्कूल के समय में अपनी कक्षाएं संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। नई नीति में संस्थानों के बुनियादी ढांचे पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
नियमों के तहत प्रत्येक छात्र के लिए न्यूनतम जगह, अग्निशमन सुरक्षा मानकों का अनिवार्य पालन, हवादार इमारतें, पीने का सुरक्षित पानी और सीसीटीवी कैमरे जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। कोचिंग सेंटरों में पढ़ाने वाले ट्यूटर्स की न्यूनतम योग्यता भी निर्धारित की जाएगी।
छात्रों के बीच बढ़ते तनाव और डिप्रेशन को कम करने के लिए भी अहम फैसले लिए जा रहे हैं। कोचिंग संस्थानों में छात्रों को मनोवैज्ञानिक और करियर काउंसलिंग देने के लिए अनुभवी काउंसलरों की नियुक्ति का प्रावधान किया जा रहा है। छात्रों के प्रदर्शन या अंकों के आधार पर उनके अलग-अलग बैच बनाने की अस्वस्थ प्रथा पर भी रोक लगाई जाएगी।
इसके साथ ही, अत्यधिक महत्वाकांक्षाओं के कारण पैदा होने वाले मानसिक दबाव के बारे में छात्रों और अभिभावकों को जागरूक करने की योजना बनाई जा रही है।
व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए एक शिकायत निवारण तंत्र भी स्थापित किया जाएगा। जो भी कोचिंग संस्थान इन नए नियमों और नीति के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उन पर भारी जुर्माना लगाने का भी प्रावधान होगा। लगातार नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों का पंजीकरण रद्द करने जैसे सख्त कदम उठाने पर भी राज्य सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।
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