गांधीनगर: गुजरात में संपत्ति और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में राज्य सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार टाउन प्लानिंग (TP) योजनाओं के दायरे में आने वाले क्षेत्रों के लिए ‘गैर-कृषि’ (Non-Agriculture या NA) प्रमाण पत्र प्राप्त करने की अनिवार्य शर्त को हटाने (डीरेगुलेट करने) के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो आवासीय, कमर्शियल, मिक्स्ड-यूज़ और औद्योगिक—सभी प्रकार के प्रोजेक्ट्स को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
केंद्र के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में संकेत
विकास से जुड़े सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को गांधीनगर में एक अहम उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भारत सरकार (GoI) के अधिकारियों के साथ-साथ राज्य सरकार के सभी विभागों के सचिव मौजूद थे।
इस बैठक के दौरान, गुजरात सरकार ने केंद्र सरकार को आश्वासन दिया है कि वह राज्य भर में ड्राफ्ट (प्रारूप) और फाइनल (अंतिम) टीपी स्कीमों के तहत आने वाले क्षेत्रों में एनए मंजूरी लेने की धारा को निरस्त करने की संभावना तलाश रही है।
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
वर्तमान में, एनए सर्टिफिकेट हासिल करने की प्रक्रिया कलेक्ट्रेट और जिला विकास कार्यालयों के माध्यम से पूरी होती है। यह प्रक्रिया प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक साबित हो रही है।
कई मामलों में आवेदकों को अपना एनए सर्टिफिकेट पाने के लिए 2 साल या उससे भी अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि उद्योगों, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स, अस्पतालों और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स जैसे कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव एनए आवेदनों की प्रोसेसिंग में देरी के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
देरी के कारण न केवल प्रोजेक्ट की लागत (Cost escalation) बढ़ जाती है, बल्कि इसका नकारात्मक असर राज्य के समग्र विकास पर भी पड़ता है।
एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने पुष्टि की, “गुजरात सरकार ने भारत सरकार को आश्वस्त किया है कि वह टाउन प्लानिंग योजनाओं के तहत आने वाले क्षेत्रों में अनिवार्य एनए प्रमाणीकरण की शर्त को हटाने पर विचार कर रही है। यह नियम ड्राफ्ट और फाइनल दोनों तरह की टीपी योजनाओं पर लागू होगा।”
भ्रष्टाचार पर भी लगेगी लगाम
सूत्रों का कहना है कि एनए सर्टिफिकेशन की अनिवार्य प्रक्रिया ने जिला प्रशासन स्तर पर भ्रष्टाचार को भी पनपने का मौका दिया है। प्रक्रियाओं की जटिलता का फायदा उठाकर अक्सर अनुचित लाभ उठाने के मामले सामने आते रहे हैं।
इसका एक ताजा और गंभीर उदाहरण हाल ही में देखने को मिला, जब भूमि उपयोग परिवर्तन (Land-use change) के आवेदनों को तेजी से निपटाने के लिए एक कथित रिश्वत रैकेट का भंडाफोड़ हुआ।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुरेंद्रनगर के पूर्व जिला कलेक्टर राजेंद्रकुमार पटेल और अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूर्व कलेक्टर को निलंबित कर दिया था।
सरकार का यह प्रस्तावित कदम न केवल प्रोजेक्ट्स को गति देगा, बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता लाने में भी मददगार साबित होगा।
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