अहमदाबाद: एक समय था जब गुजरात के घर बच्चों की खिलखिलाहट से गूँजते थे, लेकिन अब यह तस्वीर तेज़ी से बदल रही है। हाल ही में जारी हुए आँकड़े एक बड़ी चिंता की ओर इशारा कर रहे हैं। भारत की जनगणना द्वारा जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की सांख्यिकीय रिपोर्ट 2023 के अनुसार, गुजरात में कुल प्रजनन दर (TFR) घटकर 1.8 पर आ गई है, जो राष्ट्रीय औसत 1.9 से भी कम है।
यह आँकड़ा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि यह दिखाता है कि गुजरात में बच्चे पैदा करने की दर में भारी गिरावट आई है।
एक दशक में आई रिकॉर्ड गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक, 2011-13 और 2021-23 के बीच गुजरात की TFR में 24% की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट भारत के राज्यों में दिल्ली (27.8%) के बाद दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है। पूरे देश में केवल तीन राज्य – गुजरात, दिल्ली और झारखंड (21.4%) – ऐसे हैं जहाँ प्रजनन दर में 20% से ज़्यादा की कमी आई है।
आपको बता दें कि TFR का मतलब है कि एक महिला अपने पूरे जीवनकाल में औसतन कितने बच्चों को जन्म देगी।
क्या आबादी घटने का ख़तरा है?
अहमदाबाद ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी सोसाइटी (AOGS) के सचिव डॉ. पार्थ शाह बताते हैं कि किसी भी आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए TFR का 2.1 होना ज़रूरी है। इसे ‘रिप्लेसमेंट लेवल’ कहा जाता है।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, “इस स्तर से नीचे जाना यह संकेत देता है कि कुल आबादी में कमी आ रही है। यह दुनिया भर में एक बड़ा मुद्दा है, जहाँ आबादी बूढ़ी हो रही है। इसके पीछे कई कारण हैं, जैसे- देरी से शादी होना, परिवार नियोजन के विकल्प और छोटे परिवार की चाहत।”
डॉ. शाह ने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में माँ बनने की औसत उम्र भी बढ़ी है। जहाँ 2010 में यह 25-26 साल थी, वहीं आज यह बढ़कर 28-35 साल हो गई है। उन्होंने कहा, “हमारे पास आने वाले केवल 20% मरीज़ ही दूसरे बच्चे के लिए आते हैं। तीसरे बच्चे का जन्म तो अब बेहद दुर्लभ हो गया है। हमें 2-3 महीने में शायद कोई एक ऐसा मामला देखने को मिलता है।”
जन्म दर के आँकड़े भी दे रहे गवाही
रिपोर्ट में गुजरात की अशोधित जन्म दर (Crude Birth Rate – CBR) में भी गिरावट पर प्रकाश डाला गया है। CBR का मतलब प्रति 1,000 लोगों पर एक साल में पैदा होने वाले जीवित बच्चों की संख्या है।
- राष्ट्रीय स्तर पर CBR 21.6 से घटकर 18.9 पर आ गया, जो 12.5% की गिरावट है।
- वहीं, गुजरात में यह गिरावट और भी ज़्यादा तेज़ रही। यहाँ CBR 22.2 से घटकर 18.3 पर आ गया, जो 17.6% की बड़ी गिरावट है।
जागरूकता की कमी एक बड़ी वजह
सार्वजनिक स्वास्थ्य, लिंग और अधिकारों पर काम करने वाली गैर-सरकारी संस्था ‘सहज’ की निदेशक रेनू खन्ना का मानना है कि हमें सिर्फ बड़े आँकड़ों से आगे देखने की ज़रूरत है।
वह कहती हैं, “शहरी और ग्रामीण महिलाओं के साथ अपने काम के दौरान हमने देखा है कि बहुत कम महिलाओं को प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में पर्याप्त जानकारी है, परिवार नियोजन की बात तो दूर की है।”
गुजरात में प्रजनन दर का यह बदलता रुझान पूरे भारत और दुनिया में हो रहे एक बड़े बदलाव को दर्शाता है। परिवार अब बच्चे पैदा करने में देरी कर रहे हैं, बच्चों की संख्या सीमित रख रहे हैं और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी के अभाव से भी जूझ रहे हैं।
यह भी पढ़ें-
मां हीराबा के पिंडदान के लिए गयाजी जाएंगे पीएम मोदी, बिहार चुनाव से पहले इस दौरे के क्या हैं मायने?








