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अहमदाबाद में सांसों पर संकट: 31 दिसंबर 2025 को टूटा प्रदूषण का रिकॉर्ड, AQI 429 के पार; हालात ‘खतरनाक’

| Updated: January 1, 2026 17:05

सांसों पर संकट: 31 दिसंबर को 429 AQI के साथ अहमदाबाद की हवा हुई 'जहरीली', विशेषज्ञों ने घोषित की हेल्थ इमरजेंसी; सांस लेना 7 सिगरेट पीने के बराबर।

अहमदाबाद: अहमदाबाद की हवा में जहर घुलता जा रहा है। साल 2025 के आखिरी दिन, यानी 31 दिसंबर को शहर की वायु गुणवत्ता (Air Quality) ने एक बेहद डरावना रिकॉर्ड बनाया। बुधवार की सुबह जब शहर की नींद खुली, तो पूरा शहर धुंध (smog) की एक मोटी ग्रे चादर में लिपटा हुआ था। सुबह 8 बजे एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 429 के स्तर को छू गया। जब से AQI की निगरानी शुरू हुई है, तब से लेकर अब तक का यह सबसे उच्चतम और खतरनाक स्तर है।

यह केवल अहमदाबाद की समस्या नहीं है, बल्कि गुजरात के कई प्रमुख शहरों ने प्रदूषण के खतरनाक स्तर दर्ज किए। गांधीनगर में AQI 417, सूरत में 414 और वड़ोदरा में 401 रहा—ये सभी ‘खतरनाक’ (Hazardous) श्रेणी में आते हैं। राजकोट की स्थिति थोड़ी बेहतर थी, लेकिन वहां भी AQI 374 दर्ज किया गया, जो चिंताजनक है।

आपको बता दें कि 300 से ऊपर का AQI ‘खतरनाक’ माना जाता है, जबकि 201 से 300 के बीच का स्तर ‘गंभीर’ (Severe) होता है, जो आम जनता के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।

अब तक का सबसे प्रदूषित दिन

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अहमदाबाद में छाई यह धुंध सिर्फ दृश्यता (visibility) की समस्या नहीं है, बल्कि एक हेल्थ इमरजेंसी है। AQI.in के ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले शहर का सबसे खराब AQI 23 दिसंबर 2021 को 396 दर्ज किया गया था। लेकिन 31 दिसंबर 2025 को 429 के आंकड़े ने उस रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया।

एक विशेषज्ञ ने स्थिति की गंभीरता बताते हुए कहा, “यह अहमदाबाद में अब तक की सबसे खराब वायु गुणवत्ता है।”

बीते 45 दिनों (15 नवंबर से शुरू होकर) के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस सीजन में कम से कम सात दिन ऐसे रहे जब AQI 300 के पार चला गया। यह दर्शाता है कि इस साल प्रदूषण का प्रकोप कितना लंबा और लगातार बना हुआ है।

दिन भर में 7.4 सिगरेट पीने जितना नुकसान

प्रदूषण का असर सेहत पर कितना भयानक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बुधवार को अहमदाबाद की हवा में सांस लेना दिन भर में करीब 7.4 सिगरेट पीने के बराबर था। समाचार रिपोर्ट्स में AQI.in के अनुमानों के हवाले से बताया गया कि अगर कोई एक हफ्ते तक ऐसी हवा में रहे, तो यह 52 सिगरेट पीने जैसा है, और एक महीने में यह आंकड़ा 222 सिगरेट के बराबर हो जाता है।

प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे जितना हो सके घर के अंदर रहें, बाहर निकलते समय N95 मास्क पहनें और घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।

ट्रैफिक और कंस्ट्रक्शन ने बिगाड़े हालात

इस प्रदूषण के पीछे सबसे बड़ा कारण बढ़ता ट्रैफिक और अनियोजित निर्माण कार्य है। अहमदाबाद में हर दिन औसतन 828 नए वाहन सड़कों पर उतरते हैं, जिससे उत्सर्जन (emissions) में भारी इजाफा हो रहा है। ट्रैफिक अधिकारियों ने भी माना कि वाहनों की आवाजाही के साथ ही प्रदूषण का स्तर घटता-बढ़ता है।

इलाकों के हिसाब से देखें तो थलतेज (Thaltej) और एसजी रोड सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। थलतेज में सुबह 6 बजे ही AQI 400 के पार था, जो 9 बजे तक 494 के चरम पर पहुंच गया।

जुहापुरा के एशान पार्क इलाके में रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही के कारण तड़के 4 बजे AQI 478 दर्ज किया गया। न्यू ईयर ईव (New Year’s Eve) के जश्न के कारण देर रात तक सड़कों पर गाड़ियां रेंगती रहीं, जिससे शाम 6 बजे से 9 बजे के बीच प्रदूषण फिर बढ़ गया। इस्कॉन (Iskcon) के पास सड़क खुदाई और कई ब्रिज प्रोजेक्ट्स के निर्माण कार्यों ने आग में घी का काम किया है।

विशेषज्ञों की राय: ‘अनियोजित विकास है जिम्मेदार’

वाइब्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए पर्यावरणविद् महेश पंड्या ने सीधे तौर पर शहर में चल रहे अनियोजित निर्माण कार्यों और उससे लगने वाले जाम को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य बिना किसी सही प्लानिंग के किए जा रहे हैं और अक्सर चुनाव से ठीक पहले उन्हें पूरा करने की होड़ रहती है।

पंड्या ने कहा, “धूल के कण, ट्रैफिक जाम और पेड़ों की कमी अहमदाबाद के लिए नासूर बन गए हैं। लोगों में ‘सिविक सेंस’ की कमी और औद्योगिक प्रदूषण भी वजह है, लेकिन सबसे बड़ी चिंता खराब सड़कें और बेतरतीब निर्माण है।”

उन्होंने थलतेज और बोपल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कोई फैक्ट्री नहीं है, फिर भी AQI आसमान छू रहा है, जिसका सीधा मतलब है कि हमें निर्माण कार्यों को नियंत्रित करना होगा।

अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़

प्रदूषण का सीधा असर लोगों की सेहत पर दिखने लगा है। एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार ने पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. तुषार पटेल के हवाले से लिखा कि अस्पतालों में लगातार खांसी, गले में जलन और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है।

डॉ. पटेल ने कहा, “जिन लोगों को पहले से सांस की बीमारी है, वे सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। प्रदूषित सर्दी की हवा आसानी से ब्रोंकोस्पास्म (bronchospasm) को ट्रिगर कर सकती है।”

मोटेरा की रहने वाली शीतल शाह ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, “मेरी सास को पिछले दो दिनों से गले में गंभीर संक्रमण हो गया है। हमारे घर का एयर प्यूरीफायर आमतौर पर 35 से 40 की रीडिंग दिखाता है, लेकिन बुधवार को यह 90 के पार चला गया।”

31 दिसंबर 2025 का दिन अहमदाबाद के लिए एक चेतावनी की तरह था। पीएम 2.5 (PM2.5) और पीएम 10 (PM10) के खतरनाक स्तर यह बता रहे हैं कि अब यह केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर जन स्वास्थ्य संकट (Public Health Crisis) बन चुका है।

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