नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम इलाके में स्थित एक आश्रम द्वारा संचालित संस्थान में EWS कोटे के तहत पढ़ाई कर रही 15 से ज़्यादा छात्राओं ने प्रबंधक पर यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाए हैं। यह शिकायत लगभग एक महीने पहले दर्ज कराई गई थी, लेकिन आरोपी, चैतन्यानंद सरस्वती, अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
दिल्ली पुलिस ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी को पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। इसके अलावा, आरोपी के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र (UN) की फर्जी नंबर प्लेट वाली वॉल्वो कार इस्तेमाल करने के आरोप में एक और मामला दर्ज किया गया है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, यह मामला अगस्त महीने में तब सामने आया जब संस्थान के एक प्रशासक ने खुद पुलिस से संपर्क किया।
डीसीपी (साउथवेस्ट) अमित गोयल ने बताया, “4 अगस्त को स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी के खिलाफ एक शिकायत मिली थी। शिकायत में संस्थान में EWS स्कॉलरशिप के तहत उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था।”
इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने कई छात्राओं से पूछताछ की। जांच में पता चला कि लगभग 17 छात्राओं को नियमित रूप से आरोपी के यौन दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता था। पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि संस्थान में काम करने वाली महिला कर्मचारी उन पर चैतन्यानंद की मांगों को मानने के लिए दबाव डालती थीं।
डीसीपी गोयल ने आगे कहा, “पूछताछ के दौरान, 32 महिला छात्राओं के बयान दर्ज किए गए, जिनमें से 17 ने आरोपी द्वारा अपमानजनक भाषा, अश्लील व्हाट्सएप/एसएमएस संदेश और गलत तरीके से छूने का आरोप लगाया। पीड़ितों का यह भी कहना था कि संस्थान में फैकल्टी और प्रशासक के तौर पर काम करने वाली महिलाएं आरोपी का साथ देती थीं और उन पर दबाव बनाती थीं।”
इन बयानों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 75(2) (यौन उत्पीड़न), 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने का इरादा) और 351(2) के तहत मामला दर्ज कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया। पुलिस ने बताया कि पीड़ितों के बयान पटियाला हाउस कोर्ट में भी दर्ज कराए गए हैं।
डीसीपी गोयल ने कहा, “सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया गया और घटना स्थल के साथ-साथ आरोपी के संभावित ठिकानों पर कई छापे मारे गए। हालांकि, आरोपी अभी भी पुलिस से बच रहा है। संस्थान से बरामद नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डिंग (NVR) और हार्ड डिस्क को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत 16 पीड़ितों के बयान पटियाला हाउस कोर्ट में न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए जा चुके हैं।”
जांच के दौरान पुलिस को एक और चौंकाने वाली जानकारी मिली। चैतन्यानंद एक लाल रंग की वॉल्वो कार का इस्तेमाल कर रहा था, जिस पर ’31 UN’ लिखी हुई एक नकली ‘डिप्लोमैटिक’ नंबर प्लेट लगी थी, जो संयुक्त राष्ट्र की गाड़ियों पर होती है।
डीसीपी गोयल के अनुसार, “संस्थान के बेसमेंट में एक वॉल्वो कार खड़ी मिली। सत्यापन करने पर पता चला कि फर्जी डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट वाली इस कार का इस्तेमाल स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती करता था।”
इसके बाद पुलिस ने 25 अगस्त को आरोपी के खिलाफ एक और मामला दर्ज किया। यह मामला BNS की धाराओं 345(3) (धोखाधड़ी के लिए संपत्ति चिह्न का दुरुपयोग), 318(4) (धोखाधड़ी), 336(3) (जालसाजी) और 340(2) (झूठे दस्तावेज़ बनाना) के तहत दर्ज किया गया है।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि चैतन्यानंद की आखिरी लोकेशन आगरा में मिली थी, लेकिन दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर छापेमारी के बावजूद उसे अभी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।
इस बीच, आश्रम ने एक बयान जारी कर कहा है कि स्वामी चैतन्यानंद “अवैध और अनुचित गतिविधियों में लिप्त” रहा है और आश्रम ने “उससे सभी संबंध तोड़ लिए हैं”।
बयान में यह भी कहा गया है कि आश्रम ने “स्वामी चैतन्यानंद द्वारा किए गए अवैध कृत्यों के संबंध में संबंधित अधिकारियों के पास शिकायतें दर्ज कराई हैं”।
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