अहमदाबाद/नई दिल्ली: ठीक छह महीने पहले, 12 जून का वह मनहूस दिन था जब एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 ने अहमदाबाद से लंदन के गैटविक के लिए उड़ान भरी थी। बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान में सवार 242 लोगों में से केवल एक व्यक्ति जीवित बचा। इस भीषण दुर्घटना में जमीन पर मौजूद 19 अन्य लोगों की भी जान चली गई, जिससे कुल मृतकों की संख्या 260 हो गई। आज, आधा साल बीत जाने के बाद भी, पीड़ितों के परिवार न केवल अपने प्रियजनों के खोने के गम से जूझ रहे हैं, बल्कि एक अनसुलझे सवाल का जवाब भी तलाश रहे हैं—आखिर यह हादसा हुआ क्यों?
परिवारों का दर्द: मुआवजे से ज्यादा ‘सच्चाई’ की तलाश
पीड़ित परिवारों के लिए पिछले छह महीने किसी बुरे सपने से कम नहीं रहे हैं। 46 वर्षीय मदन सिंह राजपुरोहित, जो एक मिठाई की दुकान चलाते हैं, आज भी इसी सवाल से जूझ रहे हैं कि उनकी बड़ी बेटी खुशबू को ले जा रहा विमान क्रैश क्यों हुआ। खुशबू की शादी जनवरी में हुई थी और वह पहली बार लंदन अपने ससुराल जा रही थी।
राजपुरोहित कहते हैं, “मैं बयां नहीं कर सकता… हम अभी भी सदमे में हैं। जब परिवार का कोई सदस्य अचानक गायब हो जाता है, तो कैसा महसूस होता है?… मुआवजा तो मिलेगा, लेकिन वह काफी नहीं है। बस यह तसल्ली होनी चाहिए कि कैसे हुआ, क्यों हुआ, किसकी गलती से हुआ, यह जानना जरूरी है।” उनके दामाद विपुल सिंह ने न्याय पाने के लिए लंदन में कानूनी रास्ता अपनाया है।
दूसरी ओर, 24 वर्षीय होनहार क्रिकेटर और एआई (Artificial Intelligence) में मास्टर्स गोल्ड मेडलिस्ट, डीर्थ पटेल का परिवार भी टूट चुका है। डीर्थ को वेस्ट यॉर्कशायर की हडर्सफ़ील्ड यूनिवर्सिटी में रिसर्च एसोसिएट की नौकरी मिली थी। उनके भाई कृतिक पटेल और उनकी पत्नी, जो लंदन में सेटल होने की योजना बना रहे थे, अब सब कुछ छोड़कर गुजरात के खेड़ा जिले में अपने पैतृक गांव कपड़वंज लौट आए हैं।
कृतिक का दर्द केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि आर्थिक भी है। वे बताते हैं, “मेरे भाई की पढ़ाई के लिए लिया गया 15 लाख रुपये का एजुकेशन लोन अभी भी बाकी है। हम 22,000 रुपये की ईएमआई भर रहे हैं। बैंक से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद, हमें मूल राशि पर अधिकतम 10% छूट की पेशकश की गई।”
इस हादसे ने कार्गो मोटर्स ग्रुप के संस्थापक प्रमुख नंदा के परिवार को भी गहरा जख्म दिया है। इस दुर्घटना में प्रमुख नंदा, उनकी पत्नी नेहा और छोटे बेटे प्रयास की मौत हो गई थी। प्रमुख के भाई प्रणव बताते हैं कि उनके बीमार माता-पिता को इस त्रासदी की जानकारी घटना के दो महीने बाद दी गई थी, और उनके पिता की तबीयत खराब होने के कारण वे पिछले हफ्ते फिर अस्पताल में भर्ती थे।
अमेरिकी लॉ फर्म ‘बीस्ली एलन’ के विमानन वकील माइक एंड्रयूज, जो 130 परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, का कहना है कि परिवार अब “सच्चाई खोजने पर अधिक केंद्रित” हैं। 12 जून के बाद से अपनी तीसरी गुजरात यात्रा पर आए एंड्रयूज ने कहा, “शुरुआत में भावनाएं बहुत कच्ची थीं… लेकिन अब वे धैर्य रखने और सच्चाई का पता लगाने के लिए अधिक दृढ़ संकल्पित दिख रहे हैं।”
जांच की दिशा: तकनीकी खराबी पर सुई, पायलट की गलती के सबूत नहीं
हादसे के तकनीकी कारणों की जांच कर रही एजेंसियों का ध्यान अब विमान में आई गंभीर विद्युत खराबी (Electrical Malfunction) पर है। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने हाल ही में राज्यसभा को बताया कि दुर्घटना के सभी संभावित कारणों की जांच की जा रही है।
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने 12 जुलाई को अपनी 15-पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी। जांच अधिकारियों के अनुसार, अब तक ऐसा कोई “ठोस सबूत” नहीं मिला है जो यह साबित करे कि यह हादसा “पायलट की गलती” या किसी जानबूझकर की गई कार्रवाई का नतीजा था।
हालांकि, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में दर्ज पायलट-इन-कमांड कैप्टन सुमीत सभरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर के बीच 23 सेकंड की बातचीत चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें ईंधन स्विच को ‘कट-ऑफ’ मोड में जाने को लेकर सवाल किए गए थे।
जांच से जुड़े एक अधिकारी ने अहम खुलासे किए हैं:
- इलेक्ट्रिकल स्नैग (Electrical Snag): मलबे और फ्लाइट डेटा के विश्लेषण से पता चला है कि विमान के ‘आफ्ट इलेक्ट्रिकल सिस्टम’ (Aft Electrical System) में एक विशिष्ट खराबी आई थी। यह सिस्टम हाइड्रोलिक पंप, एपीयू (APU), इंजन पावर और ईंधन पंप जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों को नियंत्रित करता है।
- सिस्टम फेलियर: इस खराबी के कारण क्रिटिकल पावर डिस्ट्रीब्यूशन और फ्लाइट सिस्टम एक के बाद एक फेल होते चले गए (Cascading failure)।
- रैम एयर टर्बाइन (RAT): प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, टेक-ऑफ के लगभग 8 सेकंड बाद ही बिजली गुल होने के कारण ‘रैम एयर टर्बाइन’ (RAT) तैनात हो गया था ताकि हाइड्रोलिक पावर मिल सके। यह एटीसी को ‘मेडे’ (Mayday) कॉल करने से 13 सेकंड पहले हुआ।
- पायलटों का संघर्ष: अधिकारी ने बताया कि जब तक RAT ने पावर देना शुरू नहीं किया, तब तक पायलटों के लिए इंजनों को दोबारा चालू (Relight) करना असंभव था क्योंकि बैटरी बैकअप इसके लिए पर्याप्त नहीं था। पावर आने के बाद उन्होंने ईंधन स्विच को रिसाइकिल करके इंजन चालू करने की कोशिश की, लेकिन तब तक न तो पर्याप्त ऊंचाई बची थी और न ही समय।
जांचकर्ताओं को एकमात्र जीवित बचे यात्री विश्वास कुमार की गवाही से भी इस थ्योरी को बल मिला है, जिन्होंने केबिन की लाइटों के “टिमटिमाने” (Flickering) का जिक्र किया था। यह मुख्य पावर और बैकअप जनरेटर के बीच सिस्टम के स्विच होने का संकेत देता है।
इसके अलावा, पिछली उड़ान (AI423) के दौरान भी तकनीकी लॉग में “STAB POS XDCR” संदेश के साथ एक खराबी दर्ज की गई थी, जिसे अहमदाबाद में ठीक किया गया था। जांचकर्ता अब विमान के तकनीकी इतिहास और FADEC (Full Authority Digital Engine Control) पर पड़ने वाले प्रभावों की भी बारीकी से जांच कर रहे हैं। गौरतलब है कि दुर्घटना के बाद ‘इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर’ (ELT) भी निष्क्रिय पाया गया था।
अधिकारियों को उम्मीद है कि अगले छह महीनों में जांच पूरी कर ली जाएगी। फिलहाल, मानव मनोविज्ञान, फॉरेंसिक, एयरो-इंजीनियरिंग और बोइंग के विशेषज्ञों की मदद से डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। पीड़ित परिवारों और दुनिया को अब AAIB की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है, ताकि इस त्रासदी की असली वजह सामने आ सके।
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