वडोदरा: कई छात्रों के लिए गणित एक ऐसा विषय है जहां से उनकी चिंता शुरू हो जाती है और संख्याएं सिर के ऊपर से निकलने लगती हैं। हालिया आंकड़े भी इस बढ़ते डर को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। गुजरात बोर्ड द्वारा चार साल पहले बेसिक और स्टैंडर्ड गणित का विकल्प पेश किए जाने के बाद से स्टैंडर्ड मैथ्स चुनने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आई है। यह आंकड़ा 1.10 लाख से घटकर 2024-25 में 61,314 पर आ गया है।
लेकिन पंचमहाल जिले के एक शांत कोने में आंकड़े एक नई भाषा गढ़ रहे हैं, जिसे बच्चे वास्तव में पसंद कर रहे हैं। नवानादीसर गांव के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में गणित अब किताबों से बाहर निकलकर एक बड़े और खुले बगीचे में पहुंच गया है। यहां खेल और अन्वेषण के माध्यम से पढ़ाई हो रही है।
इस नई पहल का समय बहुत महत्वपूर्ण है। पंचमहाल जिले का एसएससी (SSC) पास प्रतिशत 2024 के 81.75% से गिरकर 2025 में 73.60% हो गया है। यह राज्य के सभी जिलों में दूसरा सबसे कम आंकड़ा है, जो शिक्षा में नए और रोचक दृष्टिकोण अपनाने की सख्त जरूरत को रेखांकित करता है।
हरियाली के बीच एक विशाल एबेकस, धातु की संख्या रेखाएं, और जीवन के आकार की आकृतियां व कोण मिलकर एक बेहद जीवंत ‘मैथ्स पार्क’ बनाते हैं। यहां बच्चे सिर्फ गणित की समस्याओं को हल नहीं करते हैं। वे संख्या रेखाओं पर चलते हैं, ज्यामितीय आकारों को छूते हैं और सभी अवधारणाओं का प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं।
गुजरात में अपनी तरह की यह पहली अनूठी पहल अमूर्त अंकगणित और ज्यामिति को कुछ ऐसा बना रही है जिसे छुआ जा सके, जो समझने में आसान हो और बेहद मजेदार भी हो। इस पूरे पार्क का विचार, डिजाइन और निर्माण स्कूल के शिक्षकों द्वारा ही संचालित किया गया है। उन्होंने किसी बाहरी ठेकेदार को काम पर रखने के बजाय स्थानीय कारीगरों के साथ मिलकर इसे तैयार किया है।
गणित के शिक्षक शांतिलाल मालीवाड़ के लिए इसका लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट था; एक अमूर्त विषय को मूर्त रूप देना। उनका कहना है कि गणित को आमतौर पर छुआ या देखा नहीं जा सकता, लेकिन यह पार्क इसे छात्रों के लिए वास्तविक बनाता है। उन्होंने बताया कि यहां छोटे और बड़े दोनों बच्चों के लिए दिलचस्प गतिविधियां मौजूद हैं। व्यावहारिक जुड़ाव के बिना यह विषय अक्सर उबाऊ और डरावना लग सकता है।
शिक्षक की यह चिंता एक बड़े चलन को भी दर्शाती है। जब से गुजरात बोर्ड ने कक्षा 10 में स्टैंडर्ड और बेसिक गणित के विकल्प पेश किए हैं, तब से स्टैंडर्ड स्तर चुनने वाले छात्रों की संख्या लगातार कम हो रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा ही चलता रहा, तो तकनीकी और शुद्ध विज्ञान स्ट्रीम में जाने वाले छात्रों की पाइपलाइन सिकुड़ सकती है। ऐसे में गणित में शुरुआती रुचि जगाना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
इस पार्क की शुरुआत का विचार बहुत ही छोटे स्तर से हुआ था। शिक्षक गोपाल पटेल ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में बच्चों को वजन की अवधारणा समझाने के लिए एक तराजू लगाने के बारे में सोचा था। लेकिन यह विचार धीरे-धीरे बढ़ता गया और अंततः उन्होंने प्रिंसिपल राकेश पटेल और मालीवाड़ के साथ मिलकर पूरे मैथ्स पार्क की रूपरेखा तैयार कर ली।
आज इस पार्क में आकार, कोण, क्षेत्रफल और आयतन जैसी आठ प्रमुख गणितीय अवधारणाओं को समझाने के लिए अलग-अलग जोन बनाए गए हैं। छात्र भौतिक रूप से आयामों को माप सकते हैं और आकृतियों की तुलना कर सकते हैं। वे मीटर, इंच और सेंटीमीटर में चिह्नित धातु की पट्टियों का उपयोग करके इकाई रूपांतरण भी आसानी से समझ सकते हैं।
सकारात्मक और नकारात्मक पूर्णांक जैसी अवधारणाओं को एक धातु की संख्या रेखा और एक कस्टमाइज्ड ‘सांप और सीढ़ी’ गेम के माध्यम से सिखाया जाता है। एक अन्य संवादात्मक उपकरण छात्रों को ‘<‘ और ‘>’ के दोनों ओर संख्याएं भरकर असमानता के संकेतों का अभ्यास करने की सुविधा देता है।
गोपाल पटेल के अनुसार, यह पार्क शिक्षा में नवीन विचारों को लाने के उनके निरंतर प्रयास का ही एक सुखद परिणाम है। वे सभी शिक्षक आपस में चर्चा करते हैं और फिर मिलकर उन्हें लागू करते हैं।
‘प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया’ (पीएम श्री – PM SHRI) योजना के तहत एक मॉडल संस्थान के रूप में चुने गए इस स्कूल की अब हर तरफ चर्चा हो रही है। यह विद्यालय गणित जैसे डरावने विषय को एक इंटरैक्टिव और आउटडोर अनुभव में बदल रहा है, वह भी एक बार में एक संख्या के साथ।
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