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ट्रंप के दावों का सच: ईरान हमले के बाद पहले बड़े संबोधन का फैक्ट-चेक

| Updated: April 2, 2026 13:55

ईरान पर हमलों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित किया। जानिए ईरान की तबाही, सत्ता परिवर्तन और तेल आयात को लेकर किए गए उनके बड़े दावों में कितनी सच्चाई है।

बुधवार को व्हाइट हाउस से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना प्राइम-टाइम संबोधन दिया। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के कारण मध्य पूर्व में बढ़े तनाव के बाद यह राष्ट्र के नाम उनका पहला बड़ा भाषण था।

इस रिपोर्ट में हम 79 वर्षीय अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा अपने इस महत्वपूर्ण भाषण में किए गए प्रमुख दावों की पड़ताल और उनका फैक्ट-चेक करेंगे।

सैन्य तबाही का दावा और उसकी हकीकत

ट्रंप ने अपने भाषण में दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह से तबाह हो गई है। उनका कहना था कि हमलों की घटी हुई संख्या के बीच, सहयोगियों के समर्थन से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर कब्जा करना अब बेहद आसान होगा।

हालांकि, जमीनी आंकड़े बताते हैं कि ईरानी हमले कम जरूर हुए हैं, लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं हुए हैं। आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा (ACLED) के अनुसार, 1 मार्च को ईरानी हमलों में भारी उछाल देखा गया था। उस दौरान एक ही दिन में 100 से अधिक हमले किए गए थे।

इसके बाद यह संख्या घटकर 50 हमले प्रतिदिन रह गई है। ये हमले अभी भी मध्य पूर्व में मौजूद प्रमुख अमेरिकी ठिकानों को अपना निशाना बना रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान जानबूझकर अपने हथियारों को बचाकर रख रहा है। हमलों की गति धीमी होने के बावजूद वह क्षेत्र में एक गंभीर खतरा बना हुआ है।

सत्ता परिवर्तन पर दावों की पड़ताल

ईरान में शासन परिवर्तन (Regime Change) को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका लक्ष्य कभी भी वहां की सत्ता बदलना नहीं था। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने कभी ‘शासन परिवर्तन’ की मांग नहीं की, लेकिन उनके सभी मूल नेताओं की मौत के कारण यह बदलाव अपने आप हो गया है। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके सभी पुराने नेता मारे जा चुके हैं।

इस दावे की वास्तविकता जमीनी हकीकत से अलग है। ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके बेटे मोजतबा ने नए अयातुल्ला के रूप में पदभार संभाल लिया है। अमेरिका-इजरायल के भीषण हमलों के बावजूद, जमीन पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ शिया मौलवियों का शासन पहले की तरह ही मजबूती से जारी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल आयात का सच

अपने एक अन्य दावे में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते “लगभग शून्य” तेल आयात करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका को इस मार्ग से तेल की जरूरत नहीं है और भविष्य में भी वह वहां से कोई आयात नहीं करेगा।

लेकिन ऊर्जा क्षेत्र के आंकड़े इस बयान को पूरी तरह से गलत साबित करते हैं। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (US EIA) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका का 7 प्रतिशत कच्चा तेल और 2 प्रतिशत पेट्रोलियम तरल पदार्थ आज भी इसी होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही आयात किया जाता है।

भाषण को लेकर सस्पेंस और ट्रंप का बयान

इस संबोधन से पहले व्हाइट हाउस ने भाषण की विषयवस्तु को पूरी तरह से गुप्त रखा था। इसके बारे में कोई भी आधिकारिक जानकारी पहले से जारी नहीं की गई थी। समाचार रिपोर्टों में व्हाइट हाउस के सूत्रों के हवाले से यह संभावना जताई गई थी कि ट्रंप अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान में चल रहे सैन्य अभियानों को समेटने के बारे में बात कर सकते हैं।

ट्रंप के पूर्व सलाहकार स्टीव बैनन ने भी अनुमान लगाया था कि राष्ट्रपति ईरान युद्ध में प्रभावी रूप से अपनी जीत की घोषणा कर सकते हैं। उनका यह भी मानना था कि वह धीरे-धीरे सैन्य अभियानों को कम करने का ऐलान करेंगे। लेकिन बुधवार की शुरुआत में जब राष्ट्रपति से उनके इस बहुप्रतीक्षित संबोधन की योजनाओं के बारे में पूछा गया, तो उनका रुख बिल्कुल अलग था।

ईरान युद्ध पर किसी बड़े फैसले की अटकलों को दूर करने के बजाय, ट्रंप ने मजाकिया लहजे में कहा कि वह सभी को यह बताने की योजना बना रहे हैं कि वह कितने महान हैं। इससे पहले व्हाइट हाउस में एक ईस्टर लंच के दौरान भी उन्होंने अपने भाषण के बारे में कुछ ऐसे ही संकेत दिए थे।

ट्रंप ने कहा था कि रात नौ बजे वह एक छोटा सा भाषण देने वाले हैं और मूल रूप से वह सबको यही बताएंगे कि उन्होंने कितना शानदार और अभूतपूर्व काम किया है। अपने इस बयान के अंत में उन्होंने पूरी गंभीरता से यह भी जोड़ा कि अगर अमेरिका में उनके बजाय किसी अन्य प्रकार का राष्ट्रपति होता, तो आज इजरायल का कोई अस्तित्व नहीं होता।

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