सुप्रीम कोर्ट ने अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड (APSEZ) को बड़ी राहत देते हुए गुजरात हाई कोर्ट के उस निर्देश और राज्य सरकार के आदेश को खारिज कर दिया है, जिसके तहत कंपनी को आवंटित की गई ‘गौचर’ (चरागाह) भूमि को वापस लेने की बात कही गई थी। यह जमीन लगभग दो दशक पहले आवंटित की गई थी।
अदालत के इस फैसले के साथ ही कंपनी और राज्य सरकार के बीच चल रही लंबी कानूनी लड़ाई अब समाप्त हो गई है।
क्या है पूरा मामला? (मामले की पृष्ठभूमि)
इस विवाद की जड़ें 15 जुलाई 2005 से जुड़ी हैं। उस समय गुजरात सरकार ने नवीनल गांव (Navinal village) में लगभग 9.34 लाख वर्ग मीटर गौचर भूमि अदाणी पोर्ट्स (APSEZ) को आवंटित की थी। यह आवंटन एक स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) के विकास के लिए किया गया था, जिसके बदले राज्य द्वारा निर्धारित मुआवजा भी अदा किया गया था।
बाद में, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने औपचारिक रूप से इस भूमि को एसईजेड भूमि के रूप में अधिसूचित भी कर दिया था।
हालाँकि, 2011 में इस आवंटन पर सवाल उठने लगे। गुजरात हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें राज्य की 2005 की अधिसूचना और भूमि आवंटन को चुनौती दी गई और मांग की गई कि चरागाह की जमीन को बहाल किया जाए।
जुलाई 2024 में आया नया मोड़
इस केस में एक नया और नाटकीय मोड़ 5 जुलाई 2024 को सुनवाई के दौरान आया। राज्य सरकार ने अदालत में एक हलफनामा (affidavit) पेश किया, जिसमें 4 जुलाई 2024 के एक आदेश का जिक्र था।
इस आदेश के जरिए सरकार ने निर्देश दिया था कि 2005 में आवंटित की गई जमीन में से लगभग 1.08 लाख वर्ग मीटर जमीन वापस ले ली जाए।
APSEZ ने इसका कड़ा विरोध किया। कंपनी का तर्क था कि यह आदेश उन्हें बिना कोई नोटिस जारी किए और बिना उनका पक्ष सुने (without opportunity to be heard) पारित किया गया था, जो न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसके बावजूद, राज्य के हलफनामे पर भरोसा करते हुए, गुजरात हाई कोर्ट ने 5 जुलाई 2024 को सरकार को जमीन वापस लेने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश दे दिया।
सुप्रीम कोर्ट का दखल और अंतिम फैसला
हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए, अदाणी पोर्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition) दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए 10 जुलाई 2024 को हाई कोर्ट के आदेश पर रोक (stay) लगा दी थी।
सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद, मंगलवार को इस मामले पर विस्तार से सुनवाई हुई। उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए गुजरात हाई कोर्ट के 5 जुलाई 2024 के आदेश और राज्य सरकार के 4 जुलाई 2024 के जमीन वापसी के निर्णय, दोनों को रद्द (quash) कर दिया।
कंपनी के पास बरकरार रहेंगे अधिकार
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि विवादित गौचर भूमि पर सभी अधिकार अब भी अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड के पास ही रहेंगे। शीर्ष अदालत के इस निर्णय ने न केवल कंपनी को बड़ी राहत दी है, बल्कि भूमि अधिग्रहण को लेकर चली आ रही अनिश्चितता को भी खत्म कर दिया है।
यह भी पढ़ें-
अडानी पावर ने Q3 FY26 के नतीजे घोषित किए: 2,488 करोड़ रुपये का मुनाफा, जुटाए 7,500 करोड़ रुपये









