28 जनवरी 2026 को बारामती के पास हुए भीषण विमान हादसे को लगभग एक महीना बीत चुका है। इस दर्दनाक हादसे में महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित पांच लोगों की जान चली गई थी। अब इस त्रासदी को लेकर राजनीतिक और कानूनी घमासान काफी तेज हो गया है।
गुरुवार सुबह, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SCP) के विधायक रोहित पवार और योगेंद्र पवार बारामती ग्रामीण पुलिस स्टेशन पहुंचे। वे नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और विमान का संचालन करने वाली कंपनी VSR वेंचर्स के खिलाफ FIR दर्ज कराना चाहते थे। हालांकि, पुलिस ने इस मामले में नई शिकायत दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया।
थाने के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए रोहित पवार ने बताया कि अधिकारियों के साथ उनकी करीब दो घंटे तक लंबी चर्चा हुई। पुलिस की ओर से उन्हें बताया गया कि इस मामले में पहले ही एक रिपोर्ट दर्ज की जा चुकी है और वर्तमान में CBI तथा CID द्वारा इसकी जांच की जा रही है, इसलिए कोई नई FIR दर्ज नहीं की जा सकती।
जांच प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
रोहित पवार ने इस पूरे मामले में DGCA, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और राज्य CID की भूमिका पर संदेह जताया है। उनका सीधा आरोप है कि जांच में VSR वेंचर्स को बचाने और अहम सबूतों को दबाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने DGCA के एक सर्कुलर का भी जिक्र किया, जिसके तहत कथित तौर पर VSR की पांच उड़ानों पर रोक लगा दी गई थी। रोहित का तर्क है कि यह कदम कंपनी के सुरक्षा मानकों और नियमों के पालन पर गंभीर चिंताएं पैदा करता है।
21 फरवरी को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रोहित पवार ने हादसे से जुड़ी कुछ तस्वीरें और तकनीकी जानकारियां साझा की थीं। उन्होंने दावा किया था कि यह केवल एक बार टकराने (सिंगल इम्पैक्ट) का मामला नहीं लगता, बल्कि विमान में कई धमाके हुए होंगे।
उनका यह भी आरोप था कि विमान के कार्गो हिस्से में पेट्रोल के अतिरिक्त कंटेनर रखे गए थे, जिसने दुर्घटना के बाद आग को और ज्यादा भड़का दिया। उन्होंने तकनीकी और प्रक्रियात्मक पहलुओं को शामिल करते हुए एक व्यापक जांच की मांग की है।
राजनीतिक संरक्षण का आरोप और ‘साजिश’ का अंदेशा
इस महीने की शुरुआत में यह विवाद तब और गहरा गया, जब रोहित पवार ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू को पद से हटाने की मांग की। 18 फरवरी को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने मंत्री पर VSR वेंचर्स को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
रोहित ने दावा किया कि कंपनी के मालिकों और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेताओं के बीच करीबी राजनीतिक संबंध हैं। उनके अनुसार, VSR के मालिक वी.के. सिंह के बेटे रोहित सिंह की शादी में महाराष्ट्र के कई पूर्व मंत्रियों और TDP के बड़े नेताओं ने शिरकत की थी।
उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि इतने बड़े जानलेवा हादसे के बाद भी कंपनी का कामकाज जारी है और राजनेता अभी भी उनके विमानों का उपयोग कर रहे हैं।
इसके अलावा, रोहित पवार ने इस दुर्घटना को एक बड़ी साजिश का हिस्सा होने का अंदेशा जताया है। साथ ही, उन्होंने हादसे के वक्त विमान उड़ा रहे कैप्टन सुमित कपूर के पेशेवर रिकॉर्ड पर भी सवाल खड़े किए हैं।
परिवार का दर्द: जय पवार ने की निष्पक्ष जांच की मांग
अजित पवार के बेटे जय पवार ने भी इस हादसे की परिस्थितियों को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। 18 फरवरी को अपने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में उन्होंने मांग की कि VSR वेंचर्स की उड़ान गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए।
जय ने सवाल उठाया कि विमान के ‘ब्लैक बॉक्स’ को दुर्घटनाओं को झेलने के लिए ही डिज़ाइन किया जाता है, फिर वह इतनी आसानी से कैसे नष्ट हो सकता है? उन्होंने लिखा कि देश के नागरिकों को इस त्रासदी की पूरी और पारदर्शी जानकारी जानने का हक है।
अपनी पोस्ट के अंत में भावुक होते हुए उन्होंने “मिस यू, डैड” (Miss you, Dad) लिखा और अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि विमान के रखरखाव में हुई खामियों की निष्पक्ष जांच हो।
विमान और कंपनी का विवरण
जो विमान हादसे का शिकार हुआ, वह VSR वेंचर्स का लियरजेट 45 (Learjet 45XR) था, जिसका रजिस्ट्रेशन VT-SSK था। यह एक “सुपर-लाइट” बिजनेस जेट है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर हाई-स्पीड कॉर्पोरेट और लक्जरी यात्राओं के लिए किया जाता है।
नई दिल्ली स्थित VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड एक गैर-अनुसूचित (non-scheduled) एयर चार्टर सर्विस प्रोवाइडर है। यह कंपनी प्राइवेट जेट, एयर एंबुलेंस और एविएशन कंसल्टेंसी की सेवाएं देती है।
हादसे के तुरंत बाद कार्रवाई करते हुए, DGCA ने 2 फरवरी को गैर-अनुसूचित ऑपरेटरों (जिसमें VSR वेंचर्स भी शामिल है) के एक विशेष सुरक्षा ऑडिट का आदेश दिया था। यह ऑडिट आदेश 25 फरवरी तक लागू था और इसकी जांच फिलहाल जारी है। जैसे-जैसे जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं, इस मामले में कानूनी और राजनीतिक जवाबदेही तय करने की मांग लगातार तेज होती जा रही है।
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