नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर आज, यानी 16 सितंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व वाणिज्य विभाग के विशेष सचिव और मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल करेंगे, जबकि अमेरिका की ओर से उनके समकक्ष ब्रेंडन लिंच शामिल होंगे। यह बैठक दोनों देशों के बीच एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते की उम्मीदों को फिर से जगा रही है।
एक सरकारी अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, दक्षिण और मध्य एशिया के लिए सहायक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच सोमवार रात को ही भारत पहुँच चुके हैं और आज भारतीय पक्ष के साथ बातचीत को आगे बढ़ाएंगे। आपको बता दें कि दोनों देशों के बीच अब तक पाँच दौर की बातचीत हो चुकी है। इससे पहले 25 से 29 अगस्त के बीच प्रस्तावित वार्ता को किसी कारणवश टाल दिया गया था।
कौन हैं भारत का पक्ष रखने वाले राजेश अग्रवाल?
शैक्षणिक योग्यता: राजेश अग्रवाल 1994 बैच के मणिपुर कैडर के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। अगर उनकी शिक्षा की बात करें तो, उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से सांख्यिकी में स्नातक (Bachelor’s Degree in Statistics) और ऑपरेशंस रिसर्च में परास्नातक (Masters’ Degree in Operations Research) की डिग्री हासिल की है।
इसके अलावा, उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में एग्जीक्यूटिव पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया है।
करियर और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ: इसी साल अप्रैल में उन्हें वाणिज्य विभाग में अंतरिम विशेष सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था। वह भारत के अगले वाणिज्य सचिव भी होंगे। एक सरकारी आदेश के मुताबिक, वह 30 सितंबर, 2025 को मौजूदा सचिव सुनील बर्थवाल के सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद संभालेंगे।
वर्तमान में, वह अमेरिका के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए मुख्य वार्ताकार की भूमिका निभा रहे हैं। वह ऐसे समय में वाणिज्य विभाग का कार्यभार संभालेंगे जब भारत, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय आयातों पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ और रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा है।
अमेरिका के साथ बातचीत के अलावा, राजेश अग्रवाल कई अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को भी संभाल रहे हैं। वह 10 देशों के समूह आसियान (ASEAN) के साथ वस्तुओं में मुक्त व्यापार समझौते की समीक्षा का नेतृत्व कर रहे हैं। साथ ही, वह ऑस्ट्रेलिया और पेरू के साथ प्रस्तावित व्यापक व्यापार समझौतों के लिए भी बातचीत कर रहे हैं। उन्हें इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क (IPEF) के लिए भी मुख्य वार्ताकार बनाया गया है।
इससे पहले वह मणिपुर सरकार में बिजली मंत्रालय में प्रधान सचिव और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने 2015 से 2019 के बीच कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की पृष्ठभूमि
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे मौजूद हैं। पिछले कुछ महीनों से, भारत और अमेरिका एक अंतरिम व्यापार सौदे पर बातचीत कर रहे हैं। यह बातचीत तब तेज हुई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी बाज़ार में आने वाले भारतीय सामानों पर 50% का टैरिफ लगा दिया था।
हालांकि, इस बातचीत में कुछ बड़ी अड़चनें भी हैं। सूत्रों का कहना है कि भारत ने कृषि और डेयरी क्षेत्रों को पूरी तरह से खोलने की अमेरिकी मांग पर अपनी आपत्ति जताई है। ये दोनों क्षेत्र भारत के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि देश की एक बड़ी आबादी की आजीविका इन्हीं पर निर्भर करती है।
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