अहमदाबाद: भारत के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) ने यूरोप में एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। कंपनी ने इग्नियो इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स (Igneo Infrastructure Partners) से नीदरलैंड स्थित इवोस बी.वी. (Evos B.V.) की 100% हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया है। यह पूरी तरह से नकद सौदा है, जिसकी एंटरप्राइज वैल्यू 2.56 बिलियन यूरो आंकी गई है।
इवोस यूरोप का दूसरा सबसे बड़ा स्वतंत्र लिक्विड स्टोरेज ऑपरेटर है। इस सौदे के तहत इवोस की इक्विटी वैल्यू 1.18 बिलियन यूरो तय की गई है, जो CY25 के EV/EBITDA का 11.7 गुना है। साल 2025 में इवोस ने शानदार वित्तीय प्रदर्शन करते हुए 392 मिलियन यूरो का राजस्व और 219 मिलियन यूरो का EBITDA दर्ज किया था, जिसमें 56% का बेहतरीन EBITDA मार्जिन शामिल है।
इस ऐतिहासिक सौदे से APSEZ का ग्लोबल फुटप्रिंट अब 10 देशों के 28 बंदरगाहों और टर्मिनलों तक फैल गया है। इवोस के पास पांच देशों—नीदरलैंड, जर्मनी, स्पेन, बेल्जियम और माल्टा—में फैले आठ रणनीतिक पोर्ट टर्मिनल्स हैं। इनकी कुल स्टोरेज क्षमता 6.3 मिलियन क्यूबिक मीटर है। कंपनी के पास 452 टैंक, 63 वेसल और बार्ज बर्थ हैं, जिन्होंने CY25 के दौरान 37 MMT (मिलियन मीट्रिक टन) थ्रूपुट को संभाला है।
यह अधिग्रहण अदाणी पोर्ट्स को उच्च मुनाफे वाला और नकदी पैदा करने वाला लिक्विड बिजनेस मॉडल प्रदान करेगा, जिसकी औसत कमर्शियल ऑक्यूपेंसी 99% है। इवोस पारंपरिक ईंधनों के साथ-साथ सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), बायोफ्यूल और मेथेनॉल जैसे नए युग के ईंधनों (ट्रांजिशन फ्यूल्स) का भी संचालन करता है, जो इसे यूरोप के बदलते एनर्जी मिक्स का एक अहम हिस्सा बनाता है।
अदाणी पोर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर, करण अदाणी ने इस उपलब्धि पर कहा कि इवोस का अधिग्रहण कंपनी के 1 बिलियन टन कार्गो हैंडलिंग और एक ग्लोबल इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट प्लेटफॉर्म बनने के लक्ष्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि इवोस के पोर्टफोलियो में शामिल होने से दुनिया के प्रमुख लिक्विड स्टोरेज और एनर्जी हब में उनकी उपस्थिति काफी मजबूत होगी।
इस मेगा डील की फंडिंग कर्ज के जरिए की जाएगी, जिसके लिए MUFG इकलौता अंडरराइटर है और उसने 2.8 बिलियन यूरो तक की वित्तीय प्रतिबद्धता दी है। इस संयोजन के बाद संयुक्त इकाई का प्रो-फार्मा नेट डेब्ट-टू-EBITDA 2.76x रहने का अनुमान है, जिसके वित्त वर्ष 2027 तक 2.5x के आसपास रहने की उम्मीद है। यह अधिग्रहण विनियामक (रेगुलेटरी) मंजूरियों और वर्क्स काउंसिल की परामर्श प्रक्रिया के अधीन है, जो तत्काल प्रभाव से शुरू होगी।
यह भी पढ़ें-








