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गिर के शेरों की मशहूर जोड़ी ‘जय-वीरू’ नहीं रही, वन विभाग की तमाम कोशिशें नाकाम

| Updated: July 30, 2025 11:51

गिर के जंगलों की पहचान बने शेर जय और वीरू की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर दिया है।

गिर (गुजरात)। गुजरात के गिर ने अपने दो सबसे मशहूर और मजबूत एशियाटिक शेरों — जय और वीरू — को खो दिया है। वीरू की मौत जून महीने में हो गई थी, और अब उनके अभिन्न मित्र जय ने भी दम तोड़ दिया। दोनों की मौत जंगल में क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई में आई गंभीर चोटों के चलते हुई है।

वन विभाग और वंतारा (Vantara) की विशेषज्ञ टीम के साथ अनुभवी पशु चिकित्सकों ने जय को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन अंततः वे असफल रहे। वीरू की मौत 11 जून को हुई थी, और लगभग एक महीने बाद जय ने भी अपनी आखिरी सांस ली।

दोस्ती की मिसाल थे ‘जय-वीरू’

गिर के जंगलों में जय और वीरू की जोड़ी उतनी ही प्रसिद्ध थी जितनी फिल्म ‘शोले’ में जय और वीरू की दोस्ती। इन दोनों शेरों की दोस्ती को देखकर जंगल के अनुभवी पर्यवेक्षक भी हैरान थे। मलांका, केनेडीपुर, नटाडिया, इताडी और लिमाडरा जैसे क्षेत्रों में दोनों शेरों की संयुक्त दहाड़ और सफर ने कई बार जंगल की परिभाषा ही बदल दी।

भले ही कभी-कभी इनके बीच हल्की झड़पें भी हुई हों, लेकिन इनकी दोस्ती कभी नहीं टूटी। उनकी दोस्ती पर अक्सर यह गीत सटीक बैठता था —
“ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे, छोड़ेंगे दम मगर, तेरा साथ न छोड़ेंगे…”
गिर आने वाले सैलानियों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक कहावत बन चुकी थी — “गिर में जय-वीरू को नहीं देखा, तो कुछ नहीं देखा।”

सांसद परिमल नथवानी ने जताया शोक

प्रसिद्ध शेर प्रेमी, वन संरक्षण कार्यकर्ता और राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी ने जय की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “जय के निधन से बेहद दुखी हूं। लंबी और बहादुरी से लड़ी गई लड़ाई के बाद, जय भी वीरू के पास चला गया। जिन्होंने भी जय-वीरू की शान देखी है या उनकी कहानियां सुनी हैं, उनके लिए यह व्यक्तिगत क्षति है।”

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में गिर दौरे के दौरान जय और वीरू की भव्यता को देखा था।

जय-वीरू: गिर की आत्मा बन चुके थे

नथवानी ने कहा, “गिर अब पहले जैसा नहीं रहेगा। शेर आ सकते हैं, जा सकते हैं, लेकिन जय-वीरू की तरह के ‘लीजेंड्स’ बार-बार नहीं आते। उनकी आत्मा उस जंगल में हमेशा गूंजेगी, जिसे उन्होंने सालों तक राजशाही की तरह जिया।”

गिर: जहां दोस्ती को भी मिलती है अमरता

गिर के जंगल हमेशा से ऐसी जोड़ीदार कहानियों का गवाह रहे हैं। जय-वीरू से पहले भी यहां ‘धरम-वीर’ नाम की शेरों की जोड़ी थी, जिनकी दोस्ती आज भी वन विभाग और वन प्रेमियों की स्मृतियों में जीवित है।

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