गुजरात में फुटबॉल विश्लेषण और खिलाड़ियों की प्रतिभा तलाशने की प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गुजरात स्टेट फुटबॉल एसोसिएशन (जी.एस.एफ.ए.) ने गुजरात सुपर लीग (जी.एस.एल.) के तीसरे सीज़न के दौरान डेटा-आधारित स्पोर्ट्स इंटेलिजेंस पहल शुरू की। जर्मनी स्थित बॉश-इवॉको स्पोर्ट्स इन्टलिजन्स (Bosch-Evoco Sports Intelligence) के सहयोग से लागू इस पहल में उच्च-सटीकता वाले वीडियो एनालिटिक्स, खिलाड़ियों के व्यवहार एवं प्रदर्शन की ट्रैकिंग और विशेषज्ञों द्वारा प्रमाणित प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (Key Performance Indicators—KPIs) का उपयोग किया गया, ताकि जमीनी स्तर पर फुटबॉल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें निखारा जा सके। जी.एस.एल. के तीसरे सीज़न के मैच सितंबर 2026 में अहमदाबाद के एका एरीना ट्रांसस्टेडिया में खेले गए।
यह परियोजना में फुटबॉल प्रतिभा के आकलन के लिए बॉश-इवॉको स्पोर्ट्स इन्टलिजन्स ढाँचे का वैश्विक स्तर पर पहली बार उपयोग किया गया। जी.एस.एफ.ए. की पहल पर शुरू हुई यह परियोजना पारंपरिक स्काउटिंग पद्धतियों—जो मुख्यतः मैच के परिणामों और व्यक्तिपरक निरीक्षण पर निर्भर करती हैं—से आगे बढ़कर समग्र और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण की ओर एक रणनीतिक बदलाव की परिचायक है।
जी.एस.एल. के तीसरे सीज़न के दौरान इस पहल के तहत छह फ्रेंचाइज़ी टीमों के 133 खिलाड़ियों से जुड़े सभी 16 मैचों का विश्लेषण किया गया। ये टीमें थीं: सौराष्ट्र स्पार्टन्स, वडोदरा वॉरियर्स, गांधीनगर जायंट्स, अहमदाबाद एवेंजर्स, सूरत स्ट्राइकर्स और कर्णावती नाइट्स।
अंतरराष्ट्रीय खेल वैज्ञानिकों द्वारा प्रमाणित डायनामिक वीडियो ट्रैकिंग के माध्यम से इवॉको प्रणाली ने खिलाड़ियों का शारीरिक, तकनीकी, संज्ञानात्मक, व्यवहारगत और विकासात्मक पहलुओं पर आकलन किया। इन विशेषज्ञों में टी.एस.जी. हॉफनहीम के पूर्व मुखिया और खेल वैज्ञानिक प्रो. डॉ. जान मेयर भी शामिल थे।
इस प्रणाली ने 133 खिलाड़ियों की विस्तृत प्रोफाइल के आधार पर KPIs से संबंधित 1,719 से अधिक अवलोकन दर्ज किए। प्रमुख मानकों में शामिल थे: (i) पर्फॉर्मन्स अण्डर प्रेशर (PuP)—दबावपूर्ण मैच परिस्थितियों में रणनीतिक निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक संतुलन का आकलन; (ii) एरर रिकवरी टाइम (ERT)—मैदान पर गलती के बाद खिलाड़ी की व्यवहारगत दृढ़ता और भावनात्मक प्रतिक्रिया का मूल्यांकन; तथा (iii) प्रत्यक्ष प्रतियोगिता—प्रतिद्वंद्वी के साथ आमने-सामने की भिड़ंत में तकनीकी और शारीरिक प्रभावशीलता का मापन।
जी.एस.एफ.ए. की इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य पारंपरिक, स्कोरबोर्ड-आधारित स्काउटिंग की सीमाओं को दूर करना था। स्पोर्ट्स इंटेलिजेंस के आँकड़ों से पता चला कि टीम की अंकतालिका में स्थिति हमेशा किसी खिलाड़ी की व्यक्तिगत उत्कृष्टता को नहीं दर्शाती। उदाहरण के लिए, टूर्नामेंट का खिताब सौराष्ट्र स्पार्टन्स ने जीता, लेकिन व्यक्तिगत प्रदर्शन के विश्लेषण में वडोदरा वॉरियर्स की कुल प्रदर्शन सफलता दर 66.3 प्रतिशत रही, जो सौराष्ट्र के 63.1 प्रतिशत से अधिक थी। इन मानकों ने जी.एस.एफ.ए. को निचली रैंक वाली टीमों के उन उत्कृष्ट खिलाड़ियों की पहचान करने में मदद की, जिनका व्यक्तिगत योगदान अन्यथा अनदेखा रह सकता था।
जी.एस.एफ.ए. की इस पहल का सबसे तात्कालिक परिणाम जर्मनी के एक क्लब में उन्नत प्रशिक्षण के लिए अंडर-20 वर्ग के दो खिलाड़ियों का चयन है। गांधीनगर जायंट्स के अरिहंत राजपुरोहित अंडर-20 खिलाड़ियों में शीर्ष स्थान पर रहे। उनकी कुल सफलता दर 82.4 प्रतिशत, स्थिरता सूचकांक 31.59 और सीधे मुकाबलों में सफलता दर 87.5 प्रतिशत रही। सौराष्ट्र स्पार्टन्स के आशीष राणा ने मैच-दर-मैच निरंतरता प्रदर्शित की। उनकी कुल सफलता दर 70 प्रतिशत और स्थिरता सूचकांक 46.4 रहा। उन्होंने देखे गए छह मैचों में से पाँच में सकारात्मक योगदान दिया। जर्मनी में उनके प्रशिक्षण से संबंधित व्यवस्थाओं और संचालन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
इस साझेदारी के माध्यम से जी.एस.एफ.ए. ने भारत में आधुनिक खेल प्रशासन के लिए एक मानदंड स्थापित किया है। प्रख्यात फुटबॉल चिंतक श्री कौशिक मौलिक ने जी.एस.एफ.ए. और बॉश-इवॉको को एक मंच पर लाने में सक्रिय भूमिका निभाई। जी.एस.एफ.ए.– बॉश-इवॉको परियोजना ने प्रदर्शित किया है कि डेटा-आधारित इंटेलिजेंस जमीनी स्तर पर प्रतिभा तलाशने की प्रक्रिया को सशक्त बना सकती है और टीम के मैच परिणामों से परे जाकर होनहार खिलाड़ियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षण तथा अंतरराष्ट्रीय अनुभव दिलाने में मदद कर सकती है।
(राज्यसभा सदस्य परिमल नथवाणी गुजरात स्टेट फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष तथा रिलायन्स इण्डस्ट्रीज़ लिमिटेड में कॉरपोरेट अफेयर्स के निदेशक हैं।)











