अगर आप नौकरीपेशा हैं और बजट 2026 से अपनी टेक-होम सैलरी में बदलाव की उम्मीद कर रहे थे, तो आपके लिए बड़ी खबर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2025–26 में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। सरकार ने इस बार ‘नई राहत’ देने के बजाय ‘स्थिरता’ (Stability) पर जोर दिया है।
नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत ‘शून्य टैक्स’ (Nil Tax) की सीमा ₹12 लाख पर बरकरार रहेगी। इसका सीधा मतलब है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन को मिलाकर नौकरीपेशा लोग प्रभावी रूप से ₹12.75 लाख तक की आय पर टैक्स-फ्री रहने का लाभ उठाते रहेंगे।
वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण ने व्यक्तिगत इनकम टैक्स स्लैब में कोई संशोधन नहीं किया है और पहले से चली आ रही संरचना को ही कायम रखा है।
मिडिल क्लास: अर्थव्यवस्था के केंद्र में
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में मिडिल क्लास को भारत की आर्थिक वृद्धि का मुख्य सारथी बताया। उन्होंने कहा कि “लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और मांग” (Democracy, Demography and Demand) वे तीन प्रमुख स्तंभ हैं जो भारत को ‘विकसित भारत’ की ओर ले जाएंगे।
सरकार की मंशा साफ करते हुए उन्होंने कहा कि हम लगातार मिडिल क्लास के साथ खड़े रहे हैं और समय-समय पर उनका टैक्स बोझ कम किया है।
टैक्स राहत के इतिहास पर रोशनी डालते हुए, निर्मला सीतारमण ने याद दिलाया कि कैसे ‘निल-टैक्स’ (शून्य कर) स्लैब को धीरे-धीरे बढ़ाया गया है:
- 2014: ₹2.5 लाख
- 2019: ₹5 लाख
- 2023: ₹7 लाख
उन्होंने कहा, “यह मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स में हमारी सरकार के विश्वास को दर्शाता है।”
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था के तहत ₹12 लाख तक की आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा (इसमें कैपिटल गेन जैसी विशेष आय शामिल नहीं है)। नौकरीपेशा करदाताओं के लिए, ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के कारण यह छूट सीमा बढ़कर ₹12.75 लाख हो जाती है।
इनकम टैक्स स्लैब: कोई बदलाव नहीं
वित्त मंत्री ने कहा कि टैक्स स्लैब का मौजूदा ढांचा इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसका फायदा सभी करदाताओं को मिले। इसका उद्देश्य लोगों के हाथों में ज्यादा पैसा छोड़ना है, जिससे घरेलू खपत (Consumption), बचत और निवेश को बढ़ावा मिल सके।
संशोधित टैक्स रेट स्ट्रक्चर इस प्रकार है:
| आय (रुपये में) | टैक्स दर |
| 0 – 4 लाख | शून्य (Nil) |
| 4 – 8 लाख | 5 प्रतिशत |
| 8 – 12 लाख | 10 प्रतिशत |
| 12 – 16 लाख | 15 प्रतिशत |
| 16 – 20 लाख | 20 प्रतिशत |
| 20 – 24 लाख | 25 प्रतिशत |
| 24 लाख से ऊपर | 30 प्रतिशत |
बजट 2026 में स्लैब में कोई बदलाव न करके सरकार ने पर्सनल टैक्स के मोर्चे पर निरंतरता का संकेत दिया है। भले ही कोई नई छूट न मिली हो, लेकिन इससे नौकरीपेशा करदाताओं को एक निश्चितता मिली है, जबकि सरकार का पूरा फोकस व्यापक आर्थिक और संरचनात्मक सुधारों पर बना हुआ है।
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