गुजरात सरकार ने एक अहम कदम उठाते हुए यह घोषणा की है कि राज्य में कई छोटे अपराधों को अब अपराध की श्रेणी से बाहर किया जाएगा। इन मामलों में आपराधिक कार्रवाई की जगह केवल जुर्माना लगाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से अदालतों पर बोझ कम होगा और कारोबार करना भी आसान हो जाएगा।
राज्य के मंत्री ऋषिकेश पटेल ने बुधवार (3 सितंबर 2025) को जानकारी दी कि आगामी विधानसभा सत्र, जो 8 से 10 सितंबर तक चलेगा, में ‘गुजरात जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक’ पेश किया जाएगा। यह विधेयक राज्य के 11 मौजूदा कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव रखता है।
किन अपराधों को हटाया जाएगा आपराधिक दायरे से?
प्रस्तावित कानून के तहत कई ऐसे अपराधों को केवल जुर्माने से निपटाया जाएगा, जिन पर फिलहाल आपराधिक कार्रवाई होती है। इनमें शामिल हैं:
- अवैध निर्माण
- सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण
- कचरा न हटाना
- कर भुगतान में चूक
- नगर निगम की अनुमति के बिना गंदे पानी का निस्तारण
- बिना लाइसेंस के डेयरी उत्पादों की बिक्री
- नगर निकाय के निर्देशों की अवहेलना
इसके अलावा, तीर्थयात्रियों को अवैध इमारतों में ठहराना, सड़क नाम की पट्टिकाओं को खराब करना, अधिकृत अधिकारियों को परिसर में प्रवेश से रोकना और वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से सार्वजनिक स्थानों पर घूमने जैसे अपराध भी अब जुर्माने से निपटाए जाएंगे।
अनुपालन का बोझ होगा कम
मंत्री पटेल ने कहा कि इन संशोधनों का उद्देश्य नियमों को सरल बनाना और अदालतों में लंबित मामलों की संख्या घटाना है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, यह बदलाव उन पुराने कानूनों को हटाने की दिशा में है जो आज के समय में बेवजह की जटिलताएँ और अनुपालन का बोझ पैदा कर रहे हैं।
इन संशोधनों का असर कई कानूनों पर पड़ेगा, जिनमें शामिल हैं:
- गुजरात नगर पालिका अधिनियम
- गुजरात टाउन प्लानिंग और शहरी विकास अधिनियम
- गुजरात कृषि उपज विपणन अधिनियम
विधानसभा में पांच विधेयक होंगे पेश
इस बार के मानसून सत्र में कुल पाँच विधेयक चर्चा और पारित करने के लिए रखे जाएंगे, जिनमें जन विश्वास विधेयक भी शामिल है। मंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य मौजूदा कानूनी प्रावधानों को तार्किक बनाना और शासन प्रणाली में भरोसे का माहौल कायम करना है।
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