नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय द्वारा सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों की पुस्तकों को मंजूरी देने की प्रक्रिया में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पिछले पांच वर्षों (2020 से 2024) के दौरान मंत्रालय के पास मंजूरी के लिए आई दर्जनों पांडुलिपियों (manuscripts) में से पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे का संस्मरण एकमात्र ऐसा है, जो अभी भी मंजूरी की बाट जोह रहा है।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा सरकार की आलोचना के दौरान जनरल नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (Four Stars of Destiny) का जिक्र किए जाने के बाद से यह मामला सुर्खियों में है। मंत्रालय के रिकॉर्ड बताते हैं कि जहां अन्य अधिकारियों की किताबें आसानी से पास हो गईं, वहीं पूर्व सेना प्रमुख की किताब अभी भी प्रक्रिया में अटकी हुई है।
आरटीआई से हुआ खुलासा: 35 में से सिर्फ एक ‘पेंडिंग’
जनवरी 2024 में दायर एक आरटीआई (RTI) के जवाब में, जो 17 सितंबर, 2024 को प्राप्त हुआ, रक्षा मंत्रालय की आर्मी यूनिट ने जानकारी दी कि 2020 के बाद से उनके पास प्रकाशन की मंजूरी के लिए कुल 35 किताबें आई थीं।
रिकॉर्ड के मुताबिक, इन 35 किताबों में से केवल तीन को उस समय ‘क्लीयर नहीं’ (not yet cleared) की श्रेणी में दिखाया गया था। इसमें जनरल नरवणे का संस्मरण भी शामिल था। हालांकि, अब स्थिति और स्पष्ट हो चुकी है, जिससे पता चलता है कि वास्तव में केवल नरवणे की ही किताब ‘लिंबो’ (अधर) में लटकी हुई है।
आरटीआई के जवाब में जिन तीन किताबों का जिक्र था, उनकी वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
- ब्रिगेडियर जीवन राजपुरोहित (सेवानिवृत्त): इनकी किताब ‘लीडरशिप बियॉन्ड बैरक्स’ (Leadership Beyond Barracks) को ‘प्रक्रियाधीन’ दिखाया गया था, लेकिन लेखक के अनुसार, इसे मंजूरी मिल चुकी है और अब यह प्रकाशन के इंतजार में है।
- जनरल एन.सी. विज (सेवानिवृत्त): पूर्व सेना प्रमुख और करगिल युद्ध के दौरान डीजीएमओ रहे जनरल विज की किताब ‘अलोन इन द रिंग’ (Alone in the Ring) को भी मंत्रालय भेजा गया था। यह किताब मई 2025 में रिलीज हो चुकी है।
- जनरल एम.एम. नरवणे: इनकी किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ मंत्रालय के पास भेजी गई थी और यही एकमात्र ऐसी पांडुलिपि है जिस पर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।
न तो रक्षा मंत्रालय और न ही प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस ने समीक्षा की वर्तमान स्थिति पर कोई टिप्पणी की है।
इन दिग्गजों की किताबों को मिली मंजूरी
मंत्रालय ने हाल के वर्षों में जिन प्रमुख सैन्य अधिकारियों की पुस्तकों को मंजूरी दी है, उनमें कई बड़े नाम शामिल हैं:
- लेफ्टिनेंट जनरल एस.ए. हसनैन
- लेफ्टिनेंट जनरल एस.के. गडियोक
- लेफ्टिनेंट जनरल एस.आर.आर. अयंगर
- मेजर जनरल (डॉ.) अशोक कुमार
- मेजर जनरल शशिकांत पित्रे
- मेजर जनरल आर.के. शर्मा
- मेजर जनरल जी.डी. बक्शी
- लेफ्टिनेंट जनरल योगेश कुमार जोशी
किताबों के प्रकाशन के अनुरोध में भारी उछाल
आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों द्वारा प्रकाशन मंजूरी के अनुरोधों में तेजी से वृद्धि हुई है।
- 2020: केवल 1 पांडुलिपि समीक्षा के लिए भेजी गई।
- 2021: कोई अनुरोध नहीं आया।
- 2022: 4 पांडुलिपियां भेजी गईं।
- 2023: इस साल संख्या में भारी उछाल आया और 16 पांडुलिपियां (नरवणे की किताब सहित) जमा की गईं।
- 2024: सितंबर तक यह आंकड़ा 14 तक पहुंच गया था।
विवाद और राजनीतिक बयानबाजी
इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमाई हुई है। गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार के मन में पूर्व सेना प्रमुख के लिए “बहुत सम्मान” है और विपक्ष उन्हें “मजाक” का पात्र बनाने की कोशिश कर रहा है।
गौरतलब है कि जनरल नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख थे। यह वही दौर था जब चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव अपने चरम पर था।
दिसंबर 2023 में पीटीआई (PTI) द्वारा जारी उनकी किताब के अंशों में कई संवेदनशील बातों का जिक्र था। इसमें उन्होंने 31 अगस्त, 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ हुई बातचीत को याद किया है।
उन्होंने लिखा कि पूर्वी लद्दाख के रेचिन ला इलाके में चीनी टैंकों के आगे बढ़ने की प्रतिक्रिया में उन्हें फैसला लेना था, जिसे उन्होंने “हॉट पोटैटो” (बेहद कठिन स्थिति) बताया। इसके बाद के महीनों में भी एलएसी पर तनाव बना रहा और अगस्त 2020 से जनवरी 2021 के बीच कई दौर की राजनयिक वार्ताएं हुईं।
फिलहाल, जहां अन्य जनरलों की किताबें पाठकों के हाथों में हैं, वहीं ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ का भविष्य अब भी रक्षा मंत्रालय की फाइलों में कैद है।
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