गुवाहाटी/नई दिल्ली: असम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो ने राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मचा दी है। इस वीडियो में राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को एक राइफल ताने हुए दिखाया गया था। हालांकि, चौतरफा आलोचना और विपक्ष के तीखे हमलों के बाद पार्टी ने अब इस पोस्ट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ से हटा दिया है।
क्या था वीडियो में?
शनिवार को असम भाजपा के आधिकारिक हैंडल से अपलोड किए गए इस वीडियो के साथ “पॉइंट ब्लैंक शॉट” (Point blank shot) कैप्शन लिखा गया था। वीडियो में सीएम सरमा को दो लोगों की तस्वीर पर निशाना साधते और गोली चलाते हुए दिखाया गया था। तस्वीर में दिख रहे दोनों व्यक्तियों ने टोपी (स्कलकैप) पहन रखी थी, जिनमें से एक का चेहरा कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई से मिलता-जुलता था।
वीडियो के अंत में मुख्यमंत्री सरमा की एक काउबॉय (cowboy) जैसी वेशभूषा वाली तस्वीर दिखाई गई, जिसमें वह हाथ में बंदूक थामे हुए थे। इस दृश्य के ऊपर कई नारे सुपरइम्पोज़ किए गए थे, जैसे— “बांग्लादेशियों पर कोई दया नहीं” (No mercy to Bangladeshis), “आप पाकिस्तान क्यों गए?” और “विदेशी-मुक्त असम”।
कांग्रेस का तीखा हमला: ‘यह फासीवादी चेहरा है’
विपक्षी दलों ने इस वीडियो को लेकर भाजपा पर करारा हमला बोला है। कांग्रेस ने एक बयान जारी कर कहा कि यह वीडियो अल्पसंख्यकों की लक्षित हत्या (“targeted murder”) का महिमामंडन करता प्रतीत होता है।
कांग्रेस ने अपने बयान में कहा, “यह बेहद घृणित और परेशान करने वाला है। इसे केवल एक रैंडम ट्रोल कंटेंट मानकर खारिज नहीं किया जा सकता। यह सामूहिक हिंसा और नरसंहार के आह्वान के बराबर है। यह इस फासीवादी शासन का असली चेहरा है, जिसने दशकों से इस नफरत को पाल रखा है और पिछले 11 वर्षों में इसे सामान्य बनाने की कोशिश की है।”
पार्टी ने न्यायपालिका से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि समाज में जहर घोलने की इस हरकत पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि प्रधानमंत्री से जवाबदेही की उम्मीद नहीं की जा सकती।
भाजपा की चुप्पी और पोस्ट डिलीट
रविवार को यह विवादित पोस्ट डिलीट कर दी गई। जब इस मुद्दे पर असम भाजपा के प्रवक्ताओं से संपर्क किया गया, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। प्रवक्ता रंजीव कुमार सरमा ने केवल इतना कहा, “कोई टिप्पणी नहीं। इसे हटा दिया गया है, अब कहने के लिए कुछ नहीं है।”
भाजपा के असम सोशल मीडिया संयोजक, 33 वर्षीय बिस्वजीत खौंड ने भी वीडियो हटाए जाने पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया। जानकारी के मुताबिक, उनकी सोशल मीडिया टीम में 35 वर्ष से कम उम्र के चार सह-संयोजक, राज्य स्तर पर 20 सदस्य और हर जिले में एक संयोजक, दो सह-संयोजक और पांच सदस्य शामिल हैं।
तृणमूल और वाम दलों की प्रतिक्रिया
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने शनिवार के वीडियो को “नरसंहार और सामूहिक हत्या के लिए हरी झंडी” करार दिया। पार्टी ने कहा, “भाजपा ने अकेले ही भारत के राजनीतिक विमर्श को गटर में धकेल दिया है… उन्होंने हमारे संविधान के धर्मनिरपेक्ष और बहुलवादी मूल्यों को धूल में मिला दिया है।”
टीएमसी ने आगे कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा को अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को गोली मारते हुए दिखाया गया, जो खुले तौर पर उकसावा है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस पर संज्ञान लेने और तत्काल आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की मांग की।
वहीं, माकपा (CPI-M) ने इसे “जातीय सफाये (ethnic cleansing) और नरसंहार का खुला आह्वान” बताया।
पार्टी ने कहा, “मुख्यमंत्री और असम भाजपा घुसपैठियों के डर का इस्तेमाल करके मुसलमानों के खिलाफ हिंसा का आह्वान कर रहे हैं। मुख्यमंत्री को तबाही मचने से पहले सलाखों के पीछे डाल दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट को सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए उनके खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”
पहले भी विवादों में रहा है हैंडल
यह पहली बार नहीं है जब असम भाजपा का यह ‘X’ हैंडल (जिसके 2 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं) विवादों में आया है। पिछले साल सितंबर में, इसी हैंडल ने एक एआई-जनरेटेड (AI-generated) वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें ‘बीजेपी के बिना असम’ की कल्पना की गई थी।
उस वीडियो में सड़क किनारे मांस काटते हुए टोपी पहने एक व्यक्ति को दिखाया गया था और साथ में ‘बीफ वैधीकरण’ (beef legalization) लिखा था। इसके अलावा, चाय के बागानों, हवाई अड्डे, गुवाहाटी के स्टेडियम और अहोम राजवंश के स्मारक ‘रंग घर’ जैसे स्थानों पर टोपी पहने पुरुषों और बुर्का व हिजाब पहनी महिलाओं को दिखाया गया था। वीडियो में ‘अवैध अप्रवासी’ टेक्स्ट के साथ लोगों को सीमा की बाड़ पार करते हुए भी दिखाया गया था।
अगले महीने, सुप्रीम कोर्ट ने उस वीडियो को हटाने के लिए ‘X’ और असम भाजपा के आधिकारिक हैंडल को निर्देश देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया था।
उस समय, सोशल मीडिया संयोजक खौंड ने कहा था, “हम किसी एजेंसी का उपयोग नहीं करते; हम अपनी सामग्री (content) खुद लिखते हैं। हम तथाकथित उदारवादी नेताओं की बातों की परवाह नहीं करते। हमारा कंटेंट हमारे फील्डवर्क और लोगों से मिलने वाली प्रतिक्रियाओं पर आधारित होता है। ट्विटर पर हम अधिक आक्रामक रहते हैं, क्योंकि वहां लोग इसी तरह की प्रतिक्रिया देते हैं और इसे पसंद करते हैं।”
यह भी पढ़ें-
जापान चुनाव: पीएम साना ताकाइची की एलडीपी ने रचा इतिहास, प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी
सूरत एयरपोर्ट पर बैंकॉक से आई फ्लाइट में मिला 8 करोड़ का हाइब्रिड गांजा, 4 यात्री गिरफ्तार










