अयोध्या: अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने अयोध्या पहुंचकर अपनी पत्नी डॉ. प्रीति अडानी, बड़े बेटे करण अडानी और बहू परिधि अडानी के साथ श्री राम मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने भगवान राम की जन्मभूमि पर पूजा-अर्चना की और इसके बाद एक ऐतिहासिक गुरुकुल, श्री निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय का दौरा किया।
हनुमान जयंती के अवसर पर हुए इस दर्शन को गौतम अडानी ने एक बेहद व्यक्तिगत क्षण बताया, जो आस्था और राष्ट्र की व्यापक कथा का संगम है। उन्होंने इस दर्शन को “अत्यधिक भावुक और गर्व” का विषय बताया। उन्होंने राम मंदिर को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक निरंतरता, एकता और बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने भगवान राम के आदर्शों— ईमानदारी, कर्तव्य और सेवा— को राष्ट्र की आगे की यात्रा के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बताया। राम मंदिर में दर्शन के बाद उनकी यह यात्रा आस्था के क्षण से आगे बढ़कर भारत की ज्ञान परंपराओं के जीवंत रूप तक पहुंची।
गौतम अडानी मंदिर से लगभग 10 मिनट की दूरी पर स्थित श्री निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय पहुंचे। यह गुरुकुल 1935 में स्वामी त्यागनंद जी द्वारा स्थापित किया गया था। आर्य समाज के सिद्धांतों पर आधारित यह संस्थान वैदिक शिक्षा, सामाजिक उत्थान और सुलभ शिक्षा पर जोर देता है, जहां पारंपरिक आवासीय गुरुकुल प्रणाली का पालन किया जाता है।
गुरुकुल में उन्होंने छात्रों और शिक्षकों से बातचीत की और उस सीखने के माहौल को करीब से देखा जहां अनुशासन, जिज्ञासा और मूल्य एक साथ मिलकर भारत की ज्ञान प्रणालियों को संरक्षित करते हैं। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा मूल्यों से जुड़ी होती है, तो यह केवल व्यक्तियों को ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य को भी आकार देती है।
उन्होंने एआई-संचालित भविष्य की ओर तेजी से बढ़ते देश में भारत की ज्ञान प्रणालियों को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने घोषणा की कि अडानी ग्रुप की सामाजिक कल्याण शाखा, अडानी फाउंडेशन, गुरुकुल में परंपरा और तकनीक के संगम को सक्षम करने के लिए एक एआई-सक्षम प्रयोगशाला (AI-enabled laboratory) की स्थापना का समर्थन करेगा।
इस गुरुकुल में लगभग 200 छात्र मुफ्त शिक्षा प्राप्त करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि ज्ञान सुलभ और समावेशी बना रहे। परिसर में एक पारंपरिक गौशाला भी है। इस संस्थान की एक बेहद समृद्ध विरासत रही है, जिसके शुरुआती आगंतुकों में महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस शामिल थे।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने एक स्वर में संस्कृत श्लोकों का पाठ किया, जिसकी गूंज पूरे परिसर में सुनाई दी। छात्रों के बीच बैठकर गौतम अडानी ने उन्हें ध्यान से सुना और शिक्षकों से उस व्यवस्था को लेकर चर्चा की, जहां सीखना कक्षा से बाहर दैनिक जीवन का हिस्सा है।
गौतम अडानी के लिए ये आदर्श ‘सेवा’ में व्यक्त होते हैं, जिसे वे “सेवा ही साधना है” के दर्शन के रूप में वर्णित करते हैं। उनके अनुसार सेवा कोई एक कार्य नहीं, बल्कि विनम्रता, जिम्मेदारी और उद्देश्य में निहित समाज के प्रति एक निरंतर प्रतिबद्धता है।
आज की यह यात्रा भारत की ज्ञान, इतिहास, भाषा, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत से उनके निरंतर जुड़ाव का ही एक विस्तार है। इससे पहले वे प्रयागराज में महाकुंभ मेले और पिछले साल पुरी में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा में भी शामिल हुए थे, जिसे उन्होंने सामूहिक राष्ट्रीय पूर्ति का क्षण बताया था।
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