गांधीनगर/खेड़ा: गुजरात में चल रहे मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के काम का भारी दबाव अब सवालों के घेरे में है। इस हफ्ते दो अलग-अलग घटनाओं ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है—खेड़ा जिले में एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की आकस्मिक मौत और सोमनाथ में एक सरकारी शिक्षक द्वारा आत्महत्या।
इन दोनों घटनाओं के बाद शिक्षकों और उनके परिवारों का गुस्सा फूट पड़ा है। उनका आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत BLOs पर काम का इतना बोझ डाला जा रहा है, जिसे संभालना अब उनके बस के बाहर होता जा रहा है। गौरतलब है कि इनमें से अधिकतर BLOs सरकारी स्कूल के शिक्षक हैं, जो शिक्षण और चुनावी काम की दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
क्या हैं मामले?
पहली घटना खेड़ा जिले की है। नवापुरा प्राइमरी स्कूल के 50 वर्षीय प्रिंसिपल और पिछले दो हफ्तों से BLO की जिम्मेदारी संभाल रहे रमेशभाई परमार की मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात उनके घर पर नींद में ही मौत हो गई। वह कपड़वंज तालुका के जांबुड़ी गांव के निवासी थे। उनके परिवार का मानना है कि SIR के काम के अत्यधिक तनाव और लंबे समय तक काम करने की वजह से उनकी जान गई।
रमेशभाई के भाई नरेंद्र परमार ने बताया कि उनकी मृत्यु मंगलवार रात से बुधवार सुबह के बीच हुई।
दूसरी घटना और भी ज्यादा दिल दहलाने वाली है। कोडिनार के सरकारी शिक्षक अरविंद वाढेर ने शुक्रवार की सुबह आत्महत्या कर ली। अपनी पत्नी के नाम लिखे सुसाइड नोट में वाढेर ने साफ तौर पर लिखा कि वह इस चुनावी काम (SIR) की वजह से भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे थे।
बेटी का दर्द: “कनेक्टिविटी नहीं थी, पापा रात भर काम करते रहे”
हालांकि खेड़ा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मीडिया को बताया कि रमेशभाई की मौत प्राकृतिक लग रही है और परिवार या विभाग की ओर से कोई शिकायत न मिलने के कारण अभी कोई जांच शुरू नहीं की गई है। लेकिन रमेशभाई की बेटी शिल्पा का दावा कुछ और ही है।
शिल्पा ने बताया कि उनके पिता BLO के काम को लेकर जबरदस्त तनाव में थे। बुधवार की रात भी वह मतदाता सूची का डेटा एंट्री का काम पूरा करने के लिए देर रात तक जागे थे और अगली सुबह उठ ही नहीं पाए।
शिल्पा ने दर्द बयां करते हुए कहा, “पिछले दो हफ्तों से वह बिना किसी छुट्टी के काम कर रहे थे। डेडलाइन पूरी करने के चक्कर में वह अक्सर खाना तक नहीं खाते थे। अपनी मौत से ठीक एक रात पहले, उन्होंने जल्दबाजी में चाय पी और डेटा एंट्री करने के लिए दूसरे गांव में एक रिश्तेदार के घर चले गए, क्योंकि हमारे घर पर मोबाइल नेटवर्क खराब था। वह काम खत्म करके देर रात घर लौटे थे।”
उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता जांबुड़ी और नवापुरा के बीच हर रोज करीब 30 किलोमीटर का सफर तय करते थे। परिवार का कहना है कि सख्त समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के दबाव ने उनकी जान ले ली। शिल्पा ने कहा, “काम के एक्स्ट्रा बोझ और थकान ने उनकी जान ले ली।”
अधिकारियों और नेताओं की प्रतिक्रिया
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि वे प्रिंसिपल की मौत की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं और पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे। खेड़ा के जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी (DPEO) प्रवेश वाघेला ने पत्रकारों को बताया कि विभाग को इस घटना की जानकारी मीडिया के जरिए मिली। उन्होंने कहा कि काम के अधिक बोझ को लेकर कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी, फिर भी तालुका प्राथमिक शिक्षा अधिकारी को जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
वाघेला ने जानकारी दी कि गुजरात भर में SIR के लिए लगभग 50,963 BLO तैनात हैं, जिसके लिए 308.5 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत है, और इनमें से अधिकांश स्कूल शिक्षक हैं।
राजनीतिक घमासान शुरू
इस मुद्दे पर अब राजनीति भी गरमा गई है। गुजरात कांग्रेस के उपाध्यक्ष बिमल शाह ने वाइब्स ऑफ इंडिया को बताया कि उनकी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य चुनाव अधिकारी से मुलाकात कर SIR से जुड़ी समस्याओं को उठाया है। उन्होंने कहा, “BLOs को जो डेडलाइन दी गई है, वह उन पर अनुचित दबाव बना रही है। कई BLOs के पास तो साल 2002 का विवरण भी नहीं है, जिसे इस प्रक्रिया के लिए कट-ऑफ माना गया है।”
वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोषी ने ‘परख सर्वेक्षण’ (Parakh Survey) का हवाला देते हुए कहा कि गुजरात पहले ही शिक्षा के मामले में नीचे के दस राज्यों में शामिल है। उन्होंने तर्क दिया कि 90 प्रतिशत शिक्षकों को BLO के काम में लगा देने से पढ़ाई का और नुकसान होगा। उन्होंने सवाल उठाया, “अगर शिक्षक स्कूल के बाद भी SIR का काम करेंगे, तो वे छात्रों पर कितना ध्यान दे पाएंगे? अगर शिक्षा प्राथमिकता नहीं है, तो स्तर कैसे सुधरेगा?”
आम आदमी पार्टी और शिक्षक संघ का विरोध
गुजरात आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने भी BLOs पर डाले जा रहे दबाव की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कवायद इसलिए की जा रही है ताकि भाजपा अगले साल होने वाले तालुका, जिला पंचायत और नगर निगम चुनाव जीत सके। उन्होंने कहा कि अगर किसी BLO पर दबाव डाला जा रहा है, तो वे उनकी पार्टी से संपर्क करें, वे इस मुद्दे को उठाएंगे।
दूसरी ओर, शिक्षक संगठनों ने भी कड़ा विरोध जताया है। ‘अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, गुजरात’ ने राज्य सरकार से अपनी शिकायत में कहा है कि BLO ड्यूटी पर रिपोर्ट न करने वाले शिक्षकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करना “गुलामी की प्रथा” जैसा है। उन्होंने शिक्षकों के सम्मान को बनाए रखने के लिए इसे तुरंत रोकने की मांग की है।
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