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गरबा के नए आइडिया पर अब मिलेगा ‘पेटेंट’! अपनी रचनात्मकता को सुरक्षित करने का सुनहरा मौका

| Updated: September 22, 2025 14:49

UNESCO से मान्यता के बाद गरबा की बढ़ी अहमियत, अब नए आइडिया को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने उठाया बड़ा कदम, कलाकारों और आयोजकों को मिलेगा फायदा।

अहमदाबाद: गरबा का पारंपरिक अंदाज़ तो सभी को भाता है, लेकिन क्या आपके पास इसे लेकर कोई बिल्कुल नया और अनूठा विचार है? या फिर इस त्यौहार को मनाने का कोई ऐसा कॉन्सेप्ट है जो पहले कभी नहीं देखा गया? अगर आपका जवाब ‘हाँ’ है, तो अब आप अपनी इस रचनात्मक सोच और कलात्मकता पर बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights) हासिल कर सकते हैं।

सोमवार से शुरू हो रहे नवरात्रि के नौ दिवसीय उत्सव के साथ ही, गुजरात सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत काम करने वाली गुजरात काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (GUJCOST) ने इस दिशा में एक अनोखी पहल शुरू की है। यह संस्था गरबा से जुड़े आयोजकों, कलाकारों और अन्य हितधारकों से संपर्क कर उन्हें इस अवसर के बारे में जागरूक कर रही है।

गरबा को मिली वैश्विक पहचान, अब इनोवेशन को मिलेगा संरक्षण

गुजकॉस्ट के सलाहकार डॉ. नरोत्तम साहू ने बताया कि गरबा गुजरात की सांस्कृतिक पहचान का एक अद्भुत उदाहरण है। साल 2023 में यूनेस्को (UNESCO) से “अमूर्त सांस्कृतिक विरासत” का टैग मिलने के बाद इसे दुनिया भर में एक नई पहचान मिली है।

डॉ. साहू ने आगे कहा, “इस साल, गुजकॉस्ट के पेटेंट सूचना केंद्र (PIC) ने गरबा और नवरात्रि के संदर्भ में बौद्धिक संपदा हासिल करने की संभावनाओं पर काम करना शुरू किया है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि पारंपरिक गरबा के स्टेप्स हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं और उन्हें पेटेंट नहीं कराया जा सकता। लेकिन, इसके अलावा स्टेज की डिज़ाइन, संगीत की नई धुनें, लोगों के अनुभव को बेहतर बनाने के तरीके और यहाँ तक कि ड्रेस डिज़ाइन जैसे कई पहलुओं पर आईपी अधिकार लिए जा सकते हैं।

पिछले कुछ दिनों में इस क्षेत्र से जुड़े कई बड़े नामों से संपर्क कर उन्हें इन अवसरों के बारे में जानकारी दी गई है और जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया है।

क्यों पड़ी इसकी ज़रूरत?

शहर के विशेषज्ञों ने हाल के कुछ विवादों का हवाला देते हुए आईपी अधिकारों की अहमियत को समझाया। कुछ समय पहले ही एक प्रसिद्ध गायक को अदालत से एक लोकप्रिय गीत गाने की अनुमति मिली थी। वहीं, इसी साल कई आयोजकों ने अपने गरबा आयोजन के नाम और वेन्यू की ब्रांडिंग को सुरक्षित रखने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी है।

पेटेंट सूचना केंद्र के विशेषज्ञ जिन श्रेणियों पर काम कर रहे हैं उनमें शामिल हैं:

  • पोशाक और आभूषणों के डिज़ाइन
  • गीत, संगीत और कोरियोग्राफी का कॉपीराइट
  • गरबा आयोजनों और ब्रांडिंग के लिए ट्रेडमार्क
  • कुछ विशेष परंपराओं के लिए भौगोलिक संकेतक (GI) टैग

करोड़ों का कारोबार और नकल का खतरा

एक स्थानीय आईपी वकील के अनुसार, “गरबा का आयोजन अब करोड़ों का व्यवसाय बन चुका है, और राज्य में गायकों, आयोजकों और संगीतकारों के कई बड़े और पुराने ब्रांड स्थापित हैं।” उन्होंने कहा, “तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और बाज़ार में हमेशा कुछ नया परोसने की मांग के कारण नकल और कॉपीराइट उल्लंघन की संभावनाएँ काफी बढ़ गई हैं।”

वकील ने यह भी कहा, “लोगों में अभी भी आईपी सुरक्षा हासिल करने की प्रक्रिया को लेकर ज़्यादा जागरूकता नहीं है। गुजकॉस्ट जैसी पहलें कलाकारों और आयोजकों के व्यावसायिक हितों की रक्षा करने में मील का पत्थर साबित हो सकती हैं।”

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