अहमदाबाद: यह बात किसी से छुपी नहीं है कि गुजरात के लोगों में विदेश जाकर बसने का कितना गहरा चाव है। अपने इस सपने को हकीकत बनाने के लिए, कई बार लोग बड़े जोखिम उठाते हैं, जिसमें फर्जी दस्तावेज़ तैयार करना और ‘डंकी रूट’ जैसे अवैध रास्ते अपनाना भी शामिल है।
हाल ही में, दस्तावेज़ों में हेरफेर का एक ऐसा ही बड़ा मामला सामने आया है, जिसने सबको चौंका दिया है। अहमदाबाद की निकोल पुलिस इस पूरे मामले की जाँच कर रही है।
ऐसे पकड़ा गया पूरा फर्जीवाड़ा
पुलिस जाँच के अनुसार, प्रकाश गोविंदलाल पटेल नाम के एक शख्स ने ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए गणपत यूनिवर्सिटी की एक मार्कशीट जमा की थी। इस मार्कशीट में उसके पास होने का साल 2003 लिखा हुआ था।
जब ऑस्ट्रेलियाई आव्रजन (Immigration) अधिकारियों ने इन दस्तावेज़ों की दोबारा जाँच की, तो वे हैरान रह गए। उनकी जाँच में यह बात सामने आई कि पटेल ने जिस गणपत यूनिवर्सिटी की 2003 की मार्कशीट जमा की थी, उस यूनिवर्सिटी की स्थापना ही 2005 में हुई थी। यह साफ तौर पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा था।
वीज़ा मिला, फिर हुआ डिपोर्ट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रकाश पटेल इन फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर वीज़ा हासिल करने में कामयाब हो गया और इसी साल 28 मार्च 2024 को ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना भी हो गया। वहाँ पहुँचने के कुछ महीनों बाद, ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने उसके दस्तावेज़ों का दोबारा सत्यापन (Re-verification) किया, जिसमें यह धोखाधड़ी पकड़ में आ गई।
फर्जीवाड़ा साबित होते ही, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने उसे इसी साल 3 नवंबर को वापस भारत डिपोर्ट कर दिया (देश निकाला दे दिया)।
इस पूरे प्रकरण के संबंध में नई दिल्ली में एक शिकायत दर्ज की गई थी, जिसके बाद अहमदाबाद की निकोल पुलिस को इस मामले की गहराई से जाँच करने का आदेश दिया गया है। पुलिस अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इस युवक को यह फर्जी डिग्री या मार्कशीट आखिर कैसे, कब और कहाँ से मिली।
कई यूनिवर्सिटी पहले से हैं ब्लैकलिस्ट
गौरतलब है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कई सालों से, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े देशों ने फर्जी दस्तावेज़ों के बढ़ते मामलों के कारण गुजरात और पंजाब के कुछ विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अपनी ब्लैकलिस्ट में डाला हुआ है।
जो भी आवेदक इन ब्लैकलिस्टेड संस्थानों की मार्कशीट या डिग्री के साथ वीज़ा के लिए आवेदन करता है, उन्हें वीज़ा देने से साफ इनकार कर दिया जाता है। इन देशों ने यह सख्त कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया है कि कोई भी व्यक्ति जाली दस्तावेज़ों के सहारे उनके देश में प्रवेश न कर सके। इन देशों का फोकस अब पूरी तरह से असली प्रतिभा (Real Talent) को आकर्षित करने पर है।
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