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ब्रेस्ट कैंसर की जांच में AI का चमत्कार: स्वीडिश स्टडी में हुआ खुलासा, अब पहले से ज्यादा सटीक होगी स्कैनिंग

| Updated: January 31, 2026 16:13

पेरिस: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल टेक्नोलॉजी की दुनिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि चिकित्सा जगत में भी यह जीवन रक्षक साबित हो रहा है। शुक्रवार को सामने आए दुनिया के पहले ‘रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल’ के नतीजों ने नई उम्मीद जगाई है। स्वीडन में हुए इस शोध में पाया गया कि रूटीन स्कैन के दौरान ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) के मामलों को पकड़ने में AI डॉक्टरों की मदद करने में बेहद कारगर है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि इन नतीजों को देखते हुए दुनिया भर के देशों को अपने स्क्रीनिंग प्रोग्राम में AI तकनीक को शामिल करना चाहिए। इससे न केवल स्कैनिंग की सटीकता बढ़ेगी, बल्कि रेडियोलॉजिस्ट की कमी से जूझ रहे अस्पतालों में काम का बोझ भी कम होगा।

क्या कहता है नया अध्ययन?

भले ही 2 मेडिकल स्कैन पढ़ने की AI की क्षमता का परीक्षण वैज्ञानिक काफी समय से कर रहे थे, लेकिन प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ (The Lancet) में प्रकाशित यह नया अध्ययन अपनी तरह का पहला गोल्ड-स्टैंडर्ड रिसर्च है।

इस ट्रायल में 2021 और 2022 के बीच स्वीडन में रूटीन ब्रेस्ट कैंसर स्कैन कराने वाली 1,00,000 से अधिक महिलाओं को शामिल किया गया। इन महिलाओं को रैंडम तरीके से दो समूहों में बांटा गया.

  1. पहला समूह: इनके स्कैन की जांच एक रेडियोलॉजिस्ट ने AI सिस्टम की मदद से की।
  2. दूसरा समूह: इनकी जांच पारंपरिक यूरोपीय मानक के अनुसार की गई, जिसमें दो रेडियोलॉजिस्ट मिलकर स्कैन देखते हैं।

नतीजों ने चौंकाया: 9% अधिक मामले पकड़े गए

अध्ययन के परिणाम बेहद सकारात्मक रहे। AI की मदद लेने वाले समूह में पारंपरिक तरीके (कंट्रोल ग्रुप) की तुलना में 9% अधिक कैंसर के मामलों की पहचान की गई।

इसके अलावा, अगले दो वर्षों के दौरान AI समूह की महिलाओं में ‘इंटरवल कैंसर’ (रूटीन स्कैन के बीच के समय में होने वाला कैंसर) की दर भी 12% कम पाई गई। इंटरवल कैंसर अक्सर ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं क्योंकि ये तेजी से विकसित हो सकते हैं।

अच्छी बात यह रही कि दोनों समूहों में ‘फॉल्स पॉजिटिव’ (गलत रिपोर्ट) की दर लगभग समान थी, यानी AI ने अनावश्यक डर पैदा नहीं किया। यह सुधार अलग-अलग उम्र और ब्रेस्ट डेंसिटी (स्तन के घनत्व) वाली महिलाओं में एक समान देखा गया।

विशेषज्ञों की राय: सावधानी और निगरानी जरूरी

स्वीडन की लुंड यूनिवर्सिटी की वरिष्ठ अध्ययन लेखिका क्रिस्टिना लैंग ने कहा, “ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों में AI समर्थित मैमोग्राफी को व्यापक रूप से लागू करने से रेडियोलॉजिस्ट पर काम का दबाव कम होगा और शुरुआती चरण में ही अधिक कैंसर पकड़ने में मदद मिलेगी।”

हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इसे “सावधानीपूर्वक” और “निरंतर निगरानी” के साथ लागू किया जाना चाहिए।

वहीं, फ्रेंच नेशनल फेडरेशन ऑफ रेडियोलॉजिस्ट के प्रमुख जीन-फिलिप मैसन का मानना है कि मानवीय अनुभव की जगह पूरी तरह मशीन नहीं ले सकती। उन्होंने कहा, “रेडियोलॉजिस्ट की अनुभवी आंखों को AI के निदान को सही करना होगा। कई बार AI उन टिश्यू बदलावों को भी कैंसर मान सकता है जो वास्तव में कैंसर नहीं होते।”

उन्होंने यह भी कहा कि फ्रांस जैसे देशों में AI का उपयोग अभी शुरुआती दौर में है और यह तकनीक महंगी भी है।

लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्टीफन डफी, जो इस अध्ययन में शामिल नहीं थे, ने इसे सुरक्षित बताया। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि इंटरवल कैंसर में कमी के आंकड़े अभी सांख्यिकीय रूप से बहुत महत्वपूर्ण नहीं हैं, इसलिए यह देखने के लिए फॉलो-अप की जरूरत है कि क्या कंट्रोल ग्रुप के नतीजे समय के साथ बदलते हैं।

समय की बचत और वैश्विक आंकड़े

साल 2023 में प्रकाशित हुए इस ट्रायल के अंतरिम नतीजों में यह भी सामने आया था कि AI के इस्तेमाल से रेडियोलॉजिस्ट द्वारा स्कैन पढ़ने में लगने वाला समय लगभग आधा हो गया था। इस अध्ययन में ‘Transpara’ नामक AI मॉडल का उपयोग किया गया, जिसे 10 देशों के 2,00,000 से अधिक पुराने परीक्षणों पर प्रशिक्षित (Train) किया गया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों की गंभीरता को देखते हुए यह तकनीक महत्वपूर्ण हो जाती है। आंकड़ों के अनुसार, 2022 में दुनिया भर में 23 लाख से अधिक महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पता चला था और 6,70,000 महिलाओं की इस बीमारी से मृत्यु हो गई थी।

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