नई दिल्ली: अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण के लिए सबसे बड़ी बोलीदाता बनकर उभर सकती है। सूत्रों के अनुसार, अडानी समूह द्वारा दो साल में अधिग्रहण राशि का भुगतान करने के प्रस्ताव को वेदांता के पांच साल में भुगतान करने के प्रस्ताव से बेहतर माना गया है।
अडानी का प्रस्ताव सबसे बेहतर
सूत्रों ने बताया कि जेपी एसोसिएट्स (JAL) की क्रेडिटर्स कमेटी (CoC) ने पिछले हफ्ते बैठक की और प्राप्त व्यापक समाधान योजनाओं की व्यवहार्यता का मूल्यांकन किया। मूल्यांकन मैट्रिक्स के आधार पर अडानी एंटरप्राइजेज की योजना को सबसे अधिक स्कोर मिला। इसके बाद डालमिया सीमेंट (भारत) और तीसरे स्थान पर वेदांता लिमिटेड रही।
अडानी समूह ने उधारदाताओं को दो साल के भीतर भुगतान करने की पेशकश की है, जबकि वेदांता ने अगले पांच वर्षों में भुगतान का प्रस्ताव दिया है। वहीं, डालमिया सीमेंट की योजना में भुगतान जेपी एसोसिएट्स और यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण (YEIDA) के बीच सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के फैसले पर निर्भर है।
दो सप्ताह में हो सकती है वोटिंग
सूत्रों के मुताबिक, अब अगले दो सप्ताह में CoC द्वारा समाधान योजना पर मतदान किए जाने की संभावना है। योजनाओं के समग्र मूल्यांकन को देखते हुए उम्मीद है कि CoC जेपी एसोसिएट्स के समाधान और टर्नअराउंड के लिए अडानी एंटरप्राइजेज के पक्ष में वोट कर सकती है।
सितंबर में वेदांता थी आगे
इससे पहले सितंबर की शुरुआत में हुई नीलामी में वेदांता समूह 12,505 करोड़ रुपये (NPV) की बोली के साथ सबसे आगे था। उस समय डालमिया सीमेंट, जिंदल पावर और पीएनसी इंफ्राटेक ने नीलामी में हिस्सा नहीं लिया था। बाद में, उधारदाताओं ने बोली का मूल्य बढ़ाने के लिए इन पांचों कंपनियों के साथ बातचीत की और 14 अक्टूबर को सभी ने सीलबंद लिफाफों में नई समाधान योजनाएं जमा कीं।
प्रमोटरों का प्रस्ताव खारिज
पिछले महीने जेपी एसोसिएट्स के पूर्व प्रमोटरों ने भी उधारदाताओं के साथ समझौता करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने फंड का कोई स्पष्ट स्रोत नहीं बताया। सूत्रों का कहना है कि ऐसे प्रस्ताव अक्सर प्रक्रिया को बाधित करने के इरादे से दिए जाते हैं।
60,000 करोड़ रुपये का कर्ज
जेपी एसोसिएट्स को 3 जून, 2024 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), इलाहाबाद बेंच के आदेश के बाद कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) में शामिल किया गया था। कंपनी पर वित्तीय लेनदारों का लगभग 60,000 करोड़ रुपये का दावा है और एक हजार से अधिक घर खरीदार विभिन्न परियोजनाओं में फंसे हुए हैं।
कंपनी की प्रमुख संपत्तियां
जेपी एसोसिएट्स के पास रियल एस्टेट, सीमेंट, पावर, होटल और निर्माण क्षेत्र में व्यापक कारोबार है। इसकी प्रमुख संपत्तियों में ग्रेटर नोएडा में जेपी ग्रीन्स, नोएडा में जेपी ग्रीन्स विशटाउन का हिस्सा और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास जेपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी शामिल हैं। इसके अलावा, कंपनी के पास दिल्ली-एनसीआर में कमर्शियल स्पेस और दिल्ली, मसूरी व आगरा में पांच होटल हैं। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में कंपनी के चार सीमेंट प्लांट भी हैं, जो फिलहाल बंद हैं।
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